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आय से अधिक संपत्ति मामले में शिमला विजिलेंस दफ्तर पहुंचे BJP विधायक सुधीर शर्मा, 2 घंटे चली पूछताछ

शिमला (हिमाचल प्रदेश): भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ विधायक सुधीर शर्मा आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए शिमला स्थित राज्य विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे।

विजिलेंस अधिकारियों ने करीब दो घंटे तक सुधीर शर्मा से गहन पूछताछ की और उनके वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारी दर्ज की। सुधीर शर्मा के विजिलेंस दफ्तर पहुंचने के समर्थन और विरोध स्वरूप भाजपा के कई अन्य विधायक भी एकजुट होकर विजिलेंस मुख्यालय पहुंच गए। पूरी पूछताछ के दौरान भाजपा विधायक मुख्यालय परिसर में डटे रहे और आरोप लगाया कि दो वर्ष पूर्व कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद से ही सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार राजनीतिक द्वेष के तहत मामले दर्ज कर रही है।

🗣️ ‘विधानसभा सत्र के दौरान पूछताछ पहली बार’: विधायक सुधीर शर्मा का सरकार पर हमला

पूछताछ के बाद सुधीर शर्मा का आधिकारिक बयान:

  • सत्र के दौरान बुलाने पर ऐतराज: पूछताछ समाप्त होने के उपरांत मीडिया से बातचीत में सुधीर शर्मा ने कहा कि संसदीय इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला है जब विधानसभा सत्र चलने के दौरान किसी सिटिंग विधायक को पूछताछ के लिए तलब किया गया।

  • विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बदले की भावना से काम कर रही है और लोकतांत्रिक तरीके से विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, जो अधिक समय तक नहीं चलेगा।

❓ ‘केस और IO धर्मशाला में तो शिमला क्यों बुलाया?’: प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कानूनी प्रक्रियाओं और अधिकार क्षेत्र पर सुधीर शर्मा के तर्क:

  • विधानसभा को सूचना का नियम: सुधीर शर्मा ने स्पष्ट किया कि किसी वर्तमान विधायक को जांच के लिए बुलाने से पहले विधानसभा अध्यक्ष या सचिवालय को पूर्व सूचना देना आवश्यक होता है, जो पिछली तारीख में दी गई थी।

  • मुख्यालय बुलाने का औचित्य: उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जब मूल प्रकरण और जांच अधिकारी (IO) दोनों धर्मशाला में तैनात हैं, तो उन्हें विशेष रूप से शिमला विजिलेंस मुख्यालय क्यों तलब किया गया, इसका कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।

⚡ ‘सीएम खुद कभी किसी बड़े पद पर नहीं रहे’: मुख्यमंत्री सुक्खू पर साधा तीखा निशाना

राजनीतिक आरोप और मुख्यमंत्री पर पलटवार:

  • जांच में पूर्ण सहयोग: विधायक ने कहा कि उन्होंने पूर्व में भी जांच एजेंसी को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए थे और आज भी पूछे गए सभी प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर दिए हैं।

  • नियमों के उल्लंघन का आरोप: उन्होंने जांच प्रक्रिया में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन न किए जाने का आरोप लगाया।

  • मुख्यमंत्री पर टिप्पणी: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं विधायक बनने से पहले किसी बड़े संवैधानिक पद पर नहीं रहे हैं, इसलिए वे गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी करते हैं। सुधीर शर्मा ने कहा कि सरकार को लगता है कि हर व्यक्ति भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसका माकूल जवाब प्रदेश की जनता समय आने पर देगी।