Dhanbad News: गजलीटांड़ खदान दुर्घटना की 32वीं बरसी पर नम हुईं आंखें, बाघमारा में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
धनबादः जिला के बाघमारा अंतर्गत गजलीटांड़ खदान दुर्घटना की आज 32वीं बरसी पूरी श्रद्धा और गमगीन माहौल में मनाई गई। इस दौरान स्थानीय शहीद वेदी पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों के साथ-साथ आम लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर शहीद श्रमिकों को नमन किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
🌊 26 सितंबर 1994 की वह काली रात: जब कतरी नदी के पानी में जलमग्न हो गई थी पूरी खदान
बीते 26 सितंबर 1994 की उस मनहूस और काली रात को खदान के भीतर हुए भीषण हादसे में काम कर रहे कुल 64 अछ्वुत श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। अचानक कतरी नदी का उफनता पानी खदान के अंदर घुस आया था, जिससे पूरी खदान कुछ ही पलों में जलमग्न हो गई और देखते ही देखते कई हंसते-खेलते परिवारों ने अपने अपनों को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया था।
💐 शहीद स्तंभ पर गणमान्य लोगों और जनप्रतिनिधियों ने अर्पित किए पुष्प
इस मर्मस्पर्शी हादसे की 32वीं बरसी पर गजलीटांड़ मैदान स्थित मुख्य शहीद स्तंभ परिसर में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीसीसीएल (BCCL) के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, बाघमारा के विधायक शत्रुघ्न महतो, पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा सहित क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों और विभिन्न मजदूर यूनियनों के नेताओं ने शहीद स्तंभ पर पुष्प चक्र अर्पित कर दिवंगत श्रमिकों को श्रद्धांजलि दी।
👥 श्रद्धांजलि सभा में उमड़े लोग, आरसीएमएस नेताओं ने भी दी शिरकत
गजलीटांड़ खान हादसे की इस बरसी के मौके पर पूरा माहौल बेहद भावुक नजर आया। बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, विधायक शत्रुघ्न महतो, पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा समेत तमाम मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने शहीदों को नमन किया। इसके अलावा, आरसीएमएस के वरिष्ठ नेता ए.के. झा सहित विभिन्न मजदूर यूनियनों के अन्य प्रतिनिधि भी इस श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख रूप से शामिल हुए। सभी ने तीन दशक पुराने उस भयानक हादसे को याद करते हुए कहा कि गजलीटांड़ की इस घटना ने खनन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे और यह त्रासदी आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत बड़ी सीख है।
🌱 परिजनों ने की पूजा-अर्चना, परिसर में किया गया पौधारोपण
शहीद हुए श्रमिकों के परिजन भी हर साल की परंपरा की तरह इस बार भी श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने पहुंचे। परिजनों ने शहीद स्तंभ पर विधिवत पूजा-अर्चना की और दिवंगत श्रमिकों की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इसके साथ ही पर्यावरण को समर्पित करते हुए परिसर में पौधारोपण भी किया गया।
🗣️ परिजनों का छलका दर्द, बीसीसीएल सीएमडी के सामने रखीं पुरानी समस्याएं
श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे लोगों ने शहीद श्रमिकों के दुखी परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इस दौरान परिजनों ने हादसे के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और तत्कालीन प्रबंधन द्वारा दिए गए उन तमाम आश्वासनों को भी याद दिलाया, जो उनके परिवारों की सुविधाओं और उज्ज्वल भविष्य से जुड़े थे। परिजनों ने बीसीसीएल के सीएमडी के समक्ष अपनी मौजूदा समस्याएं रखीं और लंबे समय से लंबित पड़ी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने का विशेष आग्रह किया। इस दौरान पीड़ितों का दर्द एक बार फिर छलक उठा, उन्होंने बताया कि हादसे को तीन दशक से अधिक का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन आज भी उनके परिवार कई प्रकार की गंभीर परेशानियों से जूझ रहे हैं।
🕒 32 साल बाद भी लोगों के जेहन में ताजा हैं गजलीटांड़ हादसे की दर्दनाक यादें
आज तीन दशक से अधिक यानी 32 साल बीत जाने के बाद भी गजलीटांड़ खान हादसे की खौफनाक यादें लोगों के दिलों-दिमाग में पूरी तरह ताजा हैं। हर वर्ष आयोजित होने वाली यह श्रद्धांजलि सभा न केवल उन शहीद श्रमिकों की याद दिलाती है, बल्कि देश के खनन क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता मानकों के महत्व को भी बार-बार रेखांकित करती है।
