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वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक: क्या स्तनपान से कमजोर होती है मां? जानें ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े 4 बड़े मिथक और उनका सच

हर साल 1 से 7 अगस्त तक दुनियाभर में विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) मनाया जाता है। ब्रेस्टफीडिंग नवजात शिशु के लिए पोषण का सबसे उत्तम और प्राकृतिक स्रोत मानी जाती है।

मां के दूध से बच्चे को सभी आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं, जो उसके शारीरिक विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को मजबूत बनाने में बेहद मददगार होते हैं। यही मुख्य कारण है कि शिशु रोग विशेषज्ञ (Pediatricians) भी जन्म के तुरंत बाद बच्चे को मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं। हालांकि, ब्रेस्टफीडिंग को लेकर समाज में कई भ्रांतियां प्रचलित हैं, जिनसे कई बार नई मांएं असमंजस में पड़ जाती हैं।

प्रायः यह माना जाता है कि ब्रेस्टफीडिंग का लाभ केवल बच्चे को ही मिलता है, जबकि इसका सीधा और सकारात्मक असर मां की सेहत पर भी पड़ता है। डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव आते हैं, इसलिए इस दौरान सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। आइए जानते हैं ब्रेस्टफीडिंग से मां की सेहत को होने वाले फायदों और इससे जुड़े प्रमुख मिथकों की सच्चाई।

💡 ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े 4 बड़े मिथक और वैज्ञानिक सच

  • मिथक: ब्रेस्टफीडिंग से केवल बच्चे को ही स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

  • सच: अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के अनुसार, ब्रेस्टफीडिंग से मां को भी जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। इससे डिलीवरी के बाद मां के शरीर को तेजी से रिकवर होने में मदद मिलती है।

  • मिथक: ब्रेस्टफीडिंग कराने से मां का शरीर कमजोर हो जाता है।

  • सच: ब्रेस्टफीडिंग एक पूरी तरह स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है। यदि मां पौष्टिक आहार लेती है, पर्याप्त जल का सेवन करती है और उचित आराम करती है, तो ब्रेस्टफीडिंग से शरीर कमजोर नहीं होता।

  • मिथक: कुछ महीनों के बाद ब्रेस्टफीडिंग कराने का कोई लाभ नहीं होता।

  • सच: मां और बच्चा जब तक चाहें, ब्रेस्टफीडिंग जारी रख सकते हैं। लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग कराने से भी मां और बच्चे दोनों को दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिलते रहते हैं।

  • मिथक: यदि दूध कम बन रहा हो, तो तुरंत फॉर्मूला मिल्क (Formula Milk) शुरू कर देना चाहिए।

  • सच: शुरुआत में कई महिलाओं को ऐसा महसूस हो सकता है। ऐसे में बिना चिकित्सकीय परामर्श के फॉर्मूला मिल्क शुरू करने के बजाय डॉक्टर या लैक्टेशन एक्सपर्ट (Lactation Expert) से सलाह लेनी चाहिए।

🌸 ब्रेस्टफीडिंग से मां की सेहत को मिलने वाले अनमोल फायदे

ACOG के अनुसार, डिलीवरी के बाद मां के गर्भाशय (Uterus) को वापस अपनी सामान्य स्थिति में लौटने में ब्रेस्टफीडिंग मदद करती है। इससे डिलीवरी के बाद होने वाली हैवी ब्लीडिंग (Postpartum Hemorrhage) का खतरा काफी कम हो जाता है।

चिकित्सकीय शोध दर्शाते हैं कि जो महिलाएं नियमित ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उनमें आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर, टाइप 2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका काफी कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त, स्तनपान के दौरान मां और शिशु के बीच भावनात्मक लगाव (Emotional Bonding) भी गहरा होता है।

⏱️ शिशु को कितने समय तक ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शिशु के जन्म के शुरुआती 6 महीनों तक उसे केवल और केवल मां का दूध (Exclusive Breastfeeding) ही पिलाना चाहिए।

6 महीने के बाद बच्चे की उम्र और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार ठोस ऊपरी आहार (Complementary Feeding) की शुरुआत की जा सकती है, लेकिन इसके साथ भी ब्रेस्टफीडिंग जारी रखनी चाहिए। मां और बच्चे की सुविधा एवं डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे 1 से 2 वर्ष या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।

🩺 ब्रेस्टफीडिंग के दौरान माताओं को रखनी चाहिए ये सावधानियां

स्तनपान कराने वाली माता को अपने दैनिक खान-पान में संतुलित आहार, हरी सब्जियां, फल और प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

शरीर को पर्याप्त विश्राम देना भी उतना ही जरूरी है। यदि मां किसी अन्य बीमारी के लिए कोई दवाई ले रही है, तो डॉक्टर से यह अवश्य सुनिश्चित कर लें कि वह दवा स्तनपान के दौरान सुरक्षित है या नहीं। यदि स्तनपान कराते समय कोई दर्द, संक्रमण या शिशु के दूध पीने में असुविधा हो, तो तुरंत लैक्टेशन एक्सपर्ट या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।