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मध्य प्रदेश में बना एशिया का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्लांट, 6000 करोड़ की लागत से मार्च तक शुरू होगा 2000 मेगावाट उत्पादन

इंदौर: मध्य प्रदेश ऊर्जा और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में बेहद तेज गति के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। विभिन्न औद्योगिक सेक्टरों में भारी-भरकम निवेश आने के साथ ही अब प्रदेश ने नवकरणीय (रिन्यूएबल) ऊर्जा आधारित हाइड्रो पावर जनरेशन के मामले में भी एक लंबी और ऐतिहासिक छलांग लगाई है। राज्य के नीमच जिले में स्थित गांधी सागर डैम पर लगभग 6000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्लांट बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है, जिसके जरिए आगामी मार्च माह तक 2000 मेगावाट बिजली का बंपर उत्पादन शुरू हो जाएगा।

गांधी सागर डैम पर तैयार हुई देश की यह अनूठी परियोजना, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में दी इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी

मध्य प्रदेश अपनी लगातार बढ़ती हुई ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ-साथ राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों की बिजली की भारी मांग को पूरी तरह से पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वाणिज्यिक नगरी इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस महत्वाकांक्षी प्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि हाइड्रो पावर प्लांट की यह विशाल परियोजना प्रदेश की कुल ऊर्जा क्षमता को कई गुना बढ़ाने के साथ-साथ औद्योगिक सेक्टर की तमाम आवश्यकताओं की पूर्ति में बहुत ही महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाएगी। इस आधुनिक प्लांट के शुरू होने से देश-दुनिया में मध्य प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में एक नई और गौरवशाली पहचान मिलेगी।

6 हजार करोड़ से अधिक की लागत से हुआ है निर्माण, दिसंबर से शुरू होगी पहली टरबाइन और मार्च तक प्लांट होगा पूरी तरह चालू

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगे बताया कि प्रदेश के भीतर 6 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की लागत से एशिया के इस सबसे बड़े नवकरणीय ऊर्जा आधारित हाइड्रो पावर प्लांट का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है, जो राज्य के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस परियोजना की पहली टरबाइन इसी दिसंबर के महीने से काम करना शुरू कर देगी, जबकि लगभग 2000 मेगावाट कुल क्षमता वाला यह विशालकाय हाइड्रो पावर प्लांट मार्च तक अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करने लगेगा। उद्योग जगत और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के तमाम क्षेत्रों के लिए नवकरणीय ऊर्जा का यह अनूठा प्लांट मील का पत्थर साबित होगा।

पारंपरिक ऊर्जा से अलग है यह तकनीक, एक ही पानी को बार-बार री-सर्कुलेट करके बनाई जाएगी पर्यावरण-अनुकूल बिजली

वर्तमान में मध्य प्रदेश के भीतर सौर, जल और पवन ऊर्जा के माध्यम से करीब 5,000 मेगावाट बिजली का सफलतापूर्वक उत्पादन किया जा रहा है, जबकि इसके अलावा लगभग 10,000 मेगावाट क्षमता के नए सरकारी और निजी प्लांट अभी निर्माणाधीन हैं। यह नई हाइड्रो परियोजना पारंपरिक और पुराने हाइड्रो प्लांटों से काफी अलग और आधुनिक है। इस तकनीक में एक ही पानी को बार-बार री-सर्कुलेट (पुनः चक्रित) करके बिजली का उत्पादन किया जाएगा, जिससे पानी की एक भी बूंद बर्बाद नहीं होगी। दिन के समय जब सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होगी, तब अत्याधुनिक और बड़े मोटर पंपों की सहायता से निचले जलाशय का पानी 31 मीटर ऊंचे पहाड़ पर बने ऊपरी बांध में सुरक्षित स्टोर कर लिया जाएगा।

प्रदेश भर में इस वर्ष भी पूरी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा, उत्कृष्ट पशुपालकों को मिलेंगे बड़े पुरस्कार

इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी पर्व का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में इस वर्ष भी गोवर्धन पूजा का पावन पर्व पूरे उत्साह, गहरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले दिनों प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय और शुद्ध देसी नस्ल की दुधारू गौमाताओं के लिए विशेष प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं। इन प्रतियोगिताओं में विजयी रहने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रथम पुरस्कार के रूप में 1 लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी।