श्योपुर: भूतिया भवन बना सहसराम का जनजाति छात्रावास! कागजों में 12 बच्चे दर्ज, मौके पर पसरा सन्नाटा और धूल
श्योपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के विजयपुर विकासखंड अंतर्गत सहसराम स्थित अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के छात्रावास को स्थानीय ग्रामीण अब ‘भूतिया भवन’ के नाम से पुकारने लगे हैं।
यह कहने को तो आदिवासियों के बच्चों के लिए निर्मित छात्रावास है, लेकिन यहां अधिकांश समय सिर्फ सन्नाटा और अंधेरा पसरा रहता है। शासकीय रिकॉर्ड और उपस्थिति रजिस्टर में भले ही 12 छात्रों के नाम दर्ज दिखाए गए हैं, लेकिन हकीकत में यहां कभी किसी छात्र को पढ़ाई करते या रहते नहीं देखा गया। कहने को यहां छात्रावास अधीक्षक और स्टाफ की तैनाती है, लेकिन वे भी केवल कागजी औपचारिकता पूरी करने ही यहां कभी-कभार आते हैं।
🕸️ बिस्तरों पर जमी धूल और कड़ाही में नाममात्र की दाल, फर्जीवाड़े की खुली कलाई
ग्रामीणों से मिली गुप्त सूचना के आधार पर जब मीडिया टीम ने छात्रावास का औचक निरीक्षण (ग्राउंड रिपोर्ट) किया, तो हॉस्टल के भीतर पूरी तरह अंधेरा और सन्नाटा पसरा हुआ मिला।
कमरों की पड़ताल करने पर छात्रों के बिस्तरों पर धूल की मोटी परतें जमी पाई गईं, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि इन बिस्तरों का उपयोग महीनों से नहीं हुआ है। हॉस्टल की रसोई में एक छोटी सी कड़ाही में बहुत कम मात्रा में दाल बनी रखी थी। दाल की मात्रा इतनी कम थी कि हॉस्टल में पदस्थ 3 कर्मचारियों का पेट भी नहीं भर सकता था। ऐसे में गंभीर सवाल उठता है कि यदि रिकॉर्ड के मुताबिक दर्ज बच्चे छात्रावास में रह रहे हैं, तो फिर उनके रहने और भोजन की वास्तविक व्यवस्था क्या है?
😡 सवालों से घिरे हॉस्टल अधीक्षक ने गांव के बच्चों को ठहराया छात्र, उजागर हुई पोल
मौके पर तैनात वाटरमैन राजेंद्र से जब पूछा गया कि “इतनी सी दाल में दर्ज 12 बच्चों का भोजन कैसे होगा?” तो उसने बेतुका जवाब देते हुए कहा कि “एडजस्ट करना पड़ता है।”
जब उससे पूछा गया कि जब बच्चे ही नहीं हैं तो खाना किसके लिए बन रहा है, तो वह पूरी तरह निरुत्तर हो गया। इसी गहमागहमी के बीच तत्कालीन हॉस्टल अधीक्षक पूरन जाटव गांव से कुछ अनजान बच्चों को बुला लाए और उन्हें हॉस्टल का छात्र बताने लगे। हालांकि, जब उपलब्ध शासकीय रजिस्टर से मिलान किया गया, तो उन बच्चों का नाम दर्ज नहीं मिला। सवालों में फंसता देख पूरन जाटव भड़क गए और बाद में सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने 2 जुलाई को ही नए अधीक्षक को चार्ज दे दिया है।
⚔️ नए और पुराने अधीक्षक के बीच मौके पर ही छिड़ी रार, सरपंच पति बोले- 4 साल से खाली है हॉस्टल
हालांकि, मौके पर मौजूद नवागत अधीक्षक मुकेश धाकड़ ने पूरन जाटव के प्रभार देने के दावे को उनके सामने ही सिरे से खारिज कर दिया।
मुकेश धाकड़ ने स्पष्ट कहा, “मुझे आज तक छात्रावास का कोई लिखित चार्ज नहीं दिया गया है। मैं इनके सामने ही कह रहा हूं कि मुझे कोई प्रभार नहीं मिला है।” वहीं, ग्राम पंचायत सहसराम की महिला सरपंच रीना यादव के पति नरेश यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पिछले 4 वर्षों से इस हॉस्टल में एक भी बच्चा नहीं रह रहा है। ग्रामीणों ने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित शिकायतें कीं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
🔍 सहायक आयुक्त ने लिया संज्ञान, गठित होगी जांच टीम और दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
इस पूरे फर्जीवाड़े और गंभीर लापरवाही पर अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त राकेश कुमार गुप्ता ने संज्ञान लिया है।
उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा, “यह अत्यंत गंभीर विषय है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (टीम) का गठन किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी फर्जीवाड़े और लापरवाही में दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”