ब्रेकिंग
West Bengal Update: बंगाल के युवाओं और किसानों की चांदी! ममता सरकार देगी हर महीने भत्ता, जानें कैसे ... Jaipur Mystery: जयपुर में गायब हुए 2 जापानी टूरिस्ट; रेस्टोरेंट से हुए लापता और सीधे पहुँच गए जापान,... Rail Safety Crisis: ट्रेन में यात्री भगवान भरोसे! वेंडरों ने बेरहमी से पीट-पीटकर यात्री को किया अधमर... Assam Voter List: असम की फाइनल वोटर लिस्ट जारी; ड्राफ्ट सूची से 2.43 लाख नाम बाहर, अब 2.49 करोड़ मतद... Cyber Fraud Update: साइबर ठगों की अब खैर नहीं! CBI और I4C का चलेगा 'हंटर', अमित शाह ने दी देश के दुश... Delhi Govt Scheme: दिल्ली की बेटियों के लिए खुशखबरी! 'लखपति बिटिया' योजना का आगाज, अब लाडली की जगह म... Exam Special: ड्रोन कैमरे का कमाल! 12वीं के बोर्ड पेपर में दीवार फांदकर नकल कराते दिखे अभिभावक, कैमर... Peeragarhi Mystery: काला जादू या सोची-समझी साजिश? पीरागढ़ी केस में 'तांत्रिक' कनेक्शन से हड़कंप, कार... Budget 2026: लोकसभा में बजट पर बहस का आगाज़! राहुल और नरवणे की किताब पर विवाद के बीच विपक्ष ने सरकार... Delhi Crime: दिल्ली में खेल-खेल में मची चीख-पुकार! 18 साल के बेटे से गलती से चली गोली, मां की मौके प...

Mahabharata Mystery: शकुनि नहीं, बल्कि ये पात्र था महाभारत का असली खलनायक! भगवान कृष्ण ने भी किया था इशारा

महाभारत सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि यह धर्म और अधर्म के संघर्ष की गाथा भी है. इस महाग्रंथ में जहां भगवान श्रीकृष्ण को धर्म और नीति का प्रतीक माना जाता है, वहीं अक्सर शकुनि को सबसे बड़ा खलनायक बताया जाता है. लेकिन पौराणिक मान्यताओं और घटनाओं को ध्यान से देखें तो कई विद्वान मानते हैं कि महाभारत में भीष्म पितामह की भूमिका भी बेहद जटिल रही है. वे अधर्म के सीधे कर्ता तो नहीं थे, लेकिन कई मौकों पर उनकी चुप्पी ने अधर्म को बढ़ावा दिया.

क्यों माना जाता है भीष्म पितामह को दोषी?

प्रतिज्ञा का घातक बंधन भीष्म ने आजीवन हस्तिनापुर के सिंहासन की रक्षा की शपथ ली थी. इसी प्रतिज्ञा के कारण वे दुर्योधन की गलतियों पर पर्दा डालते रहे. उन्होंने राष्ट्रहित से ऊपर अपनी निजी प्रतिज्ञा को रखा, जिसने आखिर में पूरे वंश का विनाश कर दिया.

द्रौपदी चीरहरण पर शर्मनाक चुप्पी यह महाभारत का वो काला अध्याय है जिसने भीष्म के चरित्र पर सबसे गहरा दाग लगाया. भरी सभा में जब द्रौपदी का अपमान हो रहा था, तब भीष्म जैसा प्रतापी योद्धा सिर झुकाए बैठे रहे. उनकी इस कार्य ने दुर्योधन के दुस्साहस को बढ़ाया था, जो महाभारत के विनाशकारी युद्ध का सबसे बड़ा कारण बना था.

मन पांडवों के साथ, शस्त्र कौरवों के लिए भीष्म जानते थे कि पांडव सत्य के मार्ग पर हैं और कृष्ण उनके साथ हैं. इसके बावजूद उन्होंने कौरवों की सेना का नेतृत्व किया. उनकी यह दोहरी भूमिका ही उन्हें शकुनि और दुर्योधन के समकक्ष खड़ा करती है.

बाणों की शैया: कर्मों का फल पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भीष्म को युद्ध के आखिर में बाणों की शैया पर लेटना पड़ा. यह केवल एक योद्धा की मृत्यु नहीं थी, बल्कि उनके द्वारा किए गए मौन पाप की सजा थी. बाणों की चुभन उस दर्द का प्रतीक थी जो उन्होंने अधर्म का साथ देकर समाज को दिया था.