ब्रेकिंग
HSSC Group D Portal Error: ग्रुप-डी आवेदन प्रक्रिया में सर्वर डाउन और अपलोडिंग की समस्या; जानें कैसे... Rewari Hospital Sealed: रेवाड़ी के बिमला देवी चैरिटेबल अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन; दस्त... Love Jihad Case Sonipat: सोनीपत में पहचान छिपाकर युवती से निकाह का मामला; SIT गठित, आरोपी सलमान गिरफ... Greater Noida News: अल्फा वन कॉमर्शियल बेल्ट में डांसर डिंपल चौधरी का विवाद; सोशल मीडिया पर ट्रोल हो... International Yoga Day: बहादुरगढ़ में तैराकों का अनूठा योग सत्र; स्विमिंग पूल के अंदर पानी में किया ... BJP Haryana News: कुरुक्षेत्र में भाजपा का बड़ा सांगठनिक फेरबदल; रमेश सैनी बने कार्यकारी जिलाध्यक्ष Sohna Accident: सोहना में नहर के पुल पर हादसा; बाइक सवार परिवार नहर में गिरा, 8 वर्षीय बच्चे की डूबन... CM Nayab Saini on Farmers: किसान कल्याण सरकार की प्राथमिकता; हरियाणा में अब तक 7881 करोड़ से अधिक का ... MP Government Temple Policy: मंदिरों के दान प्रबंधन के लिए एमपी सरकार गठित करेगी विशेषज्ञ समिति; जान... Ratlam Triple Murder Case: राजीव नगर हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला; 3 दोषियों को हुआ आजीवन कारावा...

High Court Decision: रिश्वतखोरी मामले में FCI कर्मचारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति बरकरार, हाईकोर्ट का दखल से इनकार

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रिश्वतखोरी के एक मामले में पर्यवेक्षण संबंधी चूक के आरोपी भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) के एक कर्मचारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। जस्टिस संदीप मौदगिल ने ओम प्रकाश द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि सजा में तभी हस्तक्षेप किया जा सकता है, जब वह कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दे। ओम प्रकाश एफ. सी. आई. में तकनीकी सहायक थे और उन्होंने 20 अक्तूबर, 2023 के उस समीक्षा आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया था।

🔍 जांच प्रक्रिया पर मुहर: अदालत ने प्रक्रियात्मक अनुचितता की दलील नकारी

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुशासनात्मक मामलों में हस्तक्षेप केवल तभी उचित है जब परिणाम विकृत हों, बिना किसी साक्ष्य के आधारित हों या जहां निर्णय लेने की प्रक्रिया अवैध हो। याचिकाकर्त्ता द्वारा उठाया गया यह तर्क कि उससे कोई बरामदगी नहीं की गई या जांच के दौरान पेश किए गए साक्ष्य अपर्याप्त थे, हाईकोर्ट द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता था। अदालत ने उल्लेख किया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन की दलील भी निराधार थी, क्योंकि जांच की कार्रवाई में किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक अनुचितता नहीं पाई गई।

🍚 चावल की खेप और रिश्वत का खेल: सतर्कता ब्यूरो की कार्रवाई का मामला

हाईकोर्ट को बताया गया कि पंजाब में तैनाती के दौरान, सिकंदरजीत सिंह ने 21 मई, 2021 को सतर्कता ब्यूरो के समक्ष एक शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता सहित कुछ अधिकारियों ने चावल की खेप स्वीकार कराने के बदले में रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के आधार पर एक जाल बिछाया गया, जिसमें कथित तौर पर 58,000 रुपए की राशि प्राप्त हुई। हालांकि, यह राशि परमजीत शर्मा नामक एक निजी व्यक्ति से बरामद की गई थी, जिसके बाद एफ.आई.आर. दर्ज की गई और याचिकाकर्ता को निलंबित कर दिया गया था।

🛡️ कर्तव्य की उपेक्षा पर सख्त टिप्पणी: संवेदनशील क्षेत्र में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह दुराचार खाद्यान्न खेप स्वीकार करने से जुड़े एक संवेदनशील क्षेत्र में कर्तव्य की उपेक्षा से संबंधित है। ऐसी परिस्थितियों में अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड इतना अनुचित नहीं कहा जा सकता कि इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। याचिकाकर्त्ता सेवा की निरंतरता और बकाया सहित सभी लाभों के साथ फिर से नियुक्ति की मांग कर रहा था, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए विभाग की सजा को बरकरार रखा।

🚫 भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: न्यायपालिका का स्पष्ट संदेश

इस फैसले से यह साफ हो गया है कि सरकारी सेवाओं, विशेषकर खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति न्यायपालिका का रुख बेहद सख्त है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक विभाग की जांच प्रक्रिया में कोई बड़ी कानूनी चूक न हो, तब तक सजा की मात्रा तय करना विभाग का विशेषाधिकार है। कर्मचारी के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई को उचित ठहराते हुए हाईकोर्ट ने कानून व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन को प्राथमिकता दी है।