ब्रेकिंग
Gurdaspur Road Accident: दीनानगर में दर्दनाक सड़क हादसा; रेत से भरे टिप्पर ने बाइक सवार को रौंदा, डा... Kharar Theft Case: 29 जुलाई और 7 सितंबर को चोरी हुए ट्रैक्टर बरामद; सदर पुलिस ने मेरठ और दिल्ली से द... Gold and Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, 24 कैरेट सोना 1.57 लाख के पार; जान... Korba Crime & News: नुनेरा के अलगू तालाब में डूबीं 3 मासूम बच्चियां; पुलिस ने शवों का पंचनामा कर जां... Sukma Youth Murder: लेंदा गांव में मलगानगिरी के युवक की हत्या से हड़कंप; युवती और परिजनों समेत 5 आरो... Raipur Ashirwad Ka Diya: तेलीबांधा मरीन ड्राइव पर सीएम विष्णुदेव साय ने जलाए दीये; रायपुर वासियों ने... CG Infrastructure News: छत्तीसगढ़ में हर साल बनेगा वार्षिक एक्शन प्लान; लोक निर्माण विभाग बना नोडल ए... Chhattisgarh News: मानव-हाथी द्वंद्व पर हाईकोर्ट में सुनवाई; फसल नुकसान का वास्तविक मुआवजा और मौत पर... Pakur Local News: अब शादी-त्योहारों में नहीं जाना पड़ेगा शहर; पाकुड़ के गांवों में ही मिलेगी ब्राइडल... HEC Bypass Encroachment Case: मानसून और त्योहारों के चलते 31 दिसंबर तक मिली राहत; खुद हटाना होगा अति...

UPI Transaction Fee Rules: UPI से भुगतान पर लगेगा अतिरिक्त शुल्क? व्यापारियों ने जताया विरोध, वित्त मंत्री को लिखेंगे पत्र

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर व्यापारी वर्ग में गहरा आक्रोश व्याप्त है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू का कहना है कि केंद्र सरकार ने वर्षों तक व्यापारियों और आम ग्राहकों को डिजिटल भुगतान (डिजिटल पेमेंट) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन अब इसी व्यवस्था पर शुल्क लगाने से व्यापारियों की परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) काफी बढ़ जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कम मार्जिन वाले किराना और रिटेल कारोबार पर इसका सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा, इसलिए सरकार को इसे लागू करने से पहले सभी प्रमुख व्यापारिक संगठनों से चर्चा करनी चाहिए।

📉 डिजिटल भुगतान की नई लागत से बढ़ेगा आर्थिक बोझ: व्यापारियों ने जताई चिंता

व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा, “व्यापारियों पर पहले ही जीएसटी (GST) सहित कई तरह की लिखा-पढ़ी और नियामकीय अनुपालन का भारी दबाव है। अब यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क जुड़ने से व्यापारियों पर एक और नया आर्थिक बोझ पड़ेगा।”

उन्होंने आगे बताया कि यद्यपि ग्राहकों को सीधे तौर पर इस शुल्क से छूट दी जा रही है, लेकिन इसकी पूरी लागत व्यापारी को ही उठानी पड़ेगी, जो व्यावहारिक रूप से अनुचित है।

💸 5 हजार के भुगतान पर ₹20 और 50 हजार पर लगेगा ₹200 का चार्ज: जानें कितना बढ़ेगा खर्च

उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क का असर भुगतान की राशि बढ़ने के साथ-साथ काफी बढ़ता जाएगा।

  • ₹5,000 के यूपीआई भुगतान पर व्यापारी को ₹20 का शुल्क देना होगा।

  • ₹10,000 के भुगतान पर ₹40 का शुल्क कटेगा।

  • ₹50,000 के बड़े भुगतान पर ₹200 का भारी शुल्क देना होगा।

दिनभर में बड़े डिजिटल लेनदेन अधिक होने पर महीने के स्तर पर यह राशि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए एक बहुत बड़ी अतिरिक्त लागत बन जाएगी।

🔄 “कैशलेस व्यवस्था से पीछे लौटने का खतरा”: नकद लेनदेन की ओर बढ़ सकते हैं व्यापारी

साहू ने कहा कि सरकार की प्रेरणा से ही व्यापारियों ने नकद मुक्त (कैशलेस) कारोबार अपनाया था और आज यूपीआई रोजमर्रा के लेन-देन का सबसे अहम जरिया बन चुका है। ऐसे में नया शुल्क लागू होने से व्यापारी बड़े भुगतान के लिए दोबारा नकद (कैश) स्वीकार करने या एक ही भुगतान को अलग-अलग टुकड़ों में लेने के लिए मजबूर हो सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान की सहजता और पारदर्शिता दोनों ही प्रभावित होने की आशंका है।

⚠️ ग्राहक और दुकानदार के बीच बढ़ सकता है विवाद: व्यापारियों ने दी चेतावनी

व्यापारियों का मानना है कि यदि कोई व्यापारी अपनी इस अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए ग्राहक से शुल्क लेने का प्रयास करेगा, तो विवाद खड़ा होना तय है। ग्राहक सवाल उठाएंगे कि जब सरकार उनसे कोई चार्ज नहीं ले रही, तो दुकानदार अतिरिक्त राशि क्यों मांग रहा है। इससे रोजमर्रा के कारोबार में दुकानदार और ग्राहक के बीच अनावश्यक कहासुनी और तनाव की स्थिति पैदा होगी।

✉️ प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से करेंगे गुहार: पेट्रोलियम कारोबारियों ने भी लिखा पत्र

व्यापारी नेता ने बताया कि इस गंभीर मुद्दे पर पेट्रोलियम कारोबारियों की ओर से भी वित्त मंत्री को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया गया है।

अब देश के अन्य व्यापारिक संगठन भी एकजुट होकर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के समक्ष अपनी मांग रखेंगे। उन्होंने मांग की है कि छोटे व मध्यम वर्ग के व्यापारियों को इस शुल्क से पूरी तरह राहत दी जानी चाहिए और किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।