ब्रेकिंग
Raipur Child Kidnapping News: गुढ़ियारी में 1 साल के बच्चे का अपहरण; कमर में बांधकर बाइक से भागा आरो... Bilaspur High Court PIL News: टॉयलेट में बर्तन धोने को मजबूर मरीज! कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट पर चीफ ज... Baba Sodal Mela Security Plan: 25 सितंबर को लगेगा बाबा सोढल मेला; सीसीटीवी, बम व डॉग स्क्वाड संभालें... BJP Punjab Drug Free Rally: 'पंजाब के भविष्य की दिशा तय करेगी यह रैली'; अशोक सरीन हिक्की ने 50 एकड़ ... BJP Organizational Appointments: बीजेपी ने पंजाब और चंडीगढ़ के प्रभारी-सह प्रभारी किए नियुक्त; देखें... Poonch Security Alert: पुंछ में एलओसी से सटे गांवों में मिलीं 3 लैंडमाइन; सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन... Jodhpur Chemical Factory Fire: जोधपुर में केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग के बाद ब्लास्ट; आग बुझाने में ... IIT Bombay Student Suicide: परीक्षा केंद्र का CCTV फुटेज आया सामने; साहिल वाकोडे मामले में बड़ा खुला... Bhoramdeo Sugar Factory Award: भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को लगातार दूसरी बार मिला 'नेशनल एफिशिएंस... Jashpur News: जशपुर पुलिस की मिसाल! दिवंगत आरक्षक देव नारायण सिंह के पुत्र को मिला आरक्षक पद का नियु...

Firozabad Electricity Theft Case: 20 साल चली कानूनी लड़ाई और जीत गया बेगुनाह, फिरोजाबाद कोर्ट ने बिजली चोरी के आरोप से किया बरी

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में बिजली चोरी के गंभीर आरोप में फंसे एक उपभोक्ता को करीब दो दशक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने पूरी तरह से बरी कर दिया. विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम) एवं अपर सत्र न्यायाधीश साक्षी शर्मा की अदालत ने विभाग द्वारा लगाए गए आरोपों को साबित न कर पाने के कारण देवेश कुमार सागर को दोषमुक्त करार दिया. अदालत के फैसले से उपभोक्ता और उनके परिवार ने बड़ी राहत महसूस की.

मामला इस्लामगंज, थाना दक्षिण क्षेत्र में रहने वाले देवेश कुमार से जुड़ा है. विद्युत विभाग की विजिलेंस टीम ने 27 दिसंबर 2005 को उनके घर पर जांच कर एलटी लाइन में कट दिखाते हुए बिजली चोरी का आरोप लगाया था. विभाग की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया, लेकिन सुनवाई के दौरान विभाग अपने दावों को साबित नहीं कर पाया.

बिजली चोरी के मामले कोर्ट ने किया बरी

अदालत में विभाग ने दावा किया कि मौके से 11 मीटर केबल बरामद की गई थी. लेकिन जांच के दौरान यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि चेकिंग रिपोर्ट किसने तैयार की थी. कई सवालों के जवाब विभाग नहीं दे सका, और कथित जब्त केबल भी अदालत में प्रस्तुत नहीं की गई. अभियोजन पक्ष के कई गवाह लगातार नहीं आए, जबकि उनके खिलाफ जमानती और गैर-जमानती वारंट भी जारी हो चुके थे. अंततः न्यायालय ने साक्ष्यों की कमी को देखते हुए उपभोक्ता को बरी कर दिया.

समझौता करने से किया था इनकार

वर्ष 2016 में देवेश कुमार से कहा गया था कि लगभग 5056 हजार रुपये देकर मामला सुलझाया जा सकता है. विभाग ने कई बार समझौते के प्रस्ताव दिए और जुर्माने को कम करने का प्रलोभन भी दिया, लेकिन देवेश कुमार ने साफ इनकार कर दिया. उनका कहना था कि जब उन्होंने चोरी नहीं की है, तो आरोप क्यों मानें. उन्होंने बताया कि 20 साल की कानूनी लड़ाई में करीब 4045 हजार रुपये खर्च हुए और कई बार नौकरी से छुट्टी लेकर अदालत के चक्कर काटने पड़े, लेकिन अब उन्हें संतोष है कि सच की जीत हुई.

पीड़ित ने क्या कहा?

बिजली चोरी के आरोप के चलते लंबे समय तक उन्हें घरेलू कनेक्शन नहीं मिला. मजबूरी में उन्होंने अपने घर की बिजली पत्नी के नाम पर लगे कॉमर्शियल मीटर से ही उपयोग की. बिल कम होने के बावजूद उन्होंने समझौते को ठुकरा कर कानूनी लड़ाई जारी रखने को प्राथमिकता दी

देवेश कुमार का कहना है कि विजिलेंस टीम ने गलत तरीके से बिजली चोरी का मामला दर्ज किया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब चोरी नहीं की है तो सुलह का कोई सवाल ही नहीं उठता. लगभग 20 साल की लंबी लड़ाई में अदालत ने अंततः न्याय प्रदान कर उपभोक्ता को राहत दी, यह साबित करते हुए कि न्याय चाहे देर से मिले, लेकिन जरूर मिलता है.