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आम आदमी पार्टी ने बोला सफेद झूठ! तरुण चुघ का आरोप— ‘आतिशी और मान सरकार ने कोर्ट को किया गुमराह’, गुरुओं के अपमान का मुद्दा गरमाया

चंडीगढ़ : भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने कहा कि जालंधर की माननीय अदालत का हालिया आदेश किसी भी तरह से अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि यह मात्र एक अंतरिम आदेश है, जो पूरी तरह मान सरकार के नियंत्रण वाली फॉरेंसिक रिपोर्ट पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस आदेश को लेकर कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यह न तो दोष सिद्ध करता है और न ही किसी तथ्य का अंतिम निर्धारण करता है।

चुघ ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि जिस फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर यह अंतरिम आदेश पारित हुआ, उसमें न तो चेन ऑफ कस्टडी का कोई उल्लेख है, न ही टेंपरिंग की जांच का विवरण, न रिपोर्ट को चुनौती देने का अवसर दिया गया और न ही किसी प्रकार की प्रक्रिया पर अदालत में कोई विस्तृत चर्चा हुई। न कोई सामने का गवाह आया, न किसी पक्ष का जवाब रिकॉर्ड पर लिया गया, और बिना किसी पारदर्शिता के निष्कर्ष घोषित कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि फॉरेंसिक लैब ने किन वैज्ञानिक पैरामीटर्स पर जांच की। ऑडियो वेवफॉर्म, मेटाडाटा एनालिसिस, फ्रेम-बाय-फ्रेम जांच, टाइमलाइन सिंकिंग जैसे किसी भी तकनीकी आधार का आदेश में कोई विवरण नहीं है, जिससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि जांच वास्तव में किस स्तर पर और किस सामग्री की हुई।

तरुण चुघ ने कहा कि सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि यदि दिल्ली विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड से वीडियो ही तलब नहीं किया गया, तो फिर यह जांच किस वीडियो की और किस स्रोत की की गई। उन्होंने कहा कि विधानसभा के पटल पर हुई कार्यवाही एक आधिकारिक रिकॉर्ड होती है क्योंकि आप नेता आतिशी ने विधानसभा में गुरुओं का अपमान किया और उसे दरकिनार कर किसी अन्य सामग्री पर निष्कर्ष निकालना न्यायिक प्रक्रिया की आत्मा के विपरीत है।

चुघ ने कहा कि एक तरफ मान सरकार दिल्ली में विधानसभा से जुड़े झूठे मामलों में समय मांग रही है और दूसरी तरफ उसी सरकार के नियंत्रण वाली एजेंसियों के आधार पर अदालत को गुमराह कर अंतरिम आदेश बनवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरुओं के सम्मान जैसे अत्यंत संवेदनशील विषय पर राजनीति करना और अधूरी प्रक्रिया के सहारे नैरेटिव गढ़ना न केवल अनुचित है, बल्कि लोकतंत्र और न्याय दोनों के लिए खतरनाक है।

चुघ ने मांग की, कि गुरुओं के अपमान के मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, पंजाब में गुरुओ को अपमानित करने वालों को बचाने वाली उन्हें संरक्षण देने वाली सरकार बर्दाश्त नहीं की जाएगी।