ब्रेकिंग
एनआईए की अपील पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सचिन वाझे की जमानत हुई रद्द यूपी की वोटर लिस्ट में 2.4 करोड़ मतदाताओं का बड़ा अंतर, विधानसभा और पंचायत सूची में भारी विरोधाभास बिहार के दरभंगा में बदमाशों की गोली से ASI घायल, गश्ती के दौरान उजान गांव के पास हुआ हमला हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में 11,320 फीट की ऊंचाई पर बसा है बेहद खूबसूरत और शांत गांव चित्रकुल, ... रणबीर-यश की 'रामायण' में रावण के एक सिंहासन को बनाने में खर्च हुए 1 करोड़ रुपये, जानिए दिलचस्प बातें सिनेमाघरों में रिलीज हुई रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी की महात्वाकांक्षी फिल्म 'रामायण', रिलीज से पहल... यूरोप में बम की झूठी धमकियों से मचा हड़कंप, एक हफ्ते में दूसरी बार 12 से ज्यादा विमानों का बदला गया ... भारत और श्रीलंका के बीच आगामी 13 दिसंबर 2026 को खेला जाने वाला पहला वनडे मुकाबला दिल्ली के बजाय अब व... चीन की चालबाजी के बीच फिलीपींस खरीदेगा भारत की ब्रह्मोस मिसाइलें, 700 मिलियन डॉलर से अधिक की हो सकती... नगर निगम की अनूठी और सराहनीय पहल, 'स्वच्छ दिवाली 1 रुपये वाली' मुहिम के जरिए कबाड़ से उपयोगी बने साम...

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से निर्विरोध चुने गए राज्यसभा सांसद, दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन हुए थे खारिज

भोपाल: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए गुरुवार को निर्विरोध चुन लिए गए हैं। यह स्थिति तब बनी जब चुनाव मैदान में उतरे दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन पत्र तकनीकी कारणों से खारिज कर दिए गए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश संगठन और नेताओं की मौजूदगी में यह निर्वाचन प्रक्रिया पूरी हुई। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने गुरुवार को राज्य विधानसभा सचिवालय में पहुंचकर रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा से हरदीप पुरी की जीत का आधिकारिक निर्वाचन प्रमाणपत्र प्राप्त किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और भगवानदास सबनानी सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे।

कांग्रेस नेताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों की आपत्तियां हुईं खारिज, रिटर्निंग ऑफिसर ने 3 नवंबर को स्वीकार किया था हरदीप पुरी का नामांकन

इससे पहले, विपक्षी कांग्रेस नेताओं और कुछ अन्य उम्मीदवारों द्वारा हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर जो आपत्तियां उठाई गई थीं, उन्हें संवीक्षा (स्क्रूटनी) के दौरान कानूनी रूप से खारिज कर दिया गया। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने गत 3 नवंबर को पुरी के नामांकन पत्र को पूरी तरह वैध मानकर स्वीकार कर लिया था। मैदान में उतरे अन्य दो उम्मीदवारों—राजकुमार लोहानी और कांते सयाना—के नामांकन पत्र खारिज हो जाने के बाद हरदीप सिंह पुरी इस चुनाव में एकमात्र वैध उम्मीदवार के रूप में मैदान में रह गए थे।

निर्धारित शर्तों को पूरा न करने के कारण खारिज हुए राजकुमार लोहानी और कांते सयाना के पर्चे

चुनाव आयोग के आदेश और नियमों के अनुसार, उम्मीदवार कांते सयाना का नामांकन इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि वे राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों से जुड़े नियमों (कम से कम 10 चुने हुए विधायकों के प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर होने की अनिवार्य शर्त) को पूरा करने में असफल रहे थे। वहीं दूसरी ओर, दूसरे उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन इस वजह से खारिज हुआ क्योंकि वे निर्धारित अंतिम तिथि यानी 2 नवंबर 2026 को दोपहर 3 बजे तक अपना आवश्यक ‘फॉर्म 26’ का शपथ पत्र (Affidavit) जमा नहीं कर पाए थे।

नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद पुरी बने इकलौते उम्मीदवार, बिना किसी विरोध के तय हुआ उच्च सदन का सफर

इस चुनाव के तहत नाम वापस लेने की अंतिम और निर्धारित डेडलाइन 5 नवंबर को दोपहर 3 बजे समाप्त हुई। चूंकि चुनावी मैदान में हरदीप सिंह पुरी के अलावा कोई अन्य वैध उम्मीदवार शेष नहीं बचा था, इसलिए नियमों के तहत उन्हें बिना किसी विरोध के राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना हुआ घोषित कर दिया गया।

एल मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी यह सीट, 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में दाखिल किया था पर्चाउल्लेखनीय है कि राज्यसभा की यह महत्वपूर्ण सीट केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिए जाने के कारण 14 अक्टूबर को खाली हुई थी। नियमानुसार राज्यसभा में उनका कार्यकाल मूल रूप से 2 अप्रैल 2030 को समाप्त होने वाला था। इसी रिक्त सीट पर उपचुनाव के तहत हरदीप सिंह पुरी ने गत 31 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला व जगदीश देवड़ा, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, राज्य मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति में भोपाल स्थित विधानसभा भवन में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था।