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Cancer Awareness: कैंसर से डरें नहीं, डटकर मुकाबला करें! समय रहते पहचान और सही इलाज से संभव है जीत

रांची: हर वर्ष 4 फरवरी को दुनिया भर में विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है. यह दिन कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने, बीमारी की समय पर पहचान करने और इलाज शुरू करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है. यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (UICC) द्वारा संचालित यह वैश्विक अभियान कैंसर से प्रभावित लोगों को केंद्र में रखकर इस बीमारी के खिलाफ एकजुटता दिखाने का प्रयास करता है.

इस वर्ष 2026 में विश्व कैंसर दिवस की थीम “United by Unique” है. यह थीम 2025-2027 के तीन वर्षीय अभियान का हिस्सा है, जो यह दर्शाती है कि हर व्यक्ति का कैंसर से संघर्ष अनोखा (unique) होता है, उनकी कहानी, जरूरतें, भावनाएं और अनुभव अलग-अलग होते हैं. फिर भी, हम सभी एक साथ (united) मिलकर इस बीमारी से लड़ सकते हैं. यह थीम कैंसर केयर को व्यक्ति-केंद्रित बनाने पर जोर देती है, जहां मरीज को सिर्फ बीमारी के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के रूप में देखा जाए. जागरूकता से लेकर कार्रवाई तक की इस यात्रा में व्यक्तिगत कहानियों को महत्व दिया जाता है, ताकि स्वास्थ्य प्रणाली वास्तव में लोगों की जरूरतों के अनुरूप हो.

कैंसर का वैश्विक और भारतीय परिदृश्य

कैंसर आज दुनिया की प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और GLOBOCAN के अनुसार, 2022 में वैश्विक स्तर पर लगभग 2 करोड़ नए कैंसर मामले दर्ज हुए, जबकि करीब 97 लाख मौतें हुईं. सबसे आम कैंसर ब्रेस्ट, लंग, कोलोरेक्टल, प्रोस्टेट और स्टमक हैं. बच्चों में हर साल लगभग 4 लाख मामले सामने आते हैं. यदि समय पर पहचान और इलाज हो जाए, तो 30-50% कैंसर मामलों को रोका या ठीक किया जा सकता है.

भारत में कैंसर

भारत में कैंसर का बोझ तेजी से बढ़ रहा है. ICMR-NCRP के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में लगभग 14.61 लाख नए मामले थे, जिनमें पुरुषों में 7.12 लाख और महिलाओं में 7.49 लाख थे. 2024 में अनुमानित नए मामले 15.62 लाख और मौतें 8.74 लाख हैं. 2025 तक यह संख्या बढ़कर 15.7 लाख तक पहुंच सकती है, जबकि 2040 तक 22 लाख से अधिक होने का अनुमान है. भारत में हर 9 में से 1 व्यक्ति को जीवनकाल में कैंसर का खतरा है. पुरुषों में सबसे आम कैंसर लंग, ओरल और प्रोस्टेट हैं, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट, सर्वाइकल और ओवेरियन.

तंबाकू सेवन से लगभग 40% मामले जुड़े हैं, संक्रमण से 20% और अन्य कारकों से 10%. 1990 से 2023 तक कैंसर मामले 26% और मौतें 21% बढ़ी हैं.

झारखंड में कैंसर की स्थिति

झारखंड, जहां जनजातीय और ग्रामीण आबादी अधिक है, कैंसर की समस्या और भी गंभीर है. ICMR-NCRP के अनुसार, 2020 में राज्य में लगभग 33,961 नए मामले थे, जो अब बढ़कर वार्षिक 35,000 से 40,000 तक पहुंच चुके हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्य में कैंसर की घटनाएं प्रति लाख 70 के आसपास हैं, और यह संख्या बढ़ रही है.

पुरुषों में ओरल, लंग और पेट का कैंसर प्रमुख है, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट, सर्वाइकल और पेट का. तंबाकू उपयोग यहां राष्ट्रीय औसत से अधिक है. वयस्कों में 38.9%, जिसमें पुरुषों में 59.7% तक. खैनी, बीड़ी और गुटखा जैसे उत्पाद ओरल कैंसर को बढ़ावा देते हैं. शराब का सेवन भी मुंह के कैंसर के जोखिम को 50% तक बढ़ाता है.

ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर से निदान बड़ी समस्या

ग्रामीण क्षेत्रों में देर से निदान बड़ी समस्या है. सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग दर महज 0.5% और ब्रेस्ट के लिए 0.1% है. कोयला खनन से होने वाला पर्यावरणीय प्रदूषण (हेवी मेटल्स) भी ब्लड कैंसर और अन्य विकारों का कारण बन रहा है. 1990 से 2016 तक घटनाएं 58 से 64.3 प्रति लाख तक बढ़ी हैं. रांची जैसे शहरों में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर जागरूकता की कमी से प्रभावित है.

क्या कहती हैं डॉ. सुमेधा गार्गी (गायनी ऑन्को सर्जन)

रांची की प्रख्यात गायनी ऑन्को सर्जन डॉ. सुमेधा गार्गी कहती हैं कि झारखंड की महिलाओं में कैंसर की स्थिति बहुत चिंताजनक है. सामाजिक व्यवस्था, जानकारी के अभाव और जागरूकता की कमी से अधिकांश महिलाएं एडवांस स्टेज में डॉक्टर के पास पहुंचती हैं. महिलाओं में सबसे ज्यादा सर्वाइकल (बच्चेदानी के मुंह का) और ब्रेस्ट (स्तन) कैंसर के मामले हैं.

सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह ठीक होने योग्य है यदि समय पर पहचान हो. इसके लिए HPV वैक्सीन उपलब्ध है, फिर भी राज्य में एडवांस स्टेज के मामले अधिक हैं. लक्षण जैसे जल्दी शादी, कई बच्चे, पेट के नीचे दर्द, असामान्य डिस्चार्ज, मासिक के अलावा खून आना आदि पर तुरंत जांच करानी चाहिए. किसी भी स्त्री रोग विशेषज्ञ से चेकअप कराएं.

ब्रेस्ट कैंसर के लिए सेल्फ-एग्जामिनेशन जरूरी

ब्रेस्ट कैंसर के लिए सेल्फ-एग्जामिनेशन जरूरी है, गांठ, चमड़ी में बदलाव, रिसाव या खून निकलना हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. परिवार में इतिहास हो तो जेनेटिक टेस्टिंग कराएं, जो रांची के निजी संस्थानों में उपलब्ध है. पहले 40-50 वर्ष उम्र में ज्यादा होता था, लेकिन अब कम उम्र में भी मामले बढ़ रहे हैं. ओपीडी में 200 कैंसर मरीजों में 40-50 महिलाएं ब्रेस्ट या सर्वाइकल कैंसर की होती हैं. जागरूकता से जान बचाई जा सकती है.

क्या कहते हैं ब्लड कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक रंजन

रांची के ब्लड कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक रंजन कहते हैं कि कैंसर देश की बड़ी स्वास्थ्य समस्या है. वैश्विक स्तर पर यह मौत का दूसरा प्रमुख कारण है. झारखंड में स्थिति भयावह है, क्योंकि यहां मिनरल्स और हेवी मेटल्स से प्रदूषण अधिक है, जिससे ब्लड कैंसर और एप्लास्टिक एनीमिया के मामले बढ़े हैं. सदर अस्पताल में हर महीने करीब 10 नए ब्लड कैंसर के मरीज इलाज पर आते हैं, लेकिन कई गुना मामले अनडायग्नोज्ड रहकर मौत हो जाती है.

लक्षण जैसे खून न बनना, प्लेटलेट्स की कमी, बार-बार बुखार, वजन घटना, खून आना, गांठ आदि पर जागरूक रहें. इलाज महंगा है, नए मॉलिक्यूल्स जीवन बढ़ाते हैं, लेकिन सरकार को इन्हें आयुष्मान भारत में शामिल करने की जरूरत है. जेनेटिक लैब और बेहतर सुविधाओं की कमी है.

रोकथाम और जागरूकता

कैंसर के 70% मामले रोके जा सकते हैं. तंबाकू, धूम्रपान, शराब, मोटापा, अस्वास्थ्यकर आहार कैंसर के कारण बन सकते हैं. स्क्रीनिंग, वैक्सीनेशन (HPV), सेल्फ-एग्जाम और समय पर जांच जरूरी है. झारखंड में तंबाकू नियंत्रण, प्रदूषण कम करना और ग्रामीण स्क्रीनिंग बढ़ाना महत्वपूर्ण है. विश्व कैंसर दिवस हमें याद दिलाता है कि हम सब United by Unique हैं, हर कहानी अलग, लेकिन लड़ाई एक. जागरूकता, कार्रवाई और एकजुटता से हम कैंसर को हराने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकते हैं.