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Bhopal News: भोपाल में सजी अनोखी महफिल, एक मंच पर आए न्यायपालिका और साहित्यकार; DSP की किताब का विमोचन

भोपाल: राजधानी भोपाल में एक अनोखी महफिल में अलग-अलग दिशाओं के धुरंधर जुटे. जिसमें पुलिस की जमी से साहित्य की मखमली आवाज उभरी. मौका था पुलिस विभाग के एक अधिकारी कि पुस्तक विमोचन का. इस विमोचन में अंतर्राष्ट्रीय मुशायरे से शाम गुलजार हो गयी. कार्यक्रम में देश दुनिया के नामवर शायर मेहमान बनाए गए थे. कार्यक्रम कि शुरुआत से खुशनुमा हुए मौसम में जब यह महफिल परवान चढ़ी तो रात की गहराई तक अपनी नई इबारत लिखती गईं.

दुष्यंत संग्रहालय में जमी महफिल
भोपाल का दुष्यंत संग्रहालय उस समय महक उठा जब अंतरराष्ट्रीय शायर और साहित्यकार एक मंच पर दिखाई दिए. उस नजारे की कल्पना कीजिए जब एक ही मंच पर सियासत, न्यायपालिका, पुलिस, प्रेस, साहित्यिक जन और हॉल में समाने जैसे साहित्य प्रेमी मौजूद हों. कुछ विलक्षण तो होना ही था. महफ़िल सजाई थी पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने. शाम की शुरुआत से खुशनुमा हुए मौसम में जब यह महफिल परवान चढ़ी तो रात की गहराई तक अपनी नई इबारत लिखती गई.

DSP की पुस्तक का लॉन्च
आमतौर पर कर्कश, निष्ठुर और अपने अलग अंदाज के लिए जानी जाने वाले पुलिस विभाग में एक नर्म हृदय और साहित्य का मखमली मर्म रखने वाले डीएसपी विजय सिंह भदौरिया ने यह महफिल सजाई थी. ग्वालियर चंबल के गर्म मिजाज इलाके से भोपाल जैसी सरजमी पर सजाई जाने वाली इस महफिल का मौजू था उनकी साहित्य साधना का उत्सव. विजय सिंह भदौरिया की पुस्तक ‘एक सौ सोलह चांद की रातें’ के विमोचन के लिए यह आयोजन किया गया था.

इस महफ़िल में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, जस्टिस शमीम अहमद, मशहूर शायर मंजर और आईजी इरशाद वली इसमें शामिल हुए. दुष्यंत संग्रहालय के इस हॉल में जमा हुए लोग न सियासत के पैरोकार नजर आ रहे थे, न फैसलों की तल्ख तलवार कहीं दिखाई दे रही थी और न ही कहीं पुलिसिया अंदाज कहीं दिखाई दे रहा था. नजारा था तो सिर्फ एक सौ सोलह चांद की रातें… के आसपास घूमता मंजर और देश दुनिया के बड़े शायरों को सुनने का जुनून.

महफिल में शायरों ने बांधा समा
डॉ. महताब आलम और अबरार काशिफ ने बारी बारी से संचालन सूत्र संभालकर महफिल को रोचक और देर रात तक रुके रहने लायक बनाया. लोगों ने जहां शायर मंजर भोपाली के अलग गीतों का आनंद उठाया, वहीं शकील आजमी और हिमांशी बाबरा शेफाली पांडे जैसे कवि और शायरों को भी सुनने का सुकून हासिल किया. दर्जन भर नए और पुराने शायरों में अहमद निसार, तनवीर गाजी, शबाना शबनम, सूफिया काजी, शाहनवाज असीमी, अभिषेक स्वामी, रोशन मनीष, असगर इंदौरी भी अपने गीत, गजलों, नज्मों का जादू बिखेरने में कामयाब साबित हुए.