Ranchi Chhath Puja Preparations: लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर रांची में प्रशासनिक तैयारियां तेज, नगर आयुक्त ने किया तालाबों का औचक निरीक्षण
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सूर्य उपासना के महान लोक पर्व ‘छठ’ के भव्य आयोजन को लेकर तैयारियां अब अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर हैं। पर्व के दौरान व्रतियों और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए रांची नगर निगम ने शहर के सभी प्रमुख तालाबों और छठ घाटों को दुरुस्त करने की मुहिम तेज कर दी है। इसी सिलसिले में शनिवार के रोज नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने अपर नगर आयुक्त संजय कुमार तथा निगम के अन्य वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों के साथ मिलकर शहर के कई प्रमुख तालाबों व छठ घाटों का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण किया। इस दौरान नगर आयुक्त ने घाटों पर साफ-सफाई की स्थिति, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधों और श्रद्धालुओं के आवागमन से जुड़ी तमाम सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। इसके साथ ही, सार्वजनिक तालाबों और छठ घाटों पर फैल रहे अवैध कब्जों व अतिक्रमण के मामलों पर निगम प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।
अरगोड़ा, तिरिल और स्वर्णरेखा घाट समेत आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण स्थलों का लिया गया जायजा, दिए गए आवश्यक निर्देश
निरीक्षण अभियान के दौरान नगर निगम के अमले ने शहर के प्रमुख स्थलों जिनमें अरगोड़ा तालाब, डोरंडा स्थित बटन तालाब, नामकुम का स्वर्णरेखा घाट, कोकर स्थित तिरिल तालाब, जेल तालाब और चडरी तालाब का स्थलीय जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने आगामी छठ पर्व के अवसर पर व्रतियों, उनके परिजनों और बड़ी संख्या में जुटने वाले श्रद्धालुओं को होने वाली संभावित कठिनाइयों पर विचार-विमर्श किया। नगर आयुक्त ने मातहत अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि पर्व के आयोजन से काफी पहले सभी घाटों की चाक-चौबंद और विशेष साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। घाटों तक आने-जाने वाले कच्चे-पक्के रास्तों को सुगम बनाने के साथ-साथ पर्याप्त हाई-मास्ट लाइट और जनरेटर की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि अस्ताचलगामी (संध्या अर्घ्य) और उदीयमान सूर्य (उषा अर्घ्य) को जल अर्पित करने के दौरान श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, गहरे पानी वाले खतरनाक स्थानों पर की जाएगी मजबूत बैरिकेडिंग और लगेंगे चेतावनी बोर्ड
निरीक्षण के दौरान तालाबों में जलस्तर और पानी की गहराई को लेकर विशेष एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। जिन-जिन स्थानों पर पानी की गहराई अधिक है, उन सभी संवेदनशील बिंदुओं पर पर्व से पूर्व ही मजबूत बैरिकेडिंग कराई जाएगी। इसके अलावा, पानी की अधिक गहराई वाले हिस्सों पर सुरक्षा के लिहाज से स्पष्ट चेतावनी और खतरे के लाल निशान लगाए जाएंगे, ताकि कोई भी व्रती या श्रद्धालु अनजाने में गहरे पानी की तरफ न जा सके। नगर आयुक्त ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि छठ घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और प्राथमिक सुविधाओं के मामले में किसी भी स्तर पर जरा सी भी कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
छठ घाटों और सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे के खिलाफ नगर आयुक्त सख्त, पूजा समितियों से मांगा गया पूरा सहयोग
इस संपूर्ण निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ा और गंभीर मुद्दा सार्वजनिक तालाबों तथा छठ घाटों पर हो रहे अवैध कब्जों व अतिक्रमण का रहा। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने स्पष्ट किया कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक स्थल पर किसी भी व्यक्ति विशेष या पूजा समिति द्वारा स्थायी कब्जा या निर्माण करना पूरी तरह अवैध है और यह स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इस विषय में शहर की तमाम पंजीकृत छठ पूजा समितियों को पहले ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। नगर आयुक्त ने जोर देकर कहा कि तालाब और घाट आम जनता की साझा संपत्ति हैं, और इनका इस्तेमाल केवल और केवल जनहित तथा सार्वजनिक सुविधाओं के लिए ही होना चाहिए। पूजा समितियों से भी यह अपील की गई है कि वे आयोजन के नाम पर किसी भी प्रकार का स्थायी अतिक्रमण न करें और इस कार्य में नगर निगम को अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें।
वर्षभर आम नागरिकों के लिए उपयोगी साबित हों ये सार्वजनिक स्थल, निगम का समग्र विकास पर है विशेष जोर
निरीक्षण के अंत में नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि रांची के भौगोलिक स्वरूप के अनुसार प्रत्येक तालाब की अपनी अलग स्थिति और चुनौतियां हैं, इसलिए हर जगह एक जैसी व्यवस्था लागू करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि छठ महापर्व के दौरान शाम और सुबह दोनों ही बेला में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए पर्याप्त रोशनी, सुरक्षित पहुंच मार्ग और पानी के नजदीक तक जाने के लिए सुगम रास्ते तैयार करना निगम की प्राथमिकता है। नगर निगम का मूल उद्देश्य केवल कुछ दिनों के पर्व के लिए घाटों को सजाना-संवारना नहीं है, बल्कि इन सभी सार्वजनिक जल स्रोतों को इस प्रकार विकसित करना है कि शहरवासी पूरे साल इनका सकारात्मक और बेहतर उपयोग कर सकें।