ब्रेकिंग
Delhi School Bomb Threat: स्कूल में छुट्टी पाने के लिए छात्रा ने ही दी थी बम की झूठी धमकी, दिल्ली पु... Air India Flight Cancellations: मध्यपूर्व तनाव के चलते एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बढ़ाईं ... Amit Shah Delhi Meeting: गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस और सीएम के साथ की उच्चस्तरीय बैठक, कानू... Mumbai Protest News: शिवाजी पार्क में आदिवासियों का GenZ जनआक्रोश मोर्चा आज, मंत्रियों के इस्तीफे और... Pakistan Cricket News: सलमान अली आगा की वापसी, मोहम्मद रिजवान बाहर; श्रीलंका के खिलाफ 14 सदस्यीय टेस... Mobile Market Trends India: मेमोरी चिप महंगी होने से कम हुए सस्ते फोन, लावा और एआई+ जैसे देसी ब्रांड... SIM Binding Rules in India: WhatsApp और Telegram के लिए नया नियम, सिम कार्ड हटाने पर बंद हो जाएंगे म... Sharad Purnima 2026: आज मनाई जा रही है शरद पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और संपूर्ण पौराणिक... Betul News: बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 1.14 करोड़ का बड़ा फर्जीवाड़ा, सहायक प्रबंधक समेत दो गिरफ्तार; फर... Weather Forecast Delhi: पश्चिमी विक्षोभ का असर, दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश के बाद गिरा तापमान; मौ...

Global Defence Market: रक्षा उत्पादन में ग्लोबल पावर बना भारत, 80 से अधिक देशों को हो रहा हथियारों और सैन्य उपकरणों का निर्यात

New Delhi: भारत की रक्षा ताकत और स्वदेशी हथियारों की बढ़ती वैश्विक मांग का असर अब यूरोप में भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। भारत अब यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने यूरोपीय देशों को लगभग 8,271 करोड़ रुपये मूल्य के गोला-बारूद की सफलतापूर्वक सप्लाई की है।

ट्रेड डेटा और सैन्य उपकरणों की बढ़ती मांग

ट्रेड डेटा मॉनिटर के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि इस सप्लाई में तोपों के गोले और मोर्टार के गोले जैसे सैन्य इस्तेमाल के अत्यंत महत्वपूर्ण गोला-बारूद शामिल हैं। यह आंकड़े भारत की तेजी से बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमताओं और हथियार निर्यात के क्षेत्र में उसकी मजबूत होती स्थिति को दर्शाते हैं। एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से आयात पर निर्भर रहता था, लेकिन अब वह अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी जगह बना रहा है।

वैश्विक बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों के नए अवसर

देश की रक्षा कंपनियां अब आधुनिक और स्वदेशी हथियारों तथा सैन्य उपकरणों के निर्माण पर सबसे अधिक जोर दे रही हैं। इससे न केवल भारत का रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत हो रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी भारतीय रक्षा उत्पादों के लिए नए और बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं। डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि यूरोप में ‘रीआर्म यूरोप’ (Rearm Europe) पहल के तहत हथियारों की भारी मांग चल रही है और भारत में मजबूत होते घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बेस ने इस मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है।

पिछले 10 वर्षों में रक्षा इकोसिस्टम में अभूतपूर्व विस्तार

राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के रक्षा इकोसिस्टम में जबरदस्त और ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। पहले यह क्षेत्र मुख्य रूप से लगभग 16 सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों तक ही सीमित था, लेकिन अब इसमें प्राइवेट सेक्टर, छोटे और मध्यम उद्यम (SMEs) तथा देश का तेजी से उभरता हुआ स्टार्टअप इकोसिस्टम भी पूरी ताकत से शामिल हो चुका है। वर्तमान में लगभग 840 बड़ी और मध्यम आकार की औद्योगिक लाइसेंस प्राप्त कंपनियां तथा करीब 17,000 छोटे-बड़े स्टार्टअप इस क्षेत्र में कार्यरत हैं।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का कुल रक्षा निर्यात

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत का कुल रक्षा निर्यात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर यानी 38,424 करोड़ रुपये (लगभग 3.6 बिलियन यूरो) पर पहुंच गया है। भारत आज की तारीख में दुनिया के 80 से अधिक देशों को अपने रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। भारी तोपखाने और गोला-बारूद के अलावा, भारत से निर्यात होने वाले सामानों में बुलेटप्रूफ जैकेट, सामरिक हेलमेट (tactical gear) और कई तरह के छोटे हथियार (small arms) भी शामिल हैं।

रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारियां और भविष्य की दिशा

रक्षा आपूर्ति के मामले में पारंपरिक रूप से रूस पर निर्भर रहने वाला भारत अब अपने साझीदारों का दायरा लगातार बढ़ा रहा है। फ्रांस और इजराइल जैसे देशों के साथ रक्षा क्षेत्र में मजबूत द्विपक्षीय संबंध स्थापित हुए हैं। इसके साथ ही, भारत यूरोपीय रक्षा खरीद कार्यक्रमों में संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) के माध्यम से और अधिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। सरकार की स्पष्ट नीति है कि जो भी विदेशी कंपनियां भारत के रक्षा बाजार में आना चाहती हैं, उन्हें ‘मेक इन इंडिया’ और स्थानीय विनिर्माण (localization) के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।