Ranchi Modular Toilet Vandalism: रांची में मॉड्यूलर टॉयलेट से नल और पाइप चोरी, नगर निगम को हर महीने हो रहा लाखों का नुकसान
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में आम जनता की सहूलियत के लिए स्थापित किए गए आधुनिक मॉड्यूलर टॉयलेट्स की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। इन सार्वजनिक शौचालयों में लगातार हो रही चोरियों के कारण रांची नगर निगम को प्रतिमाह करीब दो लाख रुपये की आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि चोरों के निशाने पर केवल महंगे उपकरण ही नहीं हैं, बल्कि टॉयलेट के अंदर लगे पीतल के नल, हाथ धोने वाले बेसिन, बिजली के बल्ब, दरवाजों की चटकनी और यहां तक कि सिंक के ड्रेनेज पाइप तक उखाड़ कर ले जाए जा रहे हैं। इस प्रकार की आपराधिक हरकतों से एक तरफ जहां नगर निगम का वित्तीय बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहरवासियों के लिए बनाई गई इन जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं को सुचारू बनाए रखना भी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सार्वजनिक उपयोग के लिए तैयार किए गए थे टॉयलेट, चोरों के कारण रखरखाव करना हुआ मुश्किल
शहर के प्रमुख स्थानों पर इन मॉड्यूलर टॉयलेट्स का निर्माण मुख्य रूप से राहगीरों और आम नागरिकों को स्वच्छता एवं सार्वजनिक शौचालय की सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से किया गया था। इन इकाइयों के भीतर पानी की निर्बाध आपूर्ति, बेसिन, रोशनी और सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत दरवाजे जैसी तमाम बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। परंतु, असामाजिक तत्वों द्वारा लगातार सामान चुराए जाने के कारण इन सभी सुविधाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कहीं से नल गायब मिल रहे हैं, तो कहीं से पूरी की पूरी फिटिंग ही उखाड़ ली जा रही है। ऐसी स्थिति में किसी उपकरण के क्षतिग्रस्त होने या चोरी होने पर उसे बार-बार नए सिरे से ठीक करवाना और नया सामान लगाना मेंटेनेंस टीम के लिए एक पेचीदा कार्य बन गया है।
संचालन संभाल रही एजेंसी सुलभ इंटरनेशनल के सामने खड़ी हुई बड़ी और गंभीर चुनौती
इन मॉड्यूलर टॉयलेट्स के दैनिक संचालन और उनके उचित रखरखाव की जिम्मेदारी ‘सुलभ इंटरनेशनल’ संस्था के कंधों पर है, जिसके सामने अब आए दिन खड़ी हो रही ये समस्याएं जी का जंजाल बन चुकी हैं। चोरी हुए कीमती सामान को बार-बार अपनी लागत से दोबारा लगवाना और तोड़फोड़ का शिकार हुए हिस्सों की मरम्मत करना एजेंसी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। यही वजह है कि इन तमाम बाधाओं के चलते शौचालयों को लगातार उपयोग के योग्य और साफ-सुथरा बनाए रखना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। प्रतिमाह दो लाख रुपये की चपत लगना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सार्वजनिक संपत्तियों की हिफाजत के लिए अब कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है।
ज्यादातर चोरियों को रात के वक्त दिया जा रहा है अंजाम, नगर निगम अधिकारी डॉ. किरण कुमारी ने की सहयोग की अपील
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए रांची नगर निगम की हेल्थ ऑफिसर डॉ. किरण कुमारी ने जानकारी दी कि मॉड्यूलर टॉयलेट में चोरी की ये अधिकांश वारदातें रात के सन्नाटे में अंजाम दी जा रही हैं। उन्होंने शहर के सभी जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक संपत्ति की हिफाजत में प्रशासन का सहयोग करें। उनका कहना है कि इन जनहित की सुविधाओं को सुरक्षित रखना केवल अकेले नगर निगम या मेंटेनेंस एजेंसी की ही नैतिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को भी इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने शहरवासियों से आग्रह किया है कि यदि किसी को भी इन सार्वजनिक शौचालयों के आसपास कोई संदेहास्पद गतिविधि दिखे या कोई सामान चुराते हुए नजर आए, तो इसकी सूचना तुरंत नगर निगम को दी जाए।