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जबलपुर: मुंह के कैंसर ऑपरेशन में भारी चूक! गाल के अंदर डॉक्टर ने लगाई ठुड्डी की स्किन, पीड़ित ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप

जबलपुर (मध्य प्रदेश): सामान्यतः किसी पुरुष के गाल या ठुड्डी पर उगी दाढ़ी उसके चेहरे की सुंदरता बढ़ाती है, परंतु कल्पना कीजिए कि यदि किसी व्यक्ति के मुंह के भीतर ही बाल उगने लगें तो उसका हर निवाला कितना पीड़ादायक हो जाएगा।

यह घटना सुनने में काल्पनिक अथवा किसी फिल्म की कहानी जैसी प्रतीत होती है, परंतु मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक सब्जी विक्रेता के साथ यह भयानक यथार्थ बन चुकी है। जबलपुर में एक सब्जी विक्रेता के होंठ व गाल के अंदर मामूली छाले (घाव) के ऑपरेशन के दौरान चिकित्सक ने प्रभावित हिस्से में ठुड्डी की दाढ़ी वाली त्वचा (Skin Grafting) लगा दी। इस गंभीर चिकित्सा लापरवाही के कारण पिछले दो वर्षों से पीड़ित के मुंह के अंदर लगातार बाल उग रहे हैं।

⚖️ “छोटी सी सर्जरी ने जिंदगी नरक बना दी”, न्याय और इलाज के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित सब्जी विक्रेता

पीड़ित का आरोप है कि एक गलत सर्जरी ने उसके संपूर्ण जीवन को नरक तुल्य बना दिया है।

अब वह यथोचित इलाज, राहत और न्याय की आस में विभिन्न अस्पतालों से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, परंतु उसकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे जबलपुर के अधारताल क्षेत्र के निवासी 56 वर्षीय मुकेश कुमार पेट पालने के लिए सब्जी का ठेला लगाते हैं।

🚔 27 महीने से भटक रहे मुकेश कुमार, पुलिस अधीक्षक कार्यालय व थाने से बिना कार्रवाई लौटाया

मुकेश कुमार लगातार शासकीय अस्पतालों, पुलिस थानों और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट चुके हैं, परंतु उनकी व्यथा सुनने वाला कोई नहीं है।

मुकेश कुमार का आरोप है कि वे विगत 27 महीनों से अपनी लिखित शिकायत लेकर मदन महल थाना एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय जा रहे हैं, किंतु हर बार केवल आवेदन लेकर उन्हें बिना किसी वैधानिक कार्यवाही के लौटा दिया जाता है। उनका कहना है कि संबंधित चिकित्सक एक प्रभावशाली व नामी डॉक्टर हैं, जिसके दबाव में पुलिस प्रशासन भी उनकी कोई सहायता नहीं कर रहा है।

🏥 27 महीने पहले उभरा था छाला, बायोप्सी के बाद निजी क्लीनिक में कराया था ऑपरेशन

पीड़ित के अनुसार, 27 माह पूर्व उनके गाल के आंतरिक हिस्से में एक छोटा सा छाला उभरा था, जो समय के साथ आकार में बड़ा होने लगा।

उन्होंने कई विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लिया और बायोप्सी जांच भी कराई। रिपोर्ट आने के उपरांत परेशानी बढ़ने पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज के कैंसर अस्पताल में कार्यरत डॉ. अर्पण मिश्रा से उनके निजी क्लीनिक में परामर्श लिया। मुकेश का आरोप है कि डॉक्टर ने कहा कि पुन: बायोप्सी कराने से कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए तुरंत ऑपरेशन कराना पड़ेगा।

💸 आयुष्मान कार्ड के अलावा ₹75 हजार नकद लिए, ऑपरेशन से 15 मिनट पहले कराए दस्तखत

पीड़ित का संगीन आरोप है कि ऑपरेशन से एक दिन पूर्व उनसे 75 हजार रुपये नकद लिए गए, जिसकी कोई आधिकारिक रसीद प्रदान नहीं की गई।

शेष वित्तीय राशि आयुष्मान भारत कार्ड के माध्यम से ली गई। उनका आरोप है कि डॉक्टरों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि होंठ के अंदर की केवल प्रभावित चमड़ी हटाई जाएगी, परंतु ऑपरेशन के दौरान उस स्थान पर ठुड्डी वाली दाढ़ी की त्वचा लगा दी गई, जबकि डॉक्टरों को भली-भांति ज्ञात था कि उस त्वचा पर बाल उगते हैं। ऑपरेशन के 15 मिनट पूर्व उनसे और उनके परिजनों से कई अज्ञात कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए और तदुपरांत बेहोश कर दिया गया।

💬 “टाटा मेमोरियल मुंबई और एम्स भोपाल ने दोबारा सर्जरी से किया इनकार, लेजर का खर्च उठाना असंभव”: पीड़ित मुकेश

“मुकेश ने बताया कि वे इलाज और समाधान के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई और एम्स भोपाल भी गए, परंतु दोनों ही प्रतिष्ठित संस्थानों के प्लास्टिक सर्जनों ने दोबारा सर्जरी करने से मना कर दिया। डॉक्टरों ने लेजर ट्रीटमेंट (Laser Treatment) की सलाह दी, जिसका प्रति सत्र (Session) खर्च 12 से 15 हजार रुपये है और उससे भी केवल 50% बाल हटने की संभावना जताई गई है। एक गरीब सब्जी विक्रेता के लिए यह महंगा इलाज कराना पूरी तरह असंभव है।”