तेलंगाना से खदेड़े गए, बस्तर में ‘राज’ किया! आखिर कैसे छत्तीसगढ़ का ये जिला बन गया माओवादियों का हेडक्वार्टर? इनसाइड स्टोरी
इसकी पृष्ठभूमि 1969 के आस-पास बननी शुरू हुई, जब बस्तर के गांवों में “जमीन आपकी, जंगल आपका फिर हक किसका?” जैसे सवाल उठने लगे। भोपालपटनम क्षेत्र में डाक्टर आइएस मूर्ति जैसे लोग इलाज के साथ-साथ अधिकारों की बात भी गांव-गांव तक पहुंचा रहे थे। उनकी गिरफ्तारी बस्तर में दर्ज पहली महत्वपूर्ण घटना थी।
कोंडापल्ली के नेतृत्व में बस्तर में विस्तार का शुरू हुआ काम
जनताना सरकार से जनयुद्ध का केंद्र बना बस्तर
1980 के दशक की शुरुआत में रणनीति दो स्तरों पर लागू हुई