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Patiala House Court News: UAPA मामले में आरोपी को बड़ी राहत; 4 साल 9 महीने बाद NIA अदालत ने दी जमानत

दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी माधेश शंकर उर्फ अब्दुल्ला को जमानत दे दी है। करीब 4 साल और 9 महीने तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद कोर्ट ने उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। आरोपी पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का आरोप था।

⏳ हिरासत और मुकदमे की धीमी रफ्तार

अदालत ने जमानत देते समय विशेष रूप से मुकदमे की धीमी गति को संज्ञान में लिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीतांबर दत्त ने कहा कि आरोपी 4 साल 9 महीने से अधिक समय से जेल में बंद है, जबकि अभियोजन पक्ष अब तक मात्र 61 गवाहों की ही परीक्षा पूरी कर पाया है। अभी भी लगभग 90 गवाहों की गवाही बाकी है, जिससे स्पष्ट है कि मुकदमे के जल्द समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी को राहत प्रदान की।

🚫 कोर्ट द्वारा लगाई गई सख्त शर्तें

जमानत मंजूर करते हुए कोर्ट ने माधेश शंकर पर कई कड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं:

  • पासपोर्ट जमा करना: उन्हें अपना पासपोर्ट कोर्ट में जमा करना होगा।

  • समान गतिविधियों पर रोक: वह किसी भी प्रकार की वैसी ही संदिग्ध गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते जिसके लिए उन पर मामला दर्ज है।

  • संपर्क पर पाबंदी: उन्हें ISIS या उससे संबंधित किसी भी व्यक्ति के साथ फोन या अन्य माध्यमों से संपर्क करने की सख्त मनाही है।

🛡️ बचाव पक्ष की दलीलें

आरोपी के वकील राहुल साहनी ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल लंबी अवधि तक जेल में रह चुके हैं और चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही आरोप भी तय हो चुके हैं। अतः जांच के प्रभावित होने का अब कोई भय नहीं है। सह-आरोपियों को मिली जमानत का हवाला देते हुए वकील ने कोर्ट से अपने मुवक्किल के लिए समान राहत की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

संपादकीय टिप्पणी: न्यायिक हिरासत में लंबी अवधि तक विचाराधीन कैदियों के लिए ‘समय पर ट्रायल’ एक मौलिक अधिकार है। क्या आपको लगता है कि आतंकवाद से संबंधित गंभीर मामलों में भी, यदि जांच एजेंसी ट्रायल पूरा करने में विफल रहती है, तो जमानत मिलना न्याय की प्रक्रिया में एक अनिवार्य सुधार है? अपने विचार नीचे साझा करें।