Akshaya Tritiya 2026: वृंदावन की तर्ज पर बीना में भी हुए बांकेबिहारी के ‘चरण दर्शन’, साल में सिर्फ एक बार मिलता है यह सौभाग्य
बीना : वृंदावन की तरह बीना में भी बांकेबिहारी मंदिर में साल में एक बार ठाकुर जी के चरण दर्शन भक्तों को कराए जाते हैं, जिसे काफी शुभ माना जाता है. अक्षय तृतीया पर सुबह 5 बजे से ही भक्तों की भीड़ लगना शुरू हो गई. मंदिर के पुजारी राहुल महाराज ने बताया “अक्षय तृतीया पर देव श्री बड़केश्वर बिहारी जी मंदिर पर ठाकुर जी के चरण दर्शन के लिए दिनभर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.”
सुबह 5 बजे निकली प्रभात फेरी
सुबह 5 बजे राधे-राधे प्रभात फेरी मंडल मां जागेश्वरी धाम से बांकेबिहारी जी के लिए पाजेब लेकर देव श्री बड़केश्वर बिहारी जी मंदिर सुबह चरण दर्शन के लिए पधारे. इस दौरान संकीर्तन कार्यक्रम, आरती और प्रसाद का वितरण भी किया गया. पूरे दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किए जाएंगे. वृंदावन धाम में बांकेबिहारी जू के चरण दर्शन साल में केवल एक बार अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर होते हैं. ठीक इसी तर्ज पर बीना में भी चरण दर्शन करने की परंपरा है.
पूरे साल पोशाक में ढंके रहते हैं चरण
भक्त रमन दीक्षित ने बताया “पूरे वर्ष चरण पोशाक वस्त्र में छिपी रहती है, केवल अक्षय तृतीया के दिन ही उनके दिव्य चरणों के दर्शन होते हैं. ऐसी मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी ने भगवान को भीषण गर्मी से बचने के लिए चंदन का लेप किया था और यह तभी से परंपरा चली आ रही है. अक्षय तृतीया को बांकेबिहारी जी के चरण दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है.”
इस दिन भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. जिस तरह वृंदावन में बांके बिहारी जी को भोग लगाया जाता है, वैसे ही यहां भी मंदिर में भोग तैयार होता है और ठाकुर जी को अर्पित किया जाता है. वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर की तरह सभी क्रियाएं बीना के मंदिर में होती हैं.
मंदिर की जगह कभी कचरे का ढेर था
शहर के प्रताप वार्ड के खारे कुआं के पास जिस जगह पर देव श्री बड़केश्वर बिहारी जी का मंदिर बना हुआ है. वहां 3 साल पहले कचरे का ढेर लगा रहता था. रमन दीक्षित, भुवनेंद्र राय ने बताया “कुछ सालों पहले वार्ड के लोगों की इच्छा हुई कि यहां पर बरगद के पेड़ के नीचे बड़केश्वर शिवलिंग की स्थापना की जाए. सभी लोगों की सहमति से बड़केश्वर शिवलिंग की स्थापना की गई. इसके बाद समिति के सदस्यों ने बड़केश्वर बांकेबिहारी जी की विधिविधान से प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई. धीरे-धीरे मंदिर विकसित होता गया और मंदिर में शिवलिंग के अलावा शिव परिवार मौजूद है.”