धनबादः जिला के बाघमारा अंतर्गत गजलीटांड़ खदान दुर्घटना की आज 32वीं बरसी पूरी श्रद्धा और गमगीन माहौल में मनाई गई। इस दौरान स्थानीय शहीद वेदी पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों के साथ-साथ आम लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर शहीद श्रमिकों को नमन किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
🌊 26 सितंबर 1994 की वह काली रात: जब कतरी नदी के पानी में जलमग्न हो गई थी पूरी खदान
बीते 26 सितंबर 1994 की उस मनहूस और काली रात को खदान के भीतर हुए भीषण हादसे में काम कर रहे कुल 64 अछ्वुत श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। अचानक कतरी नदी का उफनता पानी खदान के अंदर घुस आया था, जिससे पूरी खदान कुछ ही पलों में जलमग्न हो गई और देखते ही देखते कई हंसते-खेलते परिवारों ने अपने अपनों को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया था।
💐 शहीद स्तंभ पर गणमान्य लोगों और जनप्रतिनिधियों ने अर्पित किए पुष्प
इस मर्मस्पर्शी हादसे की 32वीं बरसी पर गजलीटांड़ मैदान स्थित मुख्य शहीद स्तंभ परिसर में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीसीसीएल (BCCL) के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, बाघमारा के विधायक शत्रुघ्न महतो, पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा सहित क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों और विभिन्न मजदूर यूनियनों के नेताओं ने शहीद स्तंभ पर पुष्प चक्र अर्पित कर दिवंगत श्रमिकों को श्रद्धांजलि दी।
👥 श्रद्धांजलि सभा में उमड़े लोग, आरसीएमएस नेताओं ने भी दी शिरकत
गजलीटांड़ खान हादसे की इस बरसी के मौके पर पूरा माहौल बेहद भावुक नजर आया। बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, विधायक शत्रुघ्न महतो, पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा समेत तमाम मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने शहीदों को नमन किया। इसके अलावा, आरसीएमएस के वरिष्ठ नेता ए.के. झा सहित विभिन्न मजदूर यूनियनों के अन्य प्रतिनिधि भी इस श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख रूप से शामिल हुए। सभी ने तीन दशक पुराने उस भयानक हादसे को याद करते हुए कहा कि गजलीटांड़ की इस घटना ने खनन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे और यह त्रासदी आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत बड़ी सीख है।
🌱 परिजनों ने की पूजा-अर्चना, परिसर में किया गया पौधारोपण
शहीद हुए श्रमिकों के परिजन भी हर साल की परंपरा की तरह इस बार भी श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने पहुंचे। परिजनों ने शहीद स्तंभ पर विधिवत पूजा-अर्चना की और दिवंगत श्रमिकों की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इसके साथ ही पर्यावरण को समर्पित करते हुए परिसर में पौधारोपण भी किया गया।
🗣️ परिजनों का छलका दर्द, बीसीसीएल सीएमडी के सामने रखीं पुरानी समस्याएं
श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे लोगों ने शहीद श्रमिकों के दुखी परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इस दौरान परिजनों ने हादसे के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और तत्कालीन प्रबंधन द्वारा दिए गए उन तमाम आश्वासनों को भी याद दिलाया, जो उनके परिवारों की सुविधाओं और उज्ज्वल भविष्य से जुड़े थे। परिजनों ने बीसीसीएल के सीएमडी के समक्ष अपनी मौजूदा समस्याएं रखीं और लंबे समय से लंबित पड़ी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने का विशेष आग्रह किया। इस दौरान पीड़ितों का दर्द एक बार फिर छलक उठा, उन्होंने बताया कि हादसे को तीन दशक से अधिक का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन आज भी उनके परिवार कई प्रकार की गंभीर परेशानियों से जूझ रहे हैं।
🕒 32 साल बाद भी लोगों के जेहन में ताजा हैं गजलीटांड़ हादसे की दर्दनाक यादें
आज तीन दशक से अधिक यानी 32 साल बीत जाने के बाद भी गजलीटांड़ खान हादसे की खौफनाक यादें लोगों के दिलों-दिमाग में पूरी तरह ताजा हैं। हर वर्ष आयोजित होने वाली यह श्रद्धांजलि सभा न केवल उन शहीद श्रमिकों की याद दिलाती है, बल्कि देश के खनन क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता मानकों के महत्व को भी बार-बार रेखांकित करती है।