ब्रेकिंग
Winter Health Tips: मौसम में बदलाव के साथ बढ़ने लगा सर्दी-जुकाम का खतरा, ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल... Punjab Assembly Elections 2027: पंजाब में जल्द बज सकता है चुनाव का बिगुल, जनवरी के पहले हफ्ते में लग... Amritsar Road Accident: अमृतसर में तेज रफ्तार बस की टक्कर से बुलेट सवार युवक की मौत, बहन गंभीर रूप स... Amritsar Road Accident: अमृतसर में तेज रफ्तार बस ने बुलेट सवार भाई-बहन को मारी टक्कर, मौके पर भाई की... Gold and Silver Rate Today: सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट, जानिए आज क्या हैं 24 कैरेट औ... Punjab Assembly Elections: आम आदमी पार्टी ने जारी की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, मुख्यमंत्री भगवंत मा... Punjab Cabinet Meeting Today: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुलाई पंजाब कैबिनेट की बैठक, बदले गए समय... दिल्ली और वाराणसी के बीच देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का हुआ शानदार शुभारंभ, सीएम योगी और रेल... Anantapur School Attack: आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में क्लासरूम के अंदर 10वीं की छात्रा पर आरी से हमला... Barabanki Murder Mystery: 14 लाख के विवाद और प्रेम प्रसंग में हुई थी कारोबारी नीतेश मौर्य की हत्या, ...

Donald Trump Ukraine Peace Plan: रूसी तेल और ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की वापसी की चर्चा, जेलेंस्की के साथ बढ़ सकता है तनाव

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे लंबे युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस के साथ बड़े स्तर पर व्यावसायिक और आर्थिक समझौते करने की योजना पर काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच तेल के कारोबार को दोबारा से शुरू करने को लेकर गंभीर बातचीत का दौर जारी है। इस पूरी योजना के तहत अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों की रूस की ऑयल इंडस्ट्री में वापसी और यूरोप के देशों को एक बार फिर से रूसी तेल की आपूर्ति बहाल करने जैसे अहम प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। इसके अलावा अन्य प्रमुख उद्योगों में भी दोनों देश मिलकर आपसी सहयोग कर सकते हैं। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि ये तमाम कारोबारी समझौते तभी पूर्ण रूप से लागू होंगे जब यूक्रेन युद्ध पूरी तरह थम जाएगा।

सखालिन तेल परियोजना और द्रुजबा पाइपलाइन को दोबारा शुरू करने को लेकर हो रही है चर्चा

सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और रूस के बीच मुख्य रूप से दो बड़े प्रस्तावों पर मंथन चल रहा है। पहला प्रस्ताव रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में सखालिन के पास समुद्र के भीतर चल रही साझा तेल परियोजना को फिर से सुचारू करने का है। वहीं दूसरा प्रस्ताव ऐतिहासिक द्रुजबा पाइपलाइन के जरिए यूरोप को एक बार फिर रूसी तेल भेजने से जुड़ा हुआ है। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने सितंबर के शुरुआती दिनों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात के दौरान इन तमाम समझौतों पर विस्तार से चर्चा की थी। अमेरिका को यह पूरी उम्मीद है कि अगले महीने संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों के बीच एक अहम शांति वार्ता आयोजित की जाएगी, जो फरवरी के बाद तीनों देशों की पहली ऐसी बड़ी बैठक होगी।

एक्सॉनमोबिल की वापसी पर संशय और टाइटेनियम तथा विमानन क्षेत्र में सहयोग के बन रहे हैं प्रस्ताव

इस पूरी योजना के तहत सखालिन तेल परियोजना में पहले से जुड़ी एकमात्र अमेरिकी कंपनी एक्सॉनमोबिल ने पिछले साल स्पष्ट किया था कि उसकी रूस में दोबारा काम शुरू करने की कोई मंशा नहीं है, हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि कंपनी ने अपने उस रुख में कोई बदलाव किया है या नहीं। ऊर्जा सेक्टर के अलावा, अमेरिका और रूस के बीच विमान निर्माण में काम आने वाली महत्वपूर्ण धातु टाइटेनियम के उत्पादन में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही, अमेरिकी एयरलाइंस के विमानों को रूसी हवाई क्षेत्र से एक बार फिर से आवाजाही करने और उड़ान भरने की अनुमति देने पर भी बातचीत चल रही है, जिससे लंबी उड़ानों के दौरान ईंधन के खर्च में भारी कमी लाई जा सके।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ बढ़ रहा है तनाव, यूरोपीय नेताओं ने भी पुतिन से की फोन पर बात

सन 2022 में यूक्रेन पर रूसी सैन्य हमले के बाद से रूस पश्चिमी देशों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने के बाद रूस अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना चाहता है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा रूस से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने के सौदे को मंजूरी दिए जाने के बाद से यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी देश खासे नाराज चल रहे हैं। दूसरी ओर, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ फोन पर लंबी बातचीत कर युद्ध रोकने और तनाव घटाने की अपील की है, जबकि क्रेमलिन ने इस संघर्ष के लंबा खींचने के लिए पश्चिमी देशों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।