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कवर्धा: करोड़ों खर्च के बाद भी बेल्हारी बांध में दरारें! पानी का दबाव कम करने खोला गया नहर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

कबीरधाम (छत्तीसगढ़): जिले के कवर्धा अंतर्गत लोहारा विकासखंड के छोटूपारा गांव में वर्ष 1975 में निर्मित ऐतिहासिक बेल्हारी बांध के जीर्णोद्धार और मजबूतीकरण कार्य की गुणवत्ता पर पहली ही बारिश में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

लगभग 56 वर्ष पुराने इस बांध की संरचनात्मक मरम्मत हेतु जल संसाधन विभाग द्वारा ₹2 करोड़ 68 लाख की भारी-भरकम राशि स्वीकृत कर कार्य कराया जा रहा है। किंतु बारिश का दौर शुरू होते ही बांध के मुख्य तटबंध के कई हिस्सों में अचानक धंसाव और गहरी दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिससे निर्माण कार्य में भारी अनियमितता उजागर हो रही है।

🌊 बांध से पानी का रिसाव तेज, 4 गांवों, लोहारा नगर पंचायत और 162 एकड़ फसल पर मंडराया जलमग्न होने का खतरा

तटबंध में आई दरारों से निरंतर हो रहे पानी के रिसाव के कारण आसपास के चार गांवों, नगर पंचायत सहसपुर लोहारा तथा लगभग 162 एकड़ कृषि भूमि के जलमग्न होने का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

यद्यपि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि स्थिति पूर्णतः नियंत्रण में है और किसी प्रकार का तात्कालिक खतरा नहीं है, किंतु ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि यह रिसाव न रुका तो आने वाले ग्रीष्मकाल में उन्हें और उनके मवेशियों को पेयजल की बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ेगा।

💧 बांध पर दबाव घटाने 15 दिनों से खुला है नहर, बह रहा लाखों लीटर पानी; गर्मी में जलसंकट की आशंका

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों और गुणवत्ता की घोर अनदेखी किए जाने के कारण ही तटबंधों की मिट्टी धंस रही है और दरारें चौड़ी हो रही हैं।

संरचनात्मक विफलता की भयावह स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बांध का जलस्तर घटाने के उद्देश्य से पिछले 15 दिनों से मुख्य नहर को खोल रखा है। प्रतिदिन लाखों लीटर पानी नहर के माध्यम से व्यर्थ बहाया जा रहा है, ताकि बांध के कमजोर तटबंध पर पानी का दबाव कम किया जा सके।

🌾 खेतों में घुसा बांध का रिसाव का पानी, फसलें चौपट होने से चिंतित हुए किसान

तटबंध की मिट्टी खिसकने और लगातार पानी रिसने के कारण समीपस्थ किसानों के उपजाऊ खेतों में पानी भर रहा है, जिससे खड़ी फसलों के सड़ने एवं नष्ट होने की तीव्र आशंका उत्पन्न हो गई है।

किसानों को भय है कि यदि वर्षा का सिलसिला यूँ ही जारी रहा, तो कमजोर हो चुका तटबंध पूरी तरह ढह सकता है। इसके अतिरिक्त, मानसून सीजन में ही बांध का जल खाली कर दिए जाने से आगामी रबी फसल की सिंचाई और दैनिक निस्तारी के लिए जलसंकट की विकट स्थिति पैदा हो जाएगी।

🏗️ करोड़ों के कार्य में घोर लापरवाही का आरोप, जल संसाधन विभाग के SDO ने दिया मरम्मत का आश्वासन

सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च करने के उपरांत भी निर्माण चरण में ही तटबंध का क्षतिग्रस्त होना प्रशासनिक और ठेकेदारी स्तर पर बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।

इस संवेदनशील मामले पर जल संसाधन विभाग (WRD) के उपविभागीय अधिकारी (SDO) राहुल पंत ने बताया कि बेल्हारी बांध के तटबंध के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। विभाग द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए आवश्यक तकनीकी मरम्मत कराकर तटबंध को दुरुस्त किया जाएगा और फिलहाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से अतिरिक्त पानी को नहर के जरिए निकाला जा रहा है।