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रूस की सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाली एकमात्र पार्टी ‘याब्लोको’ चुनाव से बाहर

मॉस्को (रूस): रूस की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने सोमवार को एक ऐतिहासिक और विवादित फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि यूक्रेन में क्रेमलिन की सैन्य कार्रवाई का खुलकर विरोध करने वाले देश के एकमात्र पंजीकृत राजनीतिक दल को अगले महीने होने वाले स्टेट ड्यूमा (संसदीय चुनाव) के मतपत्र (बैलेट) से हटा दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्रेमलिन-समर्थक एक दल की अपील पर सुनवाई करते हुए उदारवादी ‘याब्लोको’ (जिसका रूसी भाषा में शाब्दिक अर्थ ‘सेब’ होता है) पार्टी का चुनाव आयोग में पंजीकृत रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ही केंद्रीय चुनाव आयोग ने याब्लोको को 10 अन्य राजनीतिक दलों के साथ चुनाव लड़ने की हरी झंडी दी थी। कभी रूसी संसद में उदारवाद का प्रमुख चेहरा रही इस पार्टी का प्रतिनिधित्व समय के साथ कम होता गया, किंतु हाल के वर्षों में यह सेना भेजने का विरोध करने वाली एकमात्र वैध राजनीतिक आवाज बची थी।

☮️ कोर्ट के फैसले के खिलाफ जन-आक्रोश, यावलिंस्की बोले— “अधिकारियों को सहज करने वाले सवालों से भाग रही सरकार”

पार्टी के चुनावी घोषणापत्र व नारों में ‘युद्धविराम समझौते, कूटनीति और शांति!’, ‘परमाणु युद्ध रोकने का संकल्प’ तथा ‘डर व राजनीतिक दमन से मुक्त रूस’ जैसे दूरगामी मुद्दे सम्मिलित थे।

1990 के दशक में याब्लोको की सह-स्थापना करने वाले दिग्गज उदारवादी राजनेता एवं पार्टी की राजनीतिक समिति के प्रमुख ग्रिगोरी यावलिंस्की ने इस अदालती आदेश की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उच्च स्तर पर अपील दायर करने की घोषणा की। यावलिंस्की ने एक ऑनलाइन वक्तव्य में कहा कि, “याब्लोको को चुनावी प्रक्रिया से बेदखल करने का सीधा अर्थ है उन नागरिकों की आवाज को खारिज करना जो सत्ता से असहज करने वाले प्रश्न पूछते हैं। हमें आशा है कि प्रशासन शांति और भयमुक्त वातावरण की जन-मांग को स्वीकार करेगा।”

🍎 सोशल मीडिया पर ‘सेब’ के साथ वीडियो ट्रेंड, विदेश में रह रहे विपक्षी नेताओं का मिला समर्थन

विदेशों में निर्वासन में रह रहे रूस के कई प्रमुख विपक्षी चेहरों ने रूसी मतदाताओं से याब्लोको का समर्थन करने का आह्वान किया था।

इनमें दिवंगत विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया, इल्या याशिन तथा व्लादिमीर कारा-मुर्ज़ा शामिल हैं। यूलिया नवलनाया ने पार्टी के युद्ध-विरोधी सिद्धांतों की सराहना करते हुए इसे नैतिक रूप से सही कदम बताया था। यद्यपि सोमवार को अदालत में मौजूद पार्टी अध्यक्ष निकोलाई रिबाकोव ने कानूनी जब्ती से बचने हेतु बाहरी समर्थन से दूरी बनाने की चेष्टा की, किंतु सोशल मीडिया (टिकटॉक, टेलीग्राम) पर युवाओं ने हाथों में सेब पकड़कर और रूसी लोकगीतों पर नृत्य कर याब्लोको के प्रति अपना समर्थन व्यापक रूप से प्रदर्शित किया।

🗳️ जनता के असंतोष को दबाने की कोशिश, रिबाकोव बोले— “लोग केवल जिंदा रहना चाहते हैं”

पार्टी अध्यक्ष निकोलाई रिबाकोव ने अदालत के समक्ष स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पार्टी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन अभियानों के लिए कोई धनराशि वितरित नहीं कर रही थी।

उन्होंने भावुक तर्क देते हुए कहा कि आम नागरिक इस दल का समर्थन केवल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे अपने ही देश में शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहते हैं और युद्ध की विभीषिका में प्राण नहीं गंवाना चाहते। राजनीतिक विश्लेषण केंद्र ‘NEST’ के वरिष्ठ फेलो निकोलाई पेत्रोव के अनुसार, क्रेमलिन ने संभवतः प्रारंभ में इस पार्टी को मैदान में उतरने की अनुमति यह दिखाने के लिए दी थी कि युद्ध-विरोधियों की संख्या बेहद नगण्य है, किंतु जनसमर्थन के बढ़ते प्रवाह ने सत्ता के गणित को पूरी तरह उलझा दिया।

🔥 याब्लोको का ‘शांति अभियान’ बना क्रेमलिन की गले की फांस, यावलिंस्की बोले— “शांति की मांग उम्मीद से ज्यादा मजबूत”

क्रेमलिन के सामने अब सबसे जटिल चुनौती बिना अंतरराष्ट्रीय किरकिरी के इस राजनीतिक संकट से उबरने की है।

विश्लेषकों का मानना है कि याब्लोको पार्टी को जबरन चुनाव से बेदखल करने का अर्थ वैश्विक मंच पर यह स्वीकार करना होगा कि रूसी प्रशासन शांतिवादी विचारों और जनाक्रोश से भयभीत है। ग्रिगोरी यावलिंस्की ने इस बात पर बल दिया कि अदालत का यह कठोर कदम स्वयं सिद्ध करता है कि उनकी पार्टी का मंच कितना प्रासंगिक और शक्तिशाली हो चुका है। उन्होंने कहा कि रूस की जनता के भीतर शांति और स्वतंत्रता की चाहत सरकार के प्रशासनिक आकलनों से कहीं अधिक सुदृढ़ और व्यापक बनकर उभरी है।