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सोम डिस्टलरी पर आरोप सिद्ध होने के बावजूद क्यों नहीं दी कड़ी सजा ? 575 करोड़ रुपए की वसूली कब करेगी सरकार ?

भोपाल। बाल मजदूरी के आरोप में घिरे सोम डिस्टलरीज की शराब फैक्ट्री पर सरकार ने कार्यवाई कर वाहवाही लूटने की जो कोशिश की है ,उसने कई बड़े सवालों को जन्म दे दिया है। शराब माफिया सोम डिस्टलरीज के लाइसेंस को महज 20 दिनों के लिए निलंबित करना ये बताता है कि ये कड़ी कार्यवाई के नाम पर ये सिर्फ और सिर्फ खानापूर्ति है। शराब माफिया के खिलाफ पंजाब केसरी की मुहिम के चलते भारी दबाव में आ चुकी मोहन सरकार ने सोम को बचाने की पूरी कोशिश की। और अभी भी ये कोशिश जारी है। बड़ा सवाल ये है कि जब सोम डिस्टलरीज की शराब फेक्ट्री में बाल मजदूरी के सारे सबूत मिल चुके हैं। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग से लेकर प्रदेश सरकार और आबकारी विभाग ने आरोप को सही पाया है। खुद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी माना कि सोम कम्पनी ने बाल मजदूरी का गम्भीर अपराध किया है। लेकिन उसके बाद कड़ी सजा के नाम पर महज़ 20 दिनों के लिए कम्पनी का लाइसेंस निलंबित करना….! क्या यही कड़ी सजा होती है..? ये सवाल पंजाब केसरी बार – बार पूछ रहा है। क्या उन 58 मासूमों की जिंदगी की कीमत सरकार की नज़रों में सिर्फ 20 दिन ही है। या इस निर्णय के पीछे भी सोम को बचाने की कोई साज़िश है..?

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पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने भी कार्यवाई पर उठाए सवाल। शराब माफिया से सांठगांठ करने वाले अधिकारियों पर भी कार्यवाई की मांग।

सरकार के सोम डिस्टरलरीज पर कार्रवाई पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अरुण यादव ने ट्वीट कर कहा कि  मासूम बचपने को कत्ल करने की सज़ा सिर्फ 20 दिन, मप्र में 59 लाड़ले – लाड़लियों से सोम डिस्टरलरीज में करवा रहे थे बालश्रम। लेकिन खानापूर्ति के लिए सोम डिस्टरलरीज़ के लाइसेंस को सिर्फ 20 दिन के लिए निलंबित किया ।
यह कैसा न्याय है ? साथ ही सरकार ने अब तक 583 करोड़ रुपये की वसूली को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है और न ही सांठगांठ करने वाली बड़ी मछलियों (नेताओं – अधिकारियों) पर कोई कठोर कार्यवाही नहीं की है । अरुण यादव ने ट्वीट में आगे कहा की मेरी सरकार से मांग है लाइसेंस को स्थाई रूप से निरस्त किया जाए, साथ ही तत्काल 583 करोड़ रुपये की वसूली करें और शराब कंपनी से सांठगांठ करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही करे।

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20 दिनों के निलंबन ने सोम के हाईकोर्ट जाने का रास्ता किया साफ, आबकारी विभाग के अधिकारी कर रहे शराब माफिया को बचाने की पुरजोर कोशिश।

आबकारी विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि सोम डिस्टलरीज के लाइसेंस के निलंबन का जो आदेश आबकारी विभाग ने जारी किया है, उसे देख कर साफ पता चलता है कि कार्यवाई की आड़ में आबकारी विभाग के अधिकारियों ने सोम डिस्टलरीज को हाईकोर्ट से राहत पाने का रास्ता बिल्कुल साफ कर दिया है। जानकारों के मुताबिक आदेश में ऐसे कई पेंच जानबूझकर फँसाये गए हैं जिससे हाईकोर्ट में सोम डिस्टलरीज को राहत तो मिल ही जाए साथ ही भविष्य में भी सरकार शराब माफिया पर कठोर कार्यवाई करने की हालत में ना बचे। इस पूरे मामले में हर बार की तरह आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा तो सोम का बचाव कर रहे हैं । लेकिन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल की भूमिका पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। सोम की शराब फैक्ट्री के खिलाफ लायसेंस निलंबन और फैक्ट्री सीज़ करने की जो कार्यवाई छापे के 4 दिन बाद मुख्यमंत्री  के निर्देश के बाद कि गई है , अगर आबकारी आयुक्त ईमानदारी से चाहते तो ये कार्यवाई सोम के रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद तुरंत ही कर सकते थे। लेकिन कार्यवाई करने के बजाए जिला प्रशासन के साथ मिलकर आबकारी आयुक्त समेत विभाग के अधिकारियों ने सोम को बचने का पर्याप्त समय दिया।

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हाईकोर्ट में भी सोम की राह नही आसान, आबकारी एक्टिविस्ट ने दायर की केविएट, पंजाब केसरी भी लगातार कर रहा शराब माफिया के काले कारनामों का पर्दाफाश।

आबकारी विभाग के अधिकारियों ने भले ही सोम डिस्टलरीज के प्रति अपनी वफादारी पूरी शिद्दत के साथ निभाई हो। लेकिन इस बार हाईकोर्ट में सोम डिस्टलरीज को राहत पाने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। दरअसल सोम के बाल मजदूरी मामले में दोषी पाए जाने के बाद जिस तरह से आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने कार्यवाई के नाम पर हीलाहवाली की , उसे देखते हुए प्रदेश के आबकारी एक्टिविस्ट पंकज सिंह भदौरिया भी एक्टिव हो गए। और सोम डिस्टलरीज के हाईकोर्ट जाने से पहले ही भदौरिया ने हाईकोर्ट में सोम डिस्टलरीज के खिलाफ केविएट दायर कर दी है। जिसके चलते अब हाईकोर्ट में भी सोम की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। दूसरी तरफ पंजाब केसरी भी लगातार शराब माफिया सोम डिस्टलरीज के काले कारनामों को उजागर कर रहा है। और इसी का फल है कि आज सरकार को ना चाहते हुए भी सोम डिस्टलरीज के खिलाफ दिखावटी ही सही लेकिन कार्यवाई के आदेश देने ही पड़े। पंजाब केसरी की ही खबरों के चलते प्रदेश सरकार से लेकर आबकारी विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों तक और सत्ता में बैठे शराब माफिया के हमदर्दों से लेकर विपक्षी दल में सोम के शुभचिंतकों तक सभी की नींदें उड़ी हुई हैं। लेकिन पंजाब केसरी यहीं रुकने वाला नही है। हम लगातार शराब माफिया के काले कारनामों को उजागर करके इस लड़ाई को मुकाम तक ले जाएंगे।