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Maharashtra Rain Havoc: महाराष्ट्र में बारिश बनी काल, लापरवाही के चलते 9 लोगों की दर्दनाक मौत; जानें पूरा मामला

महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश ने न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि सरकारी विभागों की तैयारियों की भी पोल खोल दी है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ दिनों में हुई 9 लोगों की मौत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जलभराव, खुले मैनहोल, खुले बिजली के तार और जर्जर इमारतों ने मानसून को आम जनता के लिए जानलेवा बना दिया है।

करंट की चपेट में आकर गई मासूमों की जान

बारिश और लापरवाही का सबसे भयावह रूप बिजली के तारों के खुले रहने में दिखा।

  • कल्याण-डोंबिवली: शशि राहुल चक्र (26) की पानी में गिरे बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत हो गई।

  • मुंब्रा: 17 वर्षीय आलिया की जलभराव में फैले करंट की चपेट में आने से जान चली गई।

  • भिवंडी: मुस्तफा शेख (28) की भी सड़क पर पड़े खुले तार के कारण करंट लगने से मौत हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद बिजली विभाग ने समय रहते मरम्मत का कार्य नहीं किया।

🕳️ खुले मैनहोल और गड्ढों ने निगला जीवन

मुंबई और पुणे जैसे शहरों में जलभराव के बीच खुले मैनहोल मौत का जाल बने हुए हैं। मुंबई में असलम शेख (55) और पुणे में दो साल का बच्चा सोहम लखन कसबे बिना बैरिकेडिंग वाले गड्ढों में गिरने के कारण अपनी जान गंवा बैठे। यह सीधे तौर पर नगर निकायों और संबंधित ठेकेदारों की घोर लापरवाही को दर्शाता है।

🏢 जर्जर इमारतों और हादसों का भयावह सच

मुंबई, ठाणे और पनवेल के इलाकों में पुरानी इमारतों के स्लैब गिरने से संतोष भरसकर और सुरेश लोखंडे जैसे लोगों की मौत हुई है। प्रशासन द्वारा मानसून पूर्व ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ के दावों की हकीकत इन हादसों ने बयां कर दी है। इसके अलावा, मुंबई में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत ने पेड़ों की छंटाई के दावों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

⚖️ जिम्मेदार कौन?

इन सभी घटनाओं में एक बात समान है—लापरवाही। मानसून से पहले सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी, अधूरा निर्माण कार्य और शिकायतों के प्रति उदासीनता ने इन नौ मौतों को न्योता दिया है। यदि समय रहते निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त होती, तो इन परिवारों के चिराग बुझने से बचाए जा सकते थे। अब देखना यह है कि प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।