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US Russia Sanctions Bill: अमेरिका के नए प्रतिबंध बिल पर भड़का रूस; क्रेमलिन बोला- यूक्रेन शांति वार्ता होगी प्रभावित

क्रेमलिन ने गुरुवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) द्वारा रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने से जुड़े विधेयक को एक ‘शत्रुतापूर्ण कदम’ (Unfriendly Action) करार दिया है।

रूस ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले नए और कड़े प्रतिबंध यूक्रेन में शांति समझौते तक पहुंचने के जारी प्रयासों को और अधिक जटिल बना सकते हैं। क्रेमलिन की यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी हाउस में ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ के 262-159 के भारी बहुमत से पास होने के ठीक एक दिन बाद आई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने संवाददाताओं से कहा, “हम इस विधायी प्रक्रिया पर पैनी नजर रख रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से एक शत्रुतापूर्ण कदम है और ऐसे किसी भी अतिरिक्त प्रतिबंध से यूक्रेन में शांति वार्ता का रास्ता बेहद कठिन हो जाएगा।”

🏛️ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लग सकता है 100% तक टैरिफ

यह विधेयक अब अंतिम मंजूरी के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा।

मंजूरी मिलते ही अमेरिकी प्रशासन के पास रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने और रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार आ जाएगा। यह कानून सीधे तौर पर रूसी अधिकारियों, प्रमुख बैंकों, बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स और रूसी तेल के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों के ‘शैडो फ्लीट’ को लक्षित करता है। इस विधेयक का नाम साउथ कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इसे तैयार करने में लंबा समय दिया था। सीनेट पहले ही इस प्रस्ताव को 86-11 के भारी अंतर से पारित कर चुकी है।

🇮🇳 भारत और चीन पर पड़ेगा सीधा प्रभाव: रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं दोनों देश

कांग्रेस के सहयोगियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।

ऐसे में यदि अमेरिकी प्रशासन इस कानून के तहत 100% टैरिफ का प्रावधान लागू करता है, तो इसका सबसे बड़ा और सीधा आर्थिक असर भारत और चीन जैसे प्रमुख आयातक देशों पर पड़ेगा। हालांकि, अमेरिकी संसद के भीतर इस कदम पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। जहां समर्थकों का तर्क है कि इस कड़े कदम से रूसी ऊर्जा से होने वाली आय रुकेगी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध रोकने का दबाव बनेगा, वहीं आलोचकों ने आगाह किया है कि इससे अमेरिका के मित्र देशों से संबंधों में तनाव आ सकता है और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतें बढ़ सकती हैं।

🕊️ शांति वार्ता की मध्यस्थता पर संशय के बादल: हाउस स्पीकर बोले- पुतिन की वार-फंडिंग पर लगी रोक

यूक्रेन में विगत साढ़े चार वर्षों से जारी भीषण युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिका द्वारा की जा रही मध्यस्थता की कोशिशें बीते कुछ महीनों से सुस्त पड़ी हुई थीं।

हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने के उद्देश्य से इस महीने की शुरुआत में मॉस्को और कीव में अपने विशेष दूत भी भेजे थे। विधेयक पारित होने के बाद हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा, “बहुत लंबे समय से पुतिन ने इस खतरनाक युद्ध को उन देशों के संसाधनों से फंड किया है जो आंखें मूंदे हुए थे, लेकिन अब यह खत्म हो चुका है।” दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी सांसदों के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि युद्ध के दौर में निष्क्रिय रहने से बेहतर है कि निर्णायक और कड़े कदम उठाए जाएं।