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सिंहस्थ 2028 की तैयारी: रेलवे पटरी पर हादसों को रोकने के लिए बिछाया जा रहा सुरक्षा घेरा

रेलवे ने ट्रैक पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए एक ठोस योजना तैयार की है। इसके तहत रतलाम, उज्जैन, इंदौर और भोपाल रूट के करीब 500 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर दोनों तरफ सुरक्षा कवच (बैरियर) लगाने का काम शुरू हो गया है। यह सुरक्षा घेरा भविष्य में राजस्थान के कोटा तक बढ़ाया जाएगा। पटरियों के दोनों ओर करीब साढ़े 3 फीट ऊंचे लोहे के क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं, जिससे पटरियों पर अवांछित तत्वों, इंसानों और मवेशियों की घुसपैठ को पूरी तरह रोका जा सकेगा।

🚫 पटरियों पर आवाजाही होगी नामुमकिन

वर्तमान में रेलवे पटरियों पर आम लोगों और मवेशियों की बेधड़क आवाजाही के कारण आए दिन हादसे होते रहते हैं। खासकर लोग शॉर्टकट के चक्कर में सीधे रेल पटरी पार करने का जोखिम उठाते हैं, जो जानलेवा साबित होता है। इन लोहे के बैरियर्स के लगने के बाद पटरियों पर पहुंचना असंभव हो जाएगा, जिससे जानमाल के नुकसान की आशंका न्यूनतम हो जाएगी। रेलवे का कहना है कि यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से ‘सिंहस्थ 2028’ को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है, क्योंकि इस आयोजन के दौरान करोड़ों यात्रियों के रेल मार्ग से आने की संभावना है।

📍 उज्जैन से शुरू हुआ सुरक्षा घेरा बनाने का काम

रेलवे ने ट्रैक के दोनों ओर लोहे के बैरियर लगाने का कार्य उज्जैन से शुरू किया है। योजना के अनुसार, सबसे पहले उज्जैन के शहरी क्षेत्र के रेलवे ट्रैक को कवर किया जा रहा है। जिन स्थानों पर पहले से ही सुरक्षा दीवारें बनी हुई हैं, उन्हें यथावत रखा जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी दीवार या गैप के जरिए लोग पटरियों तक न पहुंच सकें।

🗣️ क्या है रेलवे का पक्ष?

इंदौर रेलवे जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया, “आमतौर पर रेलवे ट्रैक पर मवेशियों और लोगों के आने से दुर्घटनाएं होती हैं। इसके चलते ट्रैक को सुरक्षित करने के लिए क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं। पूरे उज्जैन मंडल में रेलवे द्वारा इस सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है।”