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राजस्थान के बालोतरा में गजब मामला: खेत में दबाए ₹5 लाख भूल गया किसान, 1 साल बाद निकले तो दीमक ने चट कर दिए नोट

बालोतरा/पचपदरा (राजस्थान): राजस्थान के बालोतरा जिले अंतर्गत पचपदरा थाना क्षेत्र के ग्राम नेवाई से एक ऐसा अजूबा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया है।

यहाँ के एक स्थानीय किसान ने चोरी हो जाने के भय से अपने करीब ₹5 लाख का नकद कैश खेत में गड्ढा खोदकर दबा दिया था। किंतु, कुछ समय पश्चात वह उस जगह को ही पूरी तरह भूल गया। लगभग एक वर्ष बीत जाने के उपरांत जब खेत में बुवाई का कार्य शुरू हुआ, तो कल्टीवेटर चलने से नोटों से भरा वह बैग पुन: जमीन से बाहर निकल आया। यद्यपि, तब तक अत्यधिक नमी और दीमक (Termites) के कारण अधिकांश नोट पूरी तरह सड़ और गल चुके थे।

🏠 मकान बनाने हेतु बेचा था प्लॉट, घर में चोरी के डर से खेत में गाड़ दिए थे ₹5 लाख नकद

नेवाई गांव निवासी पीड़ित किसान मांगीलाल (50 वर्ष) ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि लगभग एक वर्ष पूर्व उसने गांव में पक्का मकान बनवाने के उद्देश्य से अपना एक प्लॉट बेचा था।

प्लॉट के सौदे से उसे ₹5 लाख की नकद धनराशि प्राप्त हुई थी। किसान को अपने कच्चे घर में इतनी बड़ी रकम रखने पर चोरी होने का भारी डर सता रहा था। इसी आशंका के चलते उसने पूरी रकम को एक कपड़े की थैली में सुरक्षित रखा और खेत के एक कोने में गहरा गड्ढा खोदकर मिट्टी के नीचे दबा दिया।

🔍 एक महीने बाद निकालने पहुंचा तो भूल गया जगह, मान लिया था कि अब नहीं मिलेंगे पैसे

मांगीलाल के कथनानुसार, करीब एक माह व्यतीत होने के बाद जब उसे गृह निर्माण व घरेलू आवश्यकताओं हेतु पैसों की आवश्यकता महसूस हुई, तो वह उन्हें खोदकर निकालने खेत पहुंचा।

किंतु, जिस स्थान पर उसने थैली दबाई थी, वह उस सटीक जगह की पहचान भूल चुका था। काफी खोजबीन व खुदाई करने के पश्चात भी जब पैसे नहीं मिले, तो हताश होकर उसने यही मान लिया कि अब शायद उसकी जीवन भर की कमाई उसे वापस नहीं मिल पाएगी।

🚜 बुवाई के दौरान कल्टीवेटर से बाहर निकला बैग, फटे और गले मिले ₹500-₹500 के नोट

घटनाक्रम में मोड़ तब आया जब करीब एक वर्ष बाद किसान ने अपने खेत में मानसून की बुवाई करवाई। चार दिन पूर्व खेत में ट्रैक्टर से कल्टीवेटर चलाया गया था।

शुक्रवार की सुबह जब मांगीलाल अपनी पत्नी व पुत्र के साथ खेत की बाड़बंदी (तारबंदी) ठीक करने पहुंचा, तो मिट्टी से आधा बाहर निकला हुआ एक पुराना बैग दिखाई दिया। जब मांगीलाल के बेटे और पत्नी ने बैग को खींचकर बाहर खोला तो उनके होश उड़ गए। बैग के भीतर वही ₹5 लाख का कैश था जिसे एक साल पहले गाड़ा गया था। किंतु जमीन के नीचे लगातार नमी व दीमक के प्रभाव से ₹500-₹500 के अधिकांश नोट बुरी तरह सड़, गल व चिपक चुके थे।

🐜 नमी और दीमक ने बर्बाद किए नोट, कुछ नोटों पर ही बचे हैं सीरियल नंबर

पीड़ित किसान के अनुसार, नोटों की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि कई नोट पूरी तरह सड़कर छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर गए हैं।

हालांकि, कुछ नोट ऐसे भी हैं जिन पर बैंक का सीरियल नंबर अभी भी आंशिक रूप से दिखाई दे रहा है। जमीन के अंदर अत्यधिक नमी और दीमक के हमले के कारण नोटों की यह दुर्गति हुई, जिससे परिवार को खुशी मिलने के बजाय भारी आर्थिक क्षति का डर सताने लगा। किसान को प्रारंभिक उम्मीद थी कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमानुसार बैंक में कटे-फटे व सड़े नोट जमा कराने पर उसकी मेहनत की कमाई वापस मिल जाएगी।

🏦 पचपदरा और बालोतरा की एसबीआई (SBI) शाखाओं ने नोट बदलने से किया इनकार, जयपुर जाने की दी सलाह

अपनी आपबीती लेकर मांगीलाल फौरन पचपदरा स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा पहुंचा। उसने बैंक अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यथा सुनाकर नोट बदलने की गुहार लगाई, किंतु नोटों की अत्यंत जर्जर व क्षत-विक्षत हालत देखकर शाखा प्रबंधक ने उन्हें बदलने से साफ इनकार कर दिया।

इसके उपरांत किसान बालोतरा स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा भी गया, किंतु वहां भी कोई तत्काल राहत नहीं मिल सकी। बैंक कर्मियों ने परामर्श दिया कि जिन नोटों के सीरियल नंबर पढ़े जा सकते हैं, उन्हें बदलने की विशेष प्रक्रिया हेतु उसे जयपुर स्थित आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय जाना पड़ सकता है।

😔 अनपढ़ किसान के सामने खड़ा हुआ बड़ा संकट, गांव में बना कौतूहल का विषय

किसान मांगीलाल का कहना है कि वह पूर्णतः अनपढ़ है और उसकी आर्थिक स्थिति भी अत्यंत दयनीय है।

ऐसे में अकेले जयपुर जाकर नोट बदलने की जटिल व कागजी प्रक्रिया को पूरा करना उसके लिए किसी बड़े पहाड़ जैसा है। किसान की पत्नी का कहना है कि यदि मांगीलाल ने पैसे छिपाते समय परिवार को विश्वास में लिया होता, तो आज यह बड़ा नुकसान होने से बच जाता। फिलहाल खेत में दबे खजाने और दीमक द्वारा नोटों को चट किए जाने की यह घटना पूरे बालोतरा जिले में कौतूहल और चर्चा का विषय बनी हुई है।