ब्रेकिंग
Delhi CM Tribute: मालवीय नगर अग्निकांड और साकेत हादसे के पीड़ितों को CM रेखा गुप्ता ने दी श्रद्धांजल... Ajmera Group Money Laundering Case: निवेशकों के लिए बड़ी राहत; कोर्ट ने 8.41 करोड़ की संपत्ति लौटाने ... DRDO Missile Test: भारत की बढ़ी मारक क्षमता; DRDO ने किया बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और एंटी-शिप मिसाइल ... Punjab BJP Strategy Meeting: दिल्ली में अमित शाह के साथ बीजेपी का बड़ा मंथन; विधानसभा चुनावों के लिए ... Begusarai Police Action: आबकारी सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले नकल गिरोह का पर्दाफाश; 38 वॉकी-टॉकी और ... Diesel Purchase Rules: डीजल खरीद पर सरकार की नई पाबंदी से नोएडा की सोसाइटियों में हड़कंप; बढ़ सकता है ... Saharanpur News: एटीएस और एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई; संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में युवक गिरफ्तार Katihar Bus Accident: बिहार के कटिहार में मजदूरों से भरी बस पलटी, 25 घायल; 15 की हालत गंभीर SRMS Bareilly Ragging Case: मेडिकल छात्र की आत्महत्या की कोशिश; सीनियर छात्रों और कॉलेज प्रशासन पर F... Greater Noida GST Office: मीटिंग में फटकार के बाद डिप्टी कमिश्नर की बिगड़ी तबीयत; विभागीय अधिकारियों ...

Road Struggle in Bijapur: बस्तर का कोत्तापल्ली गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं को मोहताज; ग्रामीणों ने सरकार से लगाई गुहार

बीजापुर जिले का कोत्तापल्ली गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से वंचित है। उसूर ब्लॉक की ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर के अंतर्गत आने वाला यह गांव आजादी के इतने वर्षों बाद भी पक्की सड़क का इंतजार कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि गांव के पास से ही राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है जो तेलंगाना को जोड़ता है, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए आज भी ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर कच्चे और पथरीले रास्तों से गुजरना पड़ता है।

⛈️ आवागमन में जान का जोखिम

गांव के लोगों को किसी भी शासकीय कार्य के लिए ब्लॉक मुख्यालय आवापल्ली तक पहुंचने के लिए 52 किलोमीटर का लंबा और कष्टदायक सफर तय करना पड़ता है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है जब स्थानीय नदी-नाले उफान पर होते हैं। उस समय ग्रामीणों का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह कट जाता है।

🗣️ प्रशासन की उदासीनता और ग्रामीणों का दर्द

ग्रामीण नागेश कुमार का कहना है कि न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव का हाल जानने आया और न ही जनप्रतिनिधियों ने समस्याओं पर ध्यान दिया। हालांकि, वर्ष 2017 में एक बार शिविर का आयोजन हुआ था, लेकिन उसके बाद से स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों का कहना है कि अब बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है, तो फिर विकास कार्यों में इतनी देरी क्यों हो रही है? गांव में आज भी बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं।

📍 अधूरी सड़क और ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने बताया कि उसूर से तेलंगाना के पुसगुप्फा तक सड़क बन चुकी है, लेकिन भीमाराम और रायपुरम के बीच करीब 20-25 किलोमीटर का मार्ग आज भी अधूरी है। यह सड़क ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि कोत्तापल्ली को जोड़ने वाली इस सड़क का निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि उन्हें भी विकास के समान अवसर और सुविधाएं मिल सकें।

संपादकीय टिप्पणी: बुनियादी सुविधाओं का अभाव किसी भी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। क्या आपको लगता है कि प्रशासन को बस्तर के ऐसे दूरदराज के गांवों के विकास के लिए ‘समयबद्ध कार्ययोजना’ (Time-bound Action Plan) लागू करनी चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।