Twisha Sharma Case: सीबीआई ने ट्विशा शर्मा मौत मामले का मुकदमा भोपाल से दिल्ली ट्रांसफर करने का किया समर्थन, सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा
नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बहुचर्चित ट्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत के मामले में चल रहे मुकदमे को मध्य प्रदेश के भोपाल से निकालकर राजधानी दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित (Transfer) किए जाने की याचिका का सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पूर्ण रूप से समर्थन किया है। देश की शीर्ष जांच एजेंसी ने माननीय उच्चतम न्यायालय को स्पष्ट रूप से बताया है कि इस बात की प्रबल और पूरी आशंका है कि इस मामले से जुड़े दोनों आरोपी मध्य प्रदेश की स्थानीय सीमा के भीतर मुकदमे की संपूर्ण कार्यवाही को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं तथा न्याय प्रक्रिया में बाधा डालकर गवाहों को डरा-धमका सकते हैं।
सेवानिवृत्त महिला जज और उनके वकील बेटे पर गवाहों को धमकाने और साक्ष्य मिटाने की कोशिश का गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर को दाखिल किए गए अपने विस्तृत जवाबी हलफनामे में सीबीआई ने इस बात पर जोर दिया है कि इस मामले की मुख्य आरोपी गिरीबाला सिंह (जो कि एक सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं) तथा उनके पुत्र समर्थ सिंह (जो भोपाल में एक वकील के रूप में कार्यरत हैं) अपने क्षेत्र के बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं। एजेंसी का यह स्पष्ट आरोप है कि ये दोनों आरोपी स्थानीय स्तर पर अपनी स्थिति का लाभ उठाकर न्यायिक कार्यवाही को अपने पक्ष में प्रभावित कर सकते हैं। सीबीआई द्वारा दायर हलफनामे में यह भी उजागर किया गया है कि मृतका की मौत के ठीक बाद आरोपी पूर्व न्यायाधीश गिरीबाला सिंह ने मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही शुरुआती व प्रारंभिक जांच में अनुचित दखलअंदाजी की थी। इसके साथ ही, उन पर यह भी गंभीर आरोप है कि उन्होंने घटनास्थल के साथ सुनियोजित छेड़छाड़ की और साक्ष्यों को बदलने का घृणित प्रयास किया, जो उनके द्वारा अपने शासकीय पद के भारी दुरुपयोग को साफ तौर पर दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने दाखिल किया जवाब, पूर्व में भोपाल अदालत की कार्यवाही पर लगाई जा चुकी है रोक
यह संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा दायर की गई उस महत्वपूर्ण याचिका पर आधारित है, जिसमें उन्होंने देश की अदालत से निष्पक्ष न्याय की गुहार लगाते हुए इस मुकदमे को भोपाल की स्थानीय अदालत से दिल्ली स्थानांतरित करने की औपचारिक मांग की थी। इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल भोपाल जिला अदालत में चल रही इस मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई तथा अन्य आरोपियों से उनका जवाब तलब किया था। इसके उपरांत, सीबीआई ने गत 17 अगस्त 2026 को आरोपी पूर्व महिला जज और उनके बेटे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नई और सख्त कानूनी धाराओं के तहत अपनी चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें उन पर महिला के साथ क्रूरता करने तथा उसे आत्महत्या के लिए विवश करने (उकसाने) जैसे गंभीर आरोप तय किए गए हैं।