Sambhal Bakrid News: संभल मंडी में मंदी की मार; 50 हजार का बकरा 30 हजार में भी नहीं बिक रहा, व्यापारी परेशान
संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में इस बार बकरीद के मौके पर बकरा मंडी में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। बाजार में अच्छी नस्ल और भारी-भरकम बकरे तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें खरीदने वाले ग्राहक नदारद हैं। आलम यह है कि 50 हजार की कीमत वाले बकरे अब 30 हजार रुपये में भी बेचने को तैयार हैं, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे, जिससे पशु व्यापारी भारी आर्थिक तंगी और निराशा के दौर से गुजर रहे हैं।
🐂 डिमांड और सप्लाई का असंतुलन
हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन इलाके में रामा टॉकीज के पास लगी मंडी में इस बार बड़े बकरों की भारी आवक है। व्यापारियों का मानना है कि इस बार दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में अच्छे दाम मिलने की उम्मीद में कई बड़े व्यापारी अपने बकरे बाहर की मंडियों में ले गए। स्थानीय मंडी में जो बकरे बचे हैं, उनकी कीमतें 25 से 50 हजार रुपये के बीच हैं, जबकि ग्राहक 15 से 20 हजार रुपये से ऊपर खर्च करने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं।
💸 ग्राहकों की पहुंच से बाहर दाम
सबसे महंगी मानी जाने वाली ‘अजमेरी नस्ल’ के बकरे, जिनकी बाजार में कीमत 50 हजार रुपये तक है, वे भी अब 30 से 35 हजार रुपये में बिकने को तैयार हैं, लेकिन खरीदार सिर्फ भाव पूछकर वापस लौट रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि बकरों को चारे और देखभाल में जो लागत आई है, अब उसे निकालना भी दूभर हो गया है।
📊 महंगाई का चौतरफा असर
बकरीद पर छाई इस मंदी के पीछे मुख्य कारण बढ़ती महंगाई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर सब्जियों, फलों और दैनिक उपभोग की अन्य वस्तुओं पर पड़ा है। आम जनता का बजट पहले से ही डगमगाया हुआ है, जिसका सीधा असर अब त्यौहारों की खरीदारी पर भी दिख रहा है। बढ़ती महंगाई के कारण न केवल लोगों की खरीद क्षमता कम हुई है, बल्कि पशु व्यापारियों को भी इस साल भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।