बलरामपुर: रामानुजगंज की जीवनदायिनी कन्हर नदी अप्रैल महीने के अंत से पहले पूरी तरह सूखते ही मछुआरों की चांदी हो गई है. आसपास के गांव के मछुआरे बड़ी संख्या में नदी में पहुंच रहे हैं.
कन्हर नदी में पानी कम होने के बाद मछुआरों की बढ़ी भीड़
अप्रैल महीने में भीषण गर्मी शुरू होते ही कन्हर नदी सूख चुकी है. नदी का प्रवाह अब थमने की कगार पर है, लेकिन इस आपदा में भी मछुआरा समुदाय के लोग अवसर ढूंढने लगे हैं. यहां सुबह से लेकर देर शाम तक मछुआरे अपने पूरे परिवार के साथ मछली पकड़ने के लिए नदी में पहुंच रहे हैं, जिससे नदी में चहलपहल भी बढ़ गई है.
दो दिनों से नदी में मछली पकड़ने के लिए आ रहे हैं. महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं-मछुआरा
जाल की मदद से मछली पकड़ रहे हैं. काफी मछलियां मिल रही है- मछुआरा
गर्मी में पेयजल सप्लाई कठिन चुनौती
जीवनदायिनी कन्हर नदी का पानी अब सूखने की वजह से गर्मी के मौसम में अगले दो महीने मई और जून में पेयजल की समस्या एक गंभीर चुनौती है. नगरपालिका का कहना है कि शहर की बीस हजार की आबादी के लिए जलसंकट की समस्या से निपटने के लिए नदी में डबरी खुदाई कर लोगों के घरों में पेयजल सप्लाई किया जा रहा है.
बेजुबानों की प्यास कैसे बुझेगी?
तपती गर्मी में पशु पक्षी और मवेशी भी अपनी प्यास बुझाने के लिए नदी का रूख करते हैं, लेकिन अब नदी में पानी सूखने की वजह से बेजुबान पशु पक्षियों के लिए कंठ बुझाना भी मुश्किल हो गया है.
कन्हर नदी
कन्हर नदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के खुड़िया पठार से होता है. बलरामपुर रामानुजगंज से होते हुए यह छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर प्रवाहित होती है. छत्तीसगढ़ के साथ ही झारखंड के गढ़वा जिले के सैकड़ों गांवों को भी कन्हर नदी से दैनिक उपयोग, पेयजल, सिंचाई और निस्तारी के लिए पानी मिलता है. आगे जाकर यह उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सोन नदी में मिल जाती है. अपने प्रवाह क्षेत्र में सैकड़ों छोटी नदियां और नाले भी कन्हर नदी में मिल जाते हैं.