Delhi Stray Dogs Report: जानिए दिल्ली में क्यों बढ़ रहे हैं कुत्तों के हमले, पुरुषों और बच्चों पर ज्यादा मंडरा रहा खतरा
राजधानी दिल्ली में आवारा और पालतू कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, और स्थिति यह है कि हर एक हजार में से 25 से 26 लोग प्रति वर्ष कुत्तों का शिकार बन रहे हैं. चाहे झुग्गी-झोपड़ी कॉलोनी हो, पुनर्वासित या नियोजित क्षेत्र, हर जगह यही हाल है. कुल मामलों में से करीब तीन-चौथाई (75.5 प्रतिशत) लोग सड़कों पर घूमने वाले लावारिस कुत्तों का शिकार बनते हैं, जबकि एक चौथाई मामलों में पालतू कुत्ते लोगों को अपना निशाना बनाते हैं. दिल्ली में कुत्तों के काटने की यह दर राष्ट्रीय औसत से भी काफी अधिक है.
⚠️ 2. गंभीर मामलों में भी नहीं लग रहा RIG इंजेक्शन, 73 प्रतिशत से अधिक लोग बरत रहे हैं खतरनाक लापरवाही
हाल ही में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) और यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस (UCMS) के डॉक्टरों द्वारा उत्तरी और दक्षिणी शाहदरा जोन के 4000 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जो ‘बीएमसी पब्लिक हेल्थ जर्नल’ में भी प्रकाशित हुआ है. इस रिसर्च के मुताबिक, कुत्तों के गंभीर रूप से काटने के बावजूद 73.1 प्रतिशत लोग रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) का टीका नहीं लगवाते हैं. इसके अलावा, करीब 25 प्रतिशत लोग एंटी रेबीज टीके की चारों डोज भी पूरी नहीं करते, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा जोखिम है.
⏰ 3. दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा घटनाएं, अस्पतालों में आ रहे हैं हजारों मामले
अध्ययन में शामिल MAMC के प्रोफेसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कुत्तों के शिकार होने वालों में 71.6 प्रतिशत पुरुष और 28.4 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं. सबसे ज्यादा 39.2 प्रतिशत घटनाएं दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे के बीच होती हैं. आरएमएल और सफदरजंग जैसे बड़े अस्पतालों में हर साल कुत्तों और अन्य जानवरों के काटने के हजारों मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें से कई लोग समय पर (24 घंटे के भीतर) एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं ले पाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है.