ब्रेकिंग
Damoh News: बीच सड़क पर ट्रैक्टर खड़ा कर भागा ड्राइवर; अंधेरे में ट्रॉली से टकराया बाइक सवार, पेट के... Morena News: मुरैना SP के ट्रांसफर के बाद मची अफरातफरी; कार और झोले में भरकर बंगले पहुँचाई जा रही फा... Barwani Weather Update: बड़वानी में बदला मौसम का मिजाज; तेज हवा के साथ बारिश, वेयर हाउस के बाहर रखा ... MP News: मुरैना में शिक्षा के मंदिर में अवैध शराब का धंधा; ASP नेता के स्कूल में छापेमारी, भारी मात्... Narsinghpur Accident: नरसिंहपुर में मजदूरों पर गिरा भारी-भरकम DDS टैंक; दो की दर्दनाक मौत, फैक्ट्री ... शिवपुरी न्यूज़: 'न भगवान रहेंगे, न कसम खानी पड़ेगी', बार-बार की कसमों से तंग युवक ने कुएं में फेंकी ... Ujjain Mahakal Mandir: महाकाल मंदिर के बेहतर प्रबंधन के लिए बनेंगे 5 नए न्यास; प्रबंध समिति की बैठक ... Lokayukta Raid: 80 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए तीन बाबू; लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई से मचा ह... Relationship Murdered: रिश्ते हुए शर्मसार! फूफा ने भतीजी के साथ किया गलत काम; 5 माह की गर्भवती हुई म... MP Cabinet Meeting Today: एमपी कैबिनेट की बड़ी बैठक आज; किसानों को बोनस देने की तैयारी, इन प्रस्तावो...

Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर पढ़ें भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और मोक्ष की कथा; घर में आएगी सुख-समृद्धि

Gautam Buddha Teachings: देशभर में आज बैशाख के साथ-साथ बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है. . ये बेहद पवित्र और आध्यात्मिक पर्व में से एक है. यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का गवाह है इसलिए यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि मानवता को सही मार्ग दिखाने वाला दिवस भी कहा जाता है. यह महात्मा बुद्ध की 2588वीं जयंती है. माना जाता है कि इस दिन जो भी श्रद्धालु भगवान बुद्ध की विधिपूर्वक पूजा करता है और कथा पढ़ता है उसे जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. यही नहीं, तमाम कष्ट कट जाते हैं.

द्रिक पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ 30 अप्रैल को शाम 09:12 बजे शुरू हुई है तिथि आज शाम 10:52 बजे समाप्त होगी. इस दौरान देशभर में भगवान बुद्ध की जयंती को मनाया जा रहा है.

बुद्ध पूर्णिमा कथा

बहुत समय पहले कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन और रानी माया देवी के घर एक पुत्र का जन्म हुआ. ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि यह बालक या तो महान राजा बनेगा या एक महान संत. राजा ने उसे संसार के दुखों से दूर रखने की पूरी कोशिश की, लेकिन एक दिन सिद्धार्थ ने बाहर निकलकर चार दृश्य देखे, जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति, एक बीमार व्यक्ति, एक मृत शरीर और एक सन्यासी है. इन दृश्यों ने उनके मन को झकझोर दिया. उन्होंने समझ लिया कि जीवन में दुख अनिवार्य है. तब उन्होंने राजमहल छोड़कर सत्य की खोज शुरू की. कई वर्षों की कठोर तपस्या के बाद, बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई. उसी क्षण वे गौतम बुद्ध बन गए. उन्होंने दुनिया को चार आर्य सत्य और अष्टांग मार्ग का उपदेश दिया, जो आज भी जीवन को सरल और शांत बनाने का मार्ग दिखाते हैं.