Former IAS Divya Mittal: पूर्व IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, बिना किसी दल के बनाएंगी अपना स्वतंत्र मंच
उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी से एक और चर्चित चेहरे की सियासत के मैदान में औपचारिक एंट्री हो गई है। वर्ष 2013 बैच की पूर्व चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद राजनीति की राह चुनने की विधिवत घोषणा कर दी है।
खास बात यह है कि दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान में सक्रिय किसी भी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी, बल्कि जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच खड़ा करेंगी।
हाल ही में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का दौर जारी था, जिस पर अब उन्होंने खुद विराम लगा दिया है।
उत्तर प्रदेश को अपनी कार्यस्थली और कर्मभूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत यूपी से ही होगी। उनका मुख्य लक्ष्य उन वंचित और शोषित नागरिकों की आवाज बनना होगा, जिनकी फरियाद सरकारी चौखट तक पहुंचने के बाद भी अनसुनी रह जाती है।
📜 13 साल के प्रशासनिक सफर के बाद राजनीति का रुख: 15 सितंबर से प्रभावी हुआ इस्तीफा
आईएएस से सियासत तक की समयरेखा:
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30 अगस्त 2026 को दिया इस्तीफा: दिव्या मित्तल ने करीब 13 वर्षों की समर्पित प्रशासनिक सेवा के उपरांत 30 अगस्त 2026 को अपने पद से त्यागपत्र देने का निर्णय सार्वजनिक किया था।
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15 सितंबर से प्रभावी: सरकार की ओर से उनका वीआरएस औपचारिक रूप से 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ।
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वीडियो संदेश के जरिए ऐलान: हाल ही में एक वीडियो वक्तव्य जारी कर उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए अपने अगले कदम की घोषणा की और स्वतंत्र राजनीतिक मंच के गठन की बात दोहराई।
🛡️ पूर्व DGP सुलखान सिंह ने बनाई ‘बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी’: अलग राज्य का एजेंडा
जब खाकी ने बनाई अपनी अलग राजनीतिक राह:
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2023 में पार्टी का गठन: उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) सुलखान सिंह ने सेवानिवृत्ति के पश्चात वर्ष 2023 में ‘बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी’ की स्थापना की थी।
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प्रमुख राजनीतिक मांग: उनकी पार्टी का प्रमुख सियासी एजेंडा और चुनावी वादा उपेक्षित बुंदेलखंड क्षेत्र को एक पृथक राज्य का दर्जा दिलाना रहा है।
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सक्रिय जनसंपर्क: वे लगातार स्थानीय स्तर पर पदयात्राओं और बैठकों के जरिए क्षेत्रीय मुद्दों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहे हैं।
⚖️ पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की ‘आजाद अधिकार सेना’: 2027 के विधानसभा चुनाव पर निगाहें
अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद राजनीतिक दल की शुरुआत:
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आजाद अधिकार सेना का गठन: अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दिए जाने के बाद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने ‘आजाद अधिकार सेना’ के नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई।
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2027 चुनाव की तैयारी: पार्टी अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए संगठनात्मक स्तर पर पूरी तरह सक्रिय है।
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उम्मीदवारों की घोषणा: अगस्त 2026 में पार्टी की ओर से 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का संकल्प दोहराया गया और कई सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी की जा चुकी है।
🎓 PCS की नौकरी छोड़ मैदान में उतरे अलंकार अग्निहोत्री: ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ का गठन
प्रांतीय सिविल सेवा से सियासत का सफर:
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26 जनवरी 2026 को इस्तीफा: पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की।
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यूजीसी नियमों का विरोध: उन्होंने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए नौकरी छोड़ने का कड़ा कदम उठाया था।
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वृंदावन से पार्टी की घोषणा: फरवरी 2026 में उन्होंने मथुरा के वृंदावन से ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ नामक राजनीतिक दल की शुरुआत की।
🏛️ एके शर्मा और असीम अरुण: वीआरएस लेकर सरकार में बने कैबिनेट व राज्य मंत्री
सत्ताधारी दल में शामिल होकर मंत्री पद तक पहुंचे अफसर:
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एके शर्मा (पूर्व IAS): गुजरात कैडर के 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे अरविंद कुमार शर्मा ने जनवरी 2021 में वीआरएस लेकर बीजेपी की सदस्यता ली। विधान परिषद जाने के बाद वे 2022 में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और वर्तमान में नगर विकास व ऊर्जा विभाग संभाल रहे हैं।
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असीम अरुण (पूर्व IPS): कानपुर के पहले पुलिस कमिश्नर रहे आईपीएस असीम अरुण ने वीआरएस लेकर 2022 में कन्नौज सदर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता और वर्तमान में योगी सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं।
🤝 पूर्व DGP बृजलाल और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन: प्रमुख दलों में निभाई भूमिका
संसद और पार्टी के थिंक टैंक में प्रशासनिक अनुभव:
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बृजलाल (पूर्व DGP): यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने सेवानिवृत्ति के बाद भाजपा का दामन थामा। पार्टी ने उन्हें 2020 में राज्यसभा का सदस्य बनाया।
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आलोक रंजन (पूर्व मुख्य सचिव): वर्ष 1978 बैच के आईएएस और अखिलेश यादव सरकार में मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन ने रिटायरमेंट के बाद समाजवादी पार्टी जॉइन की। वे अखिलेश यादव के मुख्य सलाहकार रहे और वर्ष 2024 में सपा की ओर से राज्यसभा प्रत्याशी भी बनाए गए थे।