Saharanpur News: सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद पर गरजा 6 बुलडोजर, तड़के 4 बजे से ध्वस्तीकरण शुरू; भारी पुलिस बल तैनात
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश): कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विवादित मस्जिद को हटाने को लेकर जारी तनाव शनिवार सुबह अचानक बड़े प्रशासनिक ध्वस्तीकरण अभियान में बदल गया।
शुक्रवार देर रात से ही शहर और सोशल मीडिया पर इमारत को गिराए जाने की खबरें फैल रही थीं, जिसके बाद रात गहराते ही कलेक्ट्रेट के आसपास पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया। शनिवार तड़के करीब चार बजे भारी प्रशासनिक अमले और छह बुलडोजरों के साथ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई और सुबह तक इमारत का एक बड़ा हिस्सा गिरा दिया गया। सामान्य दिनों के विपरीत, परिसर के पांचों मुख्य द्वार बंद कर दिए गए और सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त रही कि किसी भी बाहरी व्यक्ति या आम नागरिक को भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
⚖️ जिला जज ने बरकरार रखा था सिटी मजिस्ट्रेट का फैसला: 17 तारीखों की सुनवाई के बाद अपील खारिज
विधिक प्रक्रिया और अदालती आदेश की पृष्ठभूमि:
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जिला अदालत का फैसला: 2 सितंबर 2026 को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल अपील को सिरे से खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 के ध्वस्तीकरण आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा था।
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सरकारी भूमि पर निर्माण: अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर विवादित स्थल को नजूल/सरकारी भूमि माना और उस पर बने ढांचे को अवैध करार दिया।
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लंबी कानूनी लड़ाई: सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के विरुद्ध 20 जुलाई को जिला अदालत में अपील की गई थी, जहां कुल 17 तारीखों पर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच गहन जिरह हुई।
📜 150 साल पुरानी इमारत होने का दावा: 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति भी तय
अवैध घोषित करने का आधार और जुर्माना:
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बेदखली का निर्देश: सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपने पूर्व आदेश में परिसर को 30 दिनों के भीतर खाली करने का स्पष्ट निर्देश जारी किया था।
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भारी भरकम हर्जाना: सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और इस्तेमाल के एवज में प्रशासन की ओर से 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की भारी क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की गई थी।
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साक्ष्यों की कमी: मस्जिद पक्ष ने इसे वक्फ की जमीन बताते हुए करीब 150 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद होने की दलील दी थी, परंतु न्यायिक जांच में इस दावे की पुष्टि के लिए कोई ठोस और पुख्ता दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किए जा सके।
📱 रात में फैली खबर तो सक्रिय हुए नेता: सांसद-विधायकों को गेट पर रोका, RAF तैनात
शुक्रवार रात का घटनाक्रम और राजनीतिक गहमागहमी:
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लाइव आकर रखी बात: कार्रवाई की आशंका गहराते ही कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उनके दामाद शायान मसूद ने देर रात सोशल मीडिया पर लाइव आकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और शांति बनाए रखने की अपील की।
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नेताओं की घेराबंदी: सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई जनप्रतिनिधि रात में ही कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें मुख्य द्वार पर ही रोक दिया।
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आरएएफ का पहरा: कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की अतिरिक्त टुकड़ियों को कलेक्ट्रेट के चारों ओर तैनात कर दिया गया।
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प्रशासनिक आश्वासन पर असमंजस: देर रात नेताओं की जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात के दौरान केवल परिसर को सील किए जाने की चर्चा थी, लेकिन सुबह अचानक बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई।
🚨 कैराना सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा: सहारनपुर आने से रोका
नेताओं की गतिविधियों पर सख्त पहरा:
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हाउस अरेस्ट की सूचना: घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के सहारनपुर पहुंचने की सूचना मिली थी, लेकिन प्रशासन ने एहतियातन उन्हें कैराना में ही हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर दिया।
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भीड़ जुटाने पर रोक: जिले भर में पुलिस प्रशासन ने किसी भी प्रकार के राजनीतिक जमावड़े या सामूहिक विरोध को रोकने के लिए कई संवेदनशील स्थानों और नेताओं के आवासों के बाहर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए।
📌 2025 में बजरंग दल की शिकायत से शुरू हुआ था विवाद: डेढ़ साल बाद अंजाम तक पहुंची कार्रवाई
मामले की ऐतिहासिक समयरेखा:
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मार्च 2025 में शिकायत: कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध निर्माण को लेकर बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
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बेदखली अधिनियम में केस: इस शिकायत के आधार पर 24 मार्च 2025 को उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत न्यायिक प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी।
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ध्वस्तीकरण और वर्तमान स्थिति: डेढ़ वर्ष से अधिक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण पूरा किया। फिलहाल कलेक्ट्रेट और संवेदनशील इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है।