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MP Archaeological Survey: पुजारी के निजी संग्रह से मिला झांसी रियासत का बैज और दुर्लभ सामूहिक चित्र; इतिहासकार हैरान

दतिया: मध्य प्रदेश का इतिहास आज भी अपनी मिट्टी में कई अनसुलझे रहस्य समेटे हुए है। हाल ही में दतिया जिले में एक बुजुर्ग पुजारी के निजी संग्रह से दो ऐसी ऐतिहासिक वस्तुएं मिली हैं, जिसने पुरातत्व विशेषज्ञों और इतिहासकारों को दंग कर दिया है। ये साक्ष्य झांसी राज और ब्रिटिश शासनकाल के गौरवशाली अतीत पर नई रोशनी डालते हैं।

🖼️ 200 साल पुरानी दुर्लभ सामूहिक तस्वीर

पुजारी राधावल्लभ मिश्रा (75 वर्ष) के पास से एक अत्यंत दुर्लभ तस्वीर मिली है, जिसे ‘पूना फोटोग्राफिक कंपनी’ द्वारा तैयार किया गया था। यह करीब 150 से 200 वर्ष पुरानी है। तस्वीर में महारानी विक्टोरिया के साथ बड़ौदा, मैसूर, इंदौर, ग्वालियर, जयपुर, त्रावणकोर और नागपुर के महाराजाओं के साथ हैदराबाद के निजाम को दर्शाया गया है। यह तस्वीर देश की रियासतों के आपसी संबंधों का अनूठा प्रमाण है।

🎖️ 1840 का झांसी रियासत का आधिकारिक बैज

दूसरी महत्वपूर्ण खोज एक अंडाकार पीतल का बैज है, जिस पर ‘चपरास श्री महाराजाधिराज झांसी संवत 1896’ अंकित है। पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. वसीम खान के अनुसार, यह 1840 ईस्वी का है और रानी लक्ष्मीबाई के विवाह से पूर्व का समय है। यह बैज राजा गंगाधर राव के शासनकाल के प्रशासनिक तंत्र को समझने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।

📜 ‘ज्ञान भारतम मिशन’ की अनूठी पहल

पुरातत्व आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के माध्यम से आम नागरिक अपने घरों में रखी ऐतिहासिक वस्तुओं को विभाग के सामने ला रहे हैं। राधावल्लभ मिश्रा ने यह बैज 30 साल पहले एक बर्तन की दुकान से और तस्वीर 50 साल पहले एक फ्रेमिंग शॉप से खरीदी थी, जिसे उन्होंने सहेज कर रखा। यह मिशन भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।