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Haryana Politics History: दीपकमल सहारण की पुस्तक ‘चौपाल से चंडीगढ़’ का विश्लेषण; हरियाणा के चुनावी इतिहास की अनकही कहानी

चंडीगढ़: हरियाणा की राजनीति केवल सत्ता के गलियारों की कहानी नहीं है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक बुनावट, जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का प्रतिबिंब भी है। वरिष्ठ पत्रकार दीपकमल सहारण द्वारा रचित पुस्तक ‘चौपाल से चंडीगढ़’ हरियाणा के विधानसभा चुनावों के 75 वर्षों के इतिहास को बड़े ही व्यवस्थित और तथ्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है। 500 से अधिक पृष्ठों में फैली यह कृति शोधार्थियों, पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।

📊 व्यापक शोध और तथ्यात्मक गहराई

इस पुस्तक की सबसे बड़ी खूबी इसका डेटा आधारित होना है। लेखक ने हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों के चुनावी इतिहास को संकलित किया है। इसमें निर्वाचित विधायकों, प्रत्याशियों और चुनाव परिणामों का जो विवरण दिया गया है, वह इंटरनेट पर बिखरे आंकड़ों को एक स्थान पर लाने का एक बड़ा प्रयास है। यह किताब केवल चुनावी आंकड़े नहीं, बल्कि हरियाणा की राजनीति में हुए दलबदल, गठबंधन की राजनीति और राजनीतिक परिवारों के उदय-अस्त की गाथा भी सुनाती है।

🧩 हरियाणा की राजनीति के प्रमुख आयाम

पुस्तक के माध्यम से हरियाणा की राजनीति को समझने के लिए कुछ मुख्य पहलुओं का विश्लेषण मिलता है:

  • जातीय समीकरण: राज्य की राजनीति में जाट, गैर-जाट, अहीर और दलित जैसे सामाजिक समूहों की निर्णायक भूमिका।

  • क्षेत्रीय अस्मिता: अहीरवाल, मेवात, बागड़ और जाटलैंड जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट राजनीतिक प्राथमिकताएं।

  • वंशवादी राजनीति: प्रदेश की राजनीति में ‘तीन लाल’ (चौधरी देवीलाल, चौधरी बंसीलाल और चौधरी भजनलाल) और अन्य प्रमुख राजनीतिक परिवारों का प्रभाव।

🔍 राजनीतिक मुद्दों का मंथन

पुस्तक इस प्रश्न को भी जीवंत करती है कि हरियाणा के चुनाव किन मुद्दों पर लड़े जाते हैं? लेखक ने 1977 के आपातकाल के प्रभाव से लेकर 1987 की भ्रष्टाचार विरोधी लहर और 2014 की राष्ट्रीय लहर तक का जिक्र किया है। इसके अलावा किसान, रोजगार, सिंचाई और आरक्षण जैसे स्थानीय मुद्दे किस प्रकार चुनावों में निर्णायक साबित हुए, यह पुस्तक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🏆 एक संग्रहणीय कृति

यद्यपि पुस्तक में जातीय राजनीति और क्षेत्रीय विश्लेषण पर और अधिक विस्तृत अध्यायों की गुंजाइश थी, फिर भी ‘चौपाल से चंडीगढ़’ हरियाणा के लोकतांत्रिक इतिहास को समझने का एक गंभीर और प्रशंसनीय प्रयास है। यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शिका सिद्ध होगी। यदि आप हरियाणा की राजनीतिक यात्रा को करीब से जानना चाहते हैं, तो यह पठनीय पुस्तक आपके संग्रह का हिस्सा होनी चाहिए।