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Bhojshala Case: धार भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट; MP हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

धार/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और देशव्यापी रूप से चर्चित ‘भोजशाला’ (Bhojshala) मामले में एक नया और बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) की इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए हालिया फैसले को देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में चुनौती दे दी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों अपने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि राज्य के धार जिले में स्थित यह संपूर्ण विवादित भोजशाला परिसर मूल रूप से ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित एक पवित्र मंदिर है। हाई कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ अब दिल्ली की शीर्ष अदालत में अपील की गई है।

🕌 कमाल मौला मस्जिद बनाम वाग्देवी मंदिर का पुराना विवाद: एएसआई (ASI) के संरक्षण वाले परिसर पर काजी मोइनुद्दीन ने दायर की अपील

ऐतिहासिक और धार्मिक तौर पर देखा जाए तो, देश का हिंदू समुदाय भोजशाला परिसर को प्राचीन काल से ही देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) का पवित्र मंदिर मानता है, जबकि इसके उलट मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहकर पुकारता है। धार जिले के मध्य में स्थित यह प्राचीन और बेहद संवेदनशील परिसर वर्तमान में पूरी तरह से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के कड़े संरक्षण और देखरेख में है। इस विवादित स्थल को लेकर मस्जिद के कार्यवाहक काजी मोइनुद्दीन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई है, जिसमें मुख्य रूप से हाई कोर्ट द्वारा बीते 15 मई को जारी किए गए अंतिम आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की गुहार लगाई गई है।

📜 हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था साल 2003 का पुराना आदेश: शुक्रवार को होने वाली नमाज की अनुमति को किया था पूरी तरह समाप्त

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की बेंच ने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था कि पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर विवादित भोजशाला परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक ऐतिहासिक मंदिर ही है। इसके साथ ही अदालत ने कहा था कि केंद्र सरकार और एएसआई (ASI) इसके भविष्य के संपूर्ण प्रशासन और सुदृढ़ प्रबंधन पर कोई भी उचित कानूनी फैसला लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसके अलावा, हाई कोर्ट ने एएसआई के 7 अप्रैल, 2003 के उस पुराने और स्थापित प्रशासनिक आदेश को भी पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार को भोजशाला परिसर के अंदर जाकर नमाज अदा करने की विशेष अनुमति दी गई थी।

🗺️ “मस्जिद के लिए अलग जमीन दे सकती है मध्य प्रदेश सरकार”: हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को सरकार से संपर्क करने की दी थी सलाह

इस बेहद संवेदनशील धार्मिक और कानूनी मामले की गहन सुनवाई कर रही हाई कोर्ट की युगलपीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले की व्याख्या करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की थी कि यदि मुस्लिम समुदाय अपनी धार्मिक गतिविधियों के लिए नई मस्जिद का निर्माण करना चाहता है, तो वह धार जिले में ही किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर अलग से सरकारी जमीन आवंटित कराने के लिए सीधे मध्य प्रदेश सरकार (मप्र शासन) से औपचारिक संपर्क कर सकता है। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद जहां धार में भारी प्रशासनिक हलचल और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी, वहीं अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद पूरे देश की नजरें देश की सबसे बड़ी अदालत के अगले कदम और रुख पर टिक गई हैं।