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संसद के मानसून सत्र का आधा सफर पूरा, आखिरी 9 दिनों में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का आधा सफर पूरा हो चुका है। 20 जुलाई से प्रारंभ हुआ यह सत्र 13 अगस्त तक संचालित होगा, किंतु अब संपूर्ण राजनीतिक हलकों की निगाहें सत्र के अंतिम 9 कार्यदिवसों पर टिक गई हैं।

सत्र की शुरुआत में पेपर लीक और छात्र आंदोलनों को लेकर हुए भारी विपक्षी हंगामे के मध्य सरकार ने ‘एंटी पेपर लीक’ और ‘वंदे मातरम’ जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयक तो पारित करा लिए, किंतु अब असली संवैधानिक चुनौती दो सबसे बड़े संविधान संशोधन विधेयकों—महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation)—को लेकर है। यक्ष प्रश्न यह है कि क्या मोदी सरकार इन ऐतिहासिक संशोधनों के लिए अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटा पाएगी?

🏛️ टीएमसी और शिवसेना में टूट से बढ़ा संख्याबल, फिर भी दो-तिहाई बहुमत की राह कठिन

मानसून सत्र शुरू होने से पूर्व ही यह माना जा रहा था कि सरकार महिला आरक्षण को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए परिसीमन बिल जैसे बड़े संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में हुई राजनीतिक टूट के उपरांत सत्ता पक्ष का संख्या बल पूर्व की तुलना में काफी मजबूत हुआ है। हालांकि सत्र शुरू होते ही नीट (NEET) और पेपर लीक विवाद पर विपक्ष के आक्रामक रवैये के बावजूद सरकार ने अपने दो मुख्य विधेयकों को पारित कराने में सफलता पाई। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या सरकार इन दो सबसे संवेदनशील संविधान संशोधन विधेयकों को भी मुकाम तक पहुंचा पाएगी।

📊 2/3 बहुमत का गणित: लोकसभा में चाहिए 360 सांसद, जानिए एनडीए के पास अभी कितना है आंकड़ा

महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में अलग-अलग दो-तिहाई (2/3) उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के समर्थन की संवैधानिक अनिवार्यता है।

लोकसभा की कुल 543 सीटों में से वर्तमान में 3 सीटें रिक्त हैं, अर्थात प्रभावी सदस्य संख्या 540 है। इस स्थिति में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने हेतु न्यूनतम 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है।

वर्तमान दलीय स्थिति पर नजर डालें तो:

  • एनडीए (NDA): 293

  • NCPI (TMC से अलग हुआ गुट): 20

  • शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट): 6

  • YSRCP + अन्य निर्दलीय: 5

  • कुल संभावित समर्थन: 324 सांसद

गणित स्पष्ट है कि सरकार अभी भी बहुमत के जादुई आंकड़े 360 से करीब 36 सांसद दूर है।

⚙️ परिसीमन को लेकर सरकार की तैयारी पूरी, शीर्ष नेतृत्व जल्द ले सकता है बड़ा निर्णय

सरकार की प्राथमिक कोशिश उन क्षेत्रीय दलों का समर्थन प्राप्त करने की है जो अब तक तटस्थ रहे हैं या विपक्ष के खेमे में खड़े रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि द्रमुक (DMK) और कुछ अन्य प्रमुख दक्षिणी दलों के अंतिम रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं। चूंकि पेपर लीक जैसे मुद्दों पर विपक्ष के तेवर अत्यंत आक्रामक हैं, इसलिए सरकार किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पटल पर तभी प्रस्तुत करना चाहेगी जब उसे संख्या बल को लेकर शत-प्रतिशत भरोसा हो।

सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि परिसीमन को लेकर प्रशासनिक और विधायी तैयारी पूरी है, संख्या बल का प्रबंध भी लगभग पूरा किया जा चुका है, किंतु इसे अंतिम रूप कब दिया जाएगा, इसका फैसला शीर्ष नेतृत्व शीघ्र ही करेगा।

⏳ संसद के शेष 9 दिन बेहद संवेदनशील, क्या इतिहास रच पाएगी मोदी सरकार?

उधर एफसीआरए (FCRA) सहित कुछ अन्य अहम विधेयकों पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव के पूरे आसार बने हुए हैं।

संसद के इस मानसून सत्र में अब केवल 9 कार्यदिवस शेष बचे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही कौंध रहा है—क्या मोदी सरकार दो-तिहाई बहुमत का जटिल गणित साधकर महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे दूरगामी विधेयकों को पारित करा पाएगी, या फिर यह दोनों ऐतिहासिक बिल एक बार फिर अनिश्चितकाल के लिए इंतजार की सूची में चले जाएंगे? इसका उत्तर आने वाले सप्ताह में संसद के भीतर होने वाली हलचलों से स्पष्ट हो जाएगा।