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शादी, सुहागरात और फिर खौफनाक अंत! 15 दिन बाद ही दूल्हे ने दिखाया असली रंग, दूसरी शादी के लिए पत्नी को उतारा मौत के घाट

वो मेरी जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दखल देने लगी थी. मेरे घर वाले समाज की दुहाई देकर मेरी दूसरी शादी कराना चाहते थे. मैं उसे मारना नहीं चाहता था, लेकिन हालात ऐसे बने कि गला घोंट दिया… यह पत्थर दिल कर देने वाला कबूलनामा उस शख्स का है, जिसने अपनी मौसेरी बहन से प्यार किया, भागकर शादी की और फिर उसे ही मार डाला. बिहार के छपरा जिले से सामने आई यह वारदात किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है, जहां 13 साल पुराने प्रेम संबंध का अंत एक बोरी में बंद लाश के रूप में हुआ.

आरोपी दीपक और मृतका आराध्या का रिश्ता बचपन से शुरू हुआ था. दोनों का ननिहाल एक ही गांव में था, जहां छुट्टियों में मिलते-मिलते दोस्ती प्यार में बदल गई. दीपक एक डिप्लोमा इंजीनियर है और पटना में नौकरी करता था, वहीं आराध्या छपरा के एक स्कूल में शिक्षिका थी.

साल 2022 में जब आराध्या के परिजनों ने उसकी शादी कहीं और तय की, तो उसने बगावत कर दी. उसने साफ कह दिया कि वो दीपक से प्यार करती है. लोक-लाज के डर से परिवार ने विरोध किया, तो आराध्या घर छोड़कर छपरा में किराए के मकान में रहने लगी. यहां दीपक अक्सर उससे मिलने आता था और दोनों करीब 3 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे.

13 मार्च को मंदिर में रचाई गुप्त शादी

दीपक पर जब उसके घर वालों ने दूसरी जगह शादी करने का दबाव बनाया, तो आराध्या ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की. करीब एक महीने के टालमटोल के बाद, दीपक ने 13 मार्च को छपरा के एक मंदिर में आराध्या से गुप्त रूप से शादी कर ली. इस शादी में दीपक के केवल दो भरोसेमंद दोस्त शामिल हुए थे. उसे लगा कि शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा, लेकिन असली विवाद यहीं से शुरू हुआ.

दो नावों पर सवार था दीपक

शादी के महज 15 दिन बाद ही दीपक का दोहरा चेहरा सामने आया. एक तरफ वह आराध्या के साथ पति का फर्ज निभा रहा था, तो दूसरी तरफ अपने पिता की पसंद की लड़की से सीवान में दूसरी शादी करने की तैयारी कर रहा था. जब आराध्या को दीपक के इस धोखे की भनक लगी, तो उसने विरोध शुरू कर दिया. दीपक के अनुसार, आराध्या उस पर नजर रखने लगी थी और बार-बार फोन कर उसकी लोकेशन पूछती थी, जो उसे ‘दखलअंदाजी’ लगने लगी.

हत्या की पहली कोशिश: ‘ऑपरेशन एक्सीडेंट’

दीपक ने स्वीकार किया कि उसने 1 अप्रैल से ही आराध्या को रास्ते से हटाने की साजिश शुरू कर दी थी। उसका पहला प्लान उसे हादसे में मारने का था. वह आराध्या को हाजीपुर के पास रेलवे ट्रैक पर ले जाकर ट्रेन के आगे धकेलना चाहता था ताकि यह आत्महत्या या दुर्घटना लगे. उसने आराध्या को घूमने के बहाने बुलाया, लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से वह नहीं गई, जिससे वह पहली बार बच गई.

12 अप्रैल: मौत की दावत और खौफनाक रात

दीपक ने हार नहीं मानी. 12 अप्रैल की सुबह वह आराध्या को अपने गांव भगवानपुर हाट (साहसा गांव) ले गया. वहां दीपक के परिवार वालों ने आराध्या को अपनाने से मना कर दिया और समाज का हवाला देकर उसे चले जाने को कहा. दिन भर चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद आराध्या बिना खाए सो गई.