ब्रेकिंग
Operation Sankalp to Urja Suraksha: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारतीय नौसेना का सबसे खतरनाक और बड़ा रेस... Delhi Terror Plot: पाकिस्तान से रची जा रही दिल्ली दहलाने की साजिश; ISI समर्थित TTH मॉड्यूल के 8 आतंक... Manipur Encounter: भारतीय सेना और असम राइफल्स की बड़ी कार्रवाई; चुराचांदपुर में UKNA उग्रवादी ढेर India-USA Relations: गृह मंत्री अमित शाह और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की बैठक; आतंकवाद और ड्रग्स तस... NEET Paper Leak News: 'पेपर लीक रोकने के उपाय या कॉमेडी सर्कस?' नीट विवाद पर केजरीवाल का केंद्र सरका... Doctor Kills Domestic Help: दिल्ली के पॉश इलाके में सनसनी; डॉक्टर के घर काम करने वाली महिला की हत्या... Shiv Sena UBT Crisis: उद्धव ठाकरे की बैठक से 6 सांसद नदारद; क्या टूटने वाली है शिवसेना UBT? जानें का... Bihar Heli Tourism: पटना से अब राजगीर, कैमूर और वाल्मीकिनगर तक होगी हवाई यात्रा; जानें किराया और पर्... Ranchi Police Encounter: आरएसएस कार्यालय हमला केस का मुख्य आरोपी घायल; हथियार छीनकर भागने की कोशिश म... MP Archaeological Survey: पुजारी के निजी संग्रह से मिला झांसी रियासत का बैज और दुर्लभ सामूहिक चित्र;...

आम जनता को बड़ी राहत! मिडल ईस्ट में युद्ध के बीच भी नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम; सरकार ने बनाया यह ‘मास्टर प्लान

पब्लिक सेक्टर पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) फ्यूल की रिटेल कीमतों में वृद्धि नहीं करने की वजह से उन्हें हो रहे घाटे को कम करने के लिए रिफाइनरीज को पेट्रोल और डीजल की इंपोर्टेड रेट्स से कम कीमत देने पर विचार कर रही हैं. इस कदम से एमआरपीएल, सीपीसीएल और एचएमएल जैसी सिंगल रिफाइनरी कंपनियों पर बुरा असर पड़ सकता है. पश्चिम एशिया संकट से पहले इंटरनेशनल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं. हालांकि, भारत में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों को इस बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है.

ये बन रहा है प्लान

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि ओएमसी अब रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (आरटीपी) पर रोक लगाने या उस पर छूट तय करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं. आरटीपी वह इंटरनल प्राइस होती है, जिस पर रिफाइनरीज अपने मार्केटिंग सेगमेंट को फ्यूल बेचती हैं. इस कदम का मकसद रिफाइनरीज को पेट्रोल और डीजल की इंपोर्ट पैरिटी कॉस्ट से कम भुगतान करना है. यदि ग्लोबल लेवल पर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इस प्रस्तावित कदम से रिफाइनरीज कच्चे तेल की बढ़ी हुई कॉस्ट का पूरा बोझ आरटीपी के जरिए आगे नहीं बढ़ा पाएंगी और उन्हें इस प्रभाव का एक हिस्सा खुद वहन करना होगा.

ऐसे होगी नुकसान की भरपाई

सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) जैसी इंटीग्रेटिड कंपनियां अपने रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशनल के बीच इस घाटे की भरपाई कर सकती हैं. दूसरी ओर मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल), चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीपीसीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) जैसी सिंगल रिफाइनरीज का रिटेल मार्केट में नहीं के बराबर दखल है और वे अपना अधिकांश उत्पादन इन्हीं तीन ओएमसी को बेचती हैं. ऐसे में उनके मार्जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा.

रिलायंस भी होगी प्रभावित

सूत्रों ने यह भी कहा कि यदि आरटीपी पर रोक या छूट प्राइवेट रिफाइनरीज पर भी लागू की जाती है, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसे रिफाइनरी कंपनियां भी प्रभावित होंगी. ये दोनों प्राइवेट कंपनियां अपने प्रोडक्शन का एक बड़ा हिस्सा ओएमसी को बेचती हैं. दो प्राइवेट रिफाइनरीज अपने पेट्रोल और डीजल प्रोडक्शन का बड़ा हिस्सा ऑयल मार्केटिंग कंपनीज (ओएमसी) को बेचती हैं, जो देश के 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से 90 फीसदी की मालिक और ऑपरेटर हैं.