IIT Mandi News: भगवद्गीता आधारित पोस्टर पर जातिगत भेदभाव का आरोप, डायरेक्टर लक्ष्मीधर बेहरा ने दिए जांच के आदेश
मंडी (हिमाचल प्रदेश): भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विवादित पोस्टर प्रदर्शित किए जाने के बाद संस्थान में तनाव की स्थिति बन गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने तत्काल एक विशेष जांच समिति का गठन कर दिया है। यह समिति पड़ताल करेगी कि यह आपत्तिजनक पोस्टर किसने तैयार किया, इसे लगाने के पीछे क्या मंशा थी और सार्वजनिक कार्यक्रम में इसे कैसे प्रदर्शित होने दिया गया। प्रशासन का कहना है कि जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विवादित पोस्टर में जाति व्यवस्था की आपत्तिजनक व्याख्या करते हुए लिखा गया था कि शूद्रों को “ऊंची जातियों की सेवा करनी चाहिए।” इस पर कड़ा विरोध दर्ज होने के बाद संस्थान के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने इसे छात्रों द्वारा धर्मग्रंथ की मनमानी समझ का परिणाम बताते हुए संस्थान को इस विचारधारा से पूरी तरह अलग कर लिया है।
🏛️ विवाद से IIT मंडी प्रशासन ने बनाई दूरी: समानता और वैज्ञानिक सोच पर दिया जोर
प्रशासन का आधिकारिक रुख और स्पष्टीकरण:
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छात्रों की निजी व्याख्या: संस्थान प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कुछ छात्रों ने भगवद्गीता के श्लोकों की अपने स्तर पर व्याख्या की है, जिससे संस्थान का कोई सरोकार नहीं है।
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संवैधानिक मूल्यों का हवाला: प्रशासन ने दोहराया कि IIT मंडी समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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निदेशक की पृष्ठभूमि: निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा लंबे समय से गीता दर्शन और इस्कॉन (ISKCON) से जुड़े रहे हैं। वे परिसर में तीन क्रेडिट का वैकल्पिक गीता कोर्स भी संचालित करते हैं और प्रस्तावित भक्तिवेदांत विश्वविद्यालय के संस्थापकों में शामिल हैं।
📧 निदेशक ने ईमेल जारी कर की पोस्टर की निंदा: ‘जातिगत भेदभाव बर्दाश्त नहीं’
निदेशक का संदेश और व्यक्तिगत पक्ष:
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गहरे सदमे की बात: निदेशक बेहरा ने संस्थान समुदाय को “कैंपस में हाल ही में लगाए गए पोस्टर की कड़ी निंदा” शीर्षक से भेजे ईमेल में कहा कि 4 सितंबर को जन्माष्टमी पर लगाए गए इस पोस्टर की जानकारी पाकर वे स्तब्ध हैं।
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संस्थान का समर्थन नहीं: उन्होंने दो टूक कहा कि संस्थान किसी भी रूप में जातिगत भेदभाव या असमानता को बढ़ावा देने वाली मानसिकता का समर्थन नहीं करता है।
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सामाजिक सद्भाव की रक्षा: बेहरा ने लिखा कि उन्होंने स्वयं व्यक्तिगत स्तर पर हमेशा जातिगत पूर्वाग्रहों के खिलाफ आवाज उठाई है और जांच समिति इसलिए बनाई गई है ताकि भविष्य में कोई भी परिसर का उपयोग सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए न कर सके।
👥 SC और OBC प्रतिनिधियों को जांच समिति में किया गया शामिल
समिति का स्वरूप और निष्पक्ष जांच की रूपरेखा:
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विविध वर्गों का प्रतिनिधित्व: मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई समिति में वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों के साथ-साथ अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
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कार्यक्रम का दायरा: निदेशक ने दोहराया कि यह आयोजन पूरी तरह छात्रों द्वारा आयोजित किया गया था, इसलिए समिति छात्रों की भूमिका और प्रक्रियागत खामियों की बिंदुवार जांच करेगी।
📜 ‘भगवद गीता – द टाइमलेस विजडम’ पोस्टर में क्या था? जानिए विवाद की मूल जड़
ऑडिटोरियम के बाहर लगे पोस्टर की आपत्तिजनक सामग्री:
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चार वर्णों का विभाजन: विवाद की शुरुआत संस्थान के मुख्य ऑडिटोरियम के बाहर लगे “भगवद गीता – द टाइमलेस विजडम” शीर्षक वाले पोस्टर से हुई, जिसमें समाज को चार वर्णों में विभाजित दिखाया गया था।
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आपत्तिजनक भूमिकाएं: पोस्टर में लिखा गया था कि ब्राह्मणों का कार्य “ईश्वर का संदेश फैलाना”, क्षत्रियों का कार्य “समाज व धर्म की रक्षा करना”, वैश्यों का काम “अर्थव्यवस्था चलाना”, जबकि शूद्रों की भूमिका “उच्च वर्गों की सेवा करना” है।
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श्लोक का संदर्भ: पोस्टर में गीता के उस श्लोक का भी उल्लेख किया गया था जिसमें गुणों और कर्मों के आधार पर चार वर्णों की रचना की बात कही गई है, लेकिन उसकी व्याख्या को लेकर छात्रों और संकाय सदस्यों के एक बड़े वर्ग ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई।