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Jharkhand SIR Controversy: झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सियासी घमासान, इंडिया गठबंधन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल; जानें क्या है पूरा विवाद

रांचीः राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की तैयारी है जिसकी शुरुआत जल्द ही होनेवाला है. चुनाव आयोग ने अप्रैल महीने से इसकी शुरुआत करने की घोषणा की है. इसको लेकर चुनाव आयोग की तैयारी अंतिम चरण में है. इधर एसआईआर की सुगबुगाहट तेज होते ही विपक्षी दल मुखर होने लगे हैं.

झारखंड विधानसभा परिसर में कांग्रेस और जेएमएम नेताओं ने इस बहाने भाजपा और चुनाव आयोग पर दबाव बनाते दिखे. ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयोग को एजेंट बनाकर जहां जहां चुनाव होने हैं उन राज्यों में एसआईआर कराया जाता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से इसका विरोध करती रही है और जहां भी गड़बड़ी होगी इसका विरोध किया जाएगा. नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार कहते हैं कि संवैधानिक संस्थाएं जब अपने कर्तव्यों से विचलित होगी तो जनता चाबुक फटकार लगाकर उन्हें कर्तव्यों का याद दिलाएगी. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल होने के नाते चुनावी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए हमलोग हमेशा तैयार हैं.

11 मार्च को एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की बड़ी बैठक

एसआईआर के संबंध में 11 मार्च को राज्य स्तरीय बैठक बुलाई गयी है. इस बैठक में सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारी हिस्सा लेंगे. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्री-रिविजन की गतिविधियों को पूरा करना है ताकि एसआईआर शुरू होने से पहले बची हुई सभी कमियों को इसी महीने सुधार कर सारी व्यवस्थाएं ठीक कर ली जाएं. चुनाव आयोग ने एसआइआर की अधिसूचना जारी होने के बाद करीब 100 दिनों में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है.

वर्तमान समय में अपने राज्य झारखंड में करीब 2.65 करोड़ मतदाता हैं. एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद मतदाता सूची की व्यापक जांच, सत्यापन और सुधार का काम होगा. राज्य के सभी जिलों में करायी गयी मतदाता सूची की प्रारंभिक जांच में ही करीब 15 लाख से अधिक ऐसे मतदाता चिह्नित किये गये हैं, जिनका नाम विभिन्न वजहों से वोटर लिस्ट से हटेगा.