Regional Parties in UP Election: यूपी की सियासत में छोटे दलों और बिहार की पार्टियों की एंट्री, बिना गठबंधन मैदान में उतरने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले फिलहाल राज्य की राजनीति में कोई तीसरा बड़ा फ्रंट बनता हुआ नजर नहीं आ रहा है. इस बार चुनाव में छोटे दल और क्षेत्रीय संगठन अपनी-अपनी पतवार संभाले हुए हैं और अकेले ही चुनावी समर में उतरकर अपनी नाव पार लगाने की जुगत में हैं. चाहे वह चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी हो, स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनता पार्टी या फिर राजा भैया की जनसत्ता दल लोकतांत्रिक, सभी फिलहाल किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और अपने दम पर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.
🤝 2. चंद्रशेखर आजाद, स्वामी प्रसाद मौर्य और ओवैसी की अलग-अलग रणनीति, AIMIM और अपना दल (कमेरावादी) भी मैदान में
नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद की पार्टी (आजाद समाज पार्टी) ने काफी पहले से ही 2027 के लिए उम्मीदवारों के चयन और संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है. इसी तरह स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी पार्टी के जरिए जमीन तलाश रहे हैं, हालांकि उनकी कुछ अन्य नेताओं के साथ बातचीत की अटकलें भी हैं. असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और पल्लवी पटेल की अपना दल (कमेरावादी) भी अपने-अपने स्तर पर संगठन विस्तार और जनता के मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं, लेकिन फिलहाल इन सभी ने अकेले ही चुनाव लड़ने की रूपरेखा तैयार की है.
बिहार के दलों की भी यूपी चुनाव में एंट्री, जेडीयू, एलजेपी और वीआईपी भी ठोक रही ताल
उत्तर प्रदेश की चुनावी सरगर्मी के बीच बिहार की पार्टियों ने भी यहां अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और जिला स्तर पर प्रभारियों की नियुक्ति का काम तेज कर दिया है. एलजेपी (रामविलास) सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है और चिराग पासवान के कार्यक्रम भी तय हो रहे हैं. इसके अलावा मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) भी निषाद आरक्षण के मुद्दे पर यूपी में अकेले ही ताल ठोंक रही है.