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West Bengal Madrasa Survey: पश्चिम बंगाल में सभी मदरसों का होगा सर्वे; ममता सरकार ने जिलाधिकारियों को जारी किया सख्त निर्देश

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में संचालित होने वाले सभी मदरसा शिक्षण संस्थानों का पूरी तरह से अपडेटेड और प्रामाणिक डेटा जुटाने की एक बहुत बड़ी जमीनी पहल शुरू की है. सरकार के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग (Minority Affairs and Madrasah Education Department) ने 5 जून 2026 को इस संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधिकारिक निर्देश जारी किया है. इस नए निर्देश के तहत राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को कड़े आदेश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के अंतर्गत आने वाले सभी ब्लॉक (Block) और नगर निकाय (Municipality) स्तर पर विशेष टीमों का गठन कर सघन सर्वेक्षण करवाएं. सरकार का स्पष्ट रूप से कहना है कि यह प्रशासनिक कदम सिर्फ जमीनी जानकारी जुटाने, रिकॉर्ड को अपडेट करने और भौतिक सत्यापन (Verification) के लिए उठाया जा रहा है.

📋 मान्यता प्राप्त से लेकर अपंजीकृत (Unregistered) तक सब दायरे में: जिला मजिस्ट्रेटों को ब्लॉक स्तर पर संकलित डेटा तैयार करने के आदेश

आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने राज्य के सभी जिला मजिस्ट्रेटों को कड़े दिशा-निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी ढिलाई के ब्लॉक और नगरपालिका स्तर पर सघन सर्वे करवाकर जिले के भीतर संचालित हो रहे सभी छोटे-बड़े मदरसा संस्थानों की एक संकलित सूची तैयार करें. इस विशेष डेटाबेस में राज्य के मान्यता प्राप्त (Recognized), पंजीकृत (Registered), सरकारी सहायता प्राप्त (Aided), गैर-सहायता प्राप्त (Unaided), पूर्णतः अपंजीकृत (Unregistered), स्थानीय मुस्लिम समुदाय द्वारा संचालित और पूरी तरह से निजी (Private) मदरसे शामिल किए जाएंगे. इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल की भौगोलिक सीमा में वर्तमान में चल रहे मदरसों की वास्तविक, वित्तीय और अद्यतन (Updated) स्थिति का सटीक और वैज्ञानिक आकलन करना है.

📊 पाठ्यक्रम, छात्रों की संख्या और इंफ्रास्ट्रक्चर की होगी जांच: नीतिगत और कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी बनाने की तैयारी

इस व्यापक सर्वे के तहत प्रत्येक मदरसा संस्थान की बुनियादी भौतिक सुविधाओं (जैसे क्लासरूम, पेयजल, शौचालय), पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम (Syllabus), पढ़ रहे कुल छात्र-छात्राओं की सटीक संख्या, आंतरिक प्रशासनिक व प्रबंधकीय व्यवस्था, बाल कल्याण गतिविधियों (Child Welfare Activities) और अन्य प्रासंगिक कानूनी जानकारियों को एक निर्धारित फॉर्म में एकत्र किया जाएगा. पश्चिम बंगाल सरकार चाहती है कि राज्य में मदरसा आधुनिकरण और शिक्षा की मौजूदा स्थिति की एक बिल्कुल साफ और पारदर्शी तस्वीर शासन के सामने आए. सरकार का मानना है कि भविष्य में मदरसा शिक्षा के लिए नई और बेहतर नीतियां बनाते समय ये ठोस आंकड़े (Data) बहुत मददगार साबित होंगे, जिसके आधार पर शिक्षा और छात्रवृत्ति जैसी कल्याणकारी योजनाओं को अत्यधिक प्रभावी और सुगम बनाया जा सकेगा.

🛡️ ‘किसी भी संस्थान को बंद नहीं किया जाएगा’: सरकार ने स्पष्ट किया मकसद, सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां पहले की तरह रहेंगी जारी

इस निर्देश के बाद समुदाय और संस्थानों के भीतर उपजी आशंकाओं को दूर करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने पूरी तरह से साफ कर दिया है कि यह कदम केवल और केवल डेटा संग्रह और रिकॉर्ड के सत्यापन के लिए है. विभाग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट रूप से कहा है कि इस निर्देश या सर्वे के आधार पर फिलहाल राज्य के किसी भी संस्थान को बंद करने, उनके खिलाफ कोई सख्त कानूनी दंडात्मक कार्रवाई करने या वहां पढ़ रहे छात्रों को किसी दूसरे स्कूल में जबरन ट्रांसफर (स्थानांतरित) करने जैसी कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. राज्य के सभी चिन्हित मदरसे पहले की तरह ही बिना किसी डर या रुकावट के अपनी सामान्य और दैनिक शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह जारी रख सकेंगे, क्योंकि डेटा संग्रह का एकमात्र मकसद रिकॉर्ड को दुरुस्त करना है.

⏱️ 5 जुलाई 2026 तक राज्य सरकार को सौंपनी होगी फाइनल रिपोर्ट: जिला स्तर पर प्राप्त आंकड़ों का होगा उच्च-स्तरीय विश्लेषण

अल्पसंख्यक मामलों के विभाग ने समय-सीमा निर्धारित करते हुए सभी जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे सर्वे को तय समय में पूरा कर अपनी विस्तृत और संकलित फाइनल रिपोर्ट 5 जुलाई 2026 तक अनिवार्य रूप से राज्य सरकार के मुख्य सचिव को सौंप दें. ब्लॉक और नगरपालिका स्तर के नोडल अधिकारी रोजाना की जानकारी इकट्ठा कर उसे जिला स्तर पर संकलित (Compile) करेंगे. इसके बाद कोलकाता मुख्यालय में प्राप्त सभी डिजिटल और भौतिक आंकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण कर राज्य में मदरसा शिक्षा की स्थिति का एक व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा. माना जा रहा है कि यह डेटा बैंक सरकार को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के मदरसों की वास्तविक जरूरतों, आधुनिक संसाधनों की कमियों और वहां के छात्रों की समस्याओं को गहराई से समझने में बड़ी मदद करेगा.