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Maihar Cement Factory Ultimatum: 1 मई की तारीख तय! विधायक अभय मिश्रा ने फैक्ट्री प्रबंधन को ललकारा; स्थानीय रोजगार पर छिड़ी बड़ी जंग

रीवा: सेमरिया विधानसभा से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा एक सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन को अल्टीमेटम देकर सुर्खियों में हैं. जन समस्याओं के साथ सीमेंट फैक्ट्री से निकाले गए मजदूरों के समर्थन में विधायक अभय मिश्रा ने फैक्ट्री के सामने धरना प्रदर्शन किया और फैक्ट्री प्रबंधन को खुले मंच से साफ तौर पर चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि, ”अगर मजदूरों की मांगे जल्द पूरी नहीं हुई तो 1 अप्रैल को कुछ ऐसा होगा जिसे पूरा भारत देखेगा. प्रबंधन के पास 31 मार्च तक का समय है. अगर सभी मांगे नहीं मानी गईं या वादा नहीं किया तो 1 मई को फैक्ट्री बंद कर देंगे.”

सीमेंट फैक्ट्री पर 16 मजदूरों को निकाले जाने का आरोप

सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के मधेपुर में स्थित सीमेंट फैक्ट्री से निकाले जाने का आरोप लगाते हुए कई मजदूर पिछले कई दिनों से आंदोलन की राह पर है. 16 मजदूरों पर कथित आरोप लगाते हुए कहीं और ट्रांसफर करने का निर्णय लेते हुए फैक्ट्री प्रबंधन के द्वारा बाहर का रास्ता दिखाया गया था. इसके बाद पिछले 20 दिन पूर्व निकाले गए 16 मजदूरों के साथ उनके समर्थन में अन्य मजदूरों ने फैक्ट्री के पास धरना दे दिया.

फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों को प्रताड़ित करने का आरोप

फैक्ट्री के बाहर मजदूरों के समर्थन में बैठे मजदूर संघ के नेता अरुण तिवारी का कहना था कि, ”फैक्ट्री में मजदूरों से 20 से 22 घंटे तक लोडिंग और अनलोडिंग का कार्य करवाया जाता था. 11 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 10 महीनों से लगातर जिला प्रशासन और सेन्ट्रल लेवर कमीशन से बातचीत की जा रही थी कि श्रम कानून का पालन हो. 8 घंटे की शिफ्ट लगाई जाए और न्यूनतम वेतन दिया जाए. देर रात फोन करके मजदूरों को ड्यूटी के लिए घरों से न बुलाया जाए. मांग पत्र में चर्चा सहायक श्रम आयुक्त जबलपुर में चल रही थी. मगर 10 पेशी में फैक्ट्री प्रबंधन की तरफ से कोई भी व्यक्ति नहीं गया.”

बाहर के मजदूरों को बुलाकर, 30 साल पुराने मजदूरों को हटाया

इसके बाद मजदूरो नें लोडिंग अपलोडिंग का कार्य थोड़ा धीमा कर दिया. विगत 18 फरवरी को सहायक समायुक्त कार्यालय जबलपुर में फैक्ट्री प्रबंधक और ठेकेदार गए इसके बाद कैंसिलेशन वार्ता हुई वहां पर यह तय हुआ की रात 12 बजे किसी भी मजजूर को ड्यूटी में नहीं लाया जाएगा. अगर रैक रात 12 बजे आती है तो मजदूरों को 10 बजे बुलाया जाये और अगर सुबह 4 बजे आती है तो सुबह 5 बजे बुलाया जाए. इस पर सहमति बनी, जिसपर प्रबंधक की ओर से ठेकेदार ने भी दस्तखत किए और लोगों ने भी दस्तखत कर दिए. लेकिन बीते 2 मार्च को प्रबंधन ने बाहर से मजदूरों को बुलाकर ड्यूटी में लगा दिए और जो मजदूर पिछले 20 और 30 सालों से काम कर रहे थे उन्हें बाहर निकाल दिया.

धरने पर बैठे मजदूरों को मिला विधायक का समर्थन

इस पूरे मामले को लेकर आक्रोशित मजदूर फैक्ट्री के सामने धरने पर बैठ गए. पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे मजदूरों को समर्थन देने बुधवार को सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा भी पहुंच गए और सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया. विधायक अभय मिश्रा ने कहा कि, ”फैक्ट्री प्रबंधन को चेतावनी देने के लिए आज हम सब यहां पर आए हैं. हमनें सभी बातों को समझा है. मैं चाहता हूं कि, यहां पर फैक्ट्री रहे. इसके आलावा अन्य और भी फैक्ट्रियां यहां पर संचालित हों, लेकिन नियम और कानून के साथ संचालित हों. स्थानीय लोग और मजदूरों के साथ अत्याचार न हों.”

‘1 मई को कुछ ऐसा करेंगे की देखेगा पूरा भारत’

विधायक अभय मिश्रा ने आगे कहा कि, ”नई फैक्ट्रियों के आने से हमें कोई फायदा नहीं होने वाला है. बल्कि इस व्यवस्था से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा. 1 मई के लिए मैंने घोषणा कर दी है इस तारीख को मजदूर दिवस है. इससे पहले हमारी तैयारियां शुरू हो जाएंगी. अगर यह ठीक हो गए तो अच्छा है अगर ऐसा नहीं हुआ तो मेरी कोई ऐसी जिद नहीं हैं. इससे पहले अगर फैक्ट्री प्रबंधन ने हमारी मांगे नहीं मानी या फिर मांगे पूरी करने का वादा नहीं किया तो 1 मई को हम वो करेंगे जिसे पूरा भारत देखेगा.”

15 अप्रैल से पद यात्रा, फैक्ट्री में लगाएंगे ताला

धरना स्थल पर बैठे विधायक अभय मिश्रा ने सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़ी चेतावनी भी दी है. उन्होंने कहा कि, ”अगर 31 मार्च तक सब कुछ ठीक नहीं हुआ तो 15 अप्रैल से पद यात्रा शुरू करेंगे और 1 मई को मजदूर दिवस के दिन फैक्ट्री बंद कर देंगे. मैं प्रबंधन से कहना चाहता हूं कि सभी 8 सूत्रीय मांगे मान कर मजदूरों को जल्द काम पर वापस बुला लिया जाए. 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच में सभी चीजें ठीक कर लो, तुम लोगों के पास समय है. हम चाहते है कि, तुम्हारी फैक्ट्री हमारे यहां रहे.”

क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर बोले अभय मिश्रा

अभय मिश्रा ने कहा कि, ”मजदूरों की साधारण सी मांगे हैं. प्रबंधन द्वारा मजदूर यूनियन को अलग अलग तोड़ते हैं. उन्हें प्रताड़ित करते हैं, उनसे ओवर टाइम कार्य कराया जाता है. मगर ओवर टाइम का पैसा नहीं दिया जाता. आधी रात मजदूरों को बुलाकर उनसे काम कराया जाता है. जो भी मजदूर आवाज उठाते हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, ताकि यूनियन न बनने पाए. यहां बड़ी बड़ी खदाने खुली पड़ी हैं, लोग उसमें गिरकर मर रहे हैं. उन जमीनों को न तो किसान बेंच सकता है न ही बैंक उसे कर्ज दे रहा है. न ही किसी को रोजगार दिया जा रहा है. प्रदूषण के चलते क्षेत्र के हालत भी बद से बदतर हैं.”