PGIMER Chandigarh Success: हिमाचल पुलिस के कर्मचारी राकेश को मिला नया जीवन, पीजीआई में सफल लिवर ट्रांसप्लांट
चंडीगढ़: पीजीआईएमईआर (PGIMER) में एक जटिल और सफल लिवर ट्रांसप्लांट के जरिए हिमाचल प्रदेश पुलिस के कर्मचारी राकेश को नई जिंदगी मिल गई है। करीब दो वर्षों से लिवर के लिए इंतजार कर रहे राकेश को मृत दाता (Cadaveric Donor) से मिले लिवर का सफल प्रत्यारोपण होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस सफल उपचार के बाद अब राकेश अपने परिवार के साथ एक सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।
⏳ दो साल का लंबा इंतजार और संयुक्त चिकित्सा टीम का प्रयास
राकेश पिछले करीब दो वर्षों से लिवर प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त अंग मिलने का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान उनका इलाज लगातार जारी था। आखिरकार मृत दाता से प्राप्त लिवर उनके लिए उपयुक्त पाया गया, जिसके बाद पीजीआईएमईआर के जनरल सर्जरी विभाग और हेपेटोलॉजी विभाग की संयुक्त टीम ने इस ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक पूरा किया।
यह पूरी प्रक्रिया प्रोफेसर एल. कमान, डॉ. सुनील तनेजा और डॉ. स्वप्नेश साहू के मार्गदर्शन में संपन्न हुई, जिसमें अस्पताल के अन्य विशेष चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई।
🙏 डोनर परिवार के संवेदनशील फैसले और अंगदान का महत्व
इस पूरी सफलता के बीच डोनर (दाता) परिवार का निर्णय सबसे प्रेरणादायक रहा। अपने किसी करीबी को खोने के गहरे दुख के बीच उस परिवार ने अंगदान जैसा महान फैसला लिया, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन मिल सका।
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अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद राकेश ने दाता परिवार की उदारता के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और आभार व्यक्त किया।
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पीजीआईएमईआर के जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. एल. कमान और डॉ. स्वप्नेश साहू ने भी दाता परिवार के साहस की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील फैसले समाज में मृत अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंदों को जीवनदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।