Haryana Land Ownership Rules: हरियाणा में पुजारियों और दोहलीदारों के लिए बड़ा फैसला, जमीन के मालिकाना हक की बाधाएं दूर करेंगे एसडीएम
चंडीगढ़: हरियाणा राज्य के भीतर धार्मिक स्थलों की सेवा करने वाले पुजारियों, पुरोहितों और दोहलीदारों को ऐतिहासिक रूप से दान में मिली जमीनों के मालिकाना हक को लेकर आ रही तमाम अड़चनों और तकनीकी बाधाओं को अब पूरी तरह से दूर किया जाएगा। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक नई और महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत अब उपमंडल अधिकारी (नागरिक) यानी एसडीएम (SDM) को भी इन भूमि मामलों की सुनवाई करने और उनका समाधान करने की विशेष शक्तियां प्रदान कर दी गई हैं। राजस्व विभाग ने प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर के रूप में अब एसडीएम स्तर के अधिकारियों को भी ये अधिकार सौंप दिए हैं, जबकि इससे पहले यह तमाम शक्तियां केवल जिला कलेक्टर (डीसी) के पास ही सीमित थीं।
वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने जारी की अधिसूचना, एसडीएम को मिली प्रथम श्रेणी कलेक्टर की शक्तियां
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा द्वारा मंगलवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस नई अधिसूचना के प्रावधानों के मुताबिक, हरियाणा में दोहलीदार (मंदिरों के पुजारी), बुटीमार (जंगली और झाड़ीनुमा भूमि को साफ करके उस पर खेती करने वाले), भौडेदार (मंदिरों में नियमित सेवा देने वाले) तथा मुकररीटार (जिन्हें एक तय समय सीमा के लिए जमीन दान या उपयोग के लिए दी गई थी) को दान में मिली भूमि पर मालिकाना अधिकार निहित करने के लिए एसडीएम को प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर के रूप में अधिकृत किया गया है। अब ये अधिकारी अपनी वैधानिक शक्तियों का पूरी तरह से उपयोग करते हुए मालिकाना हक से जुड़े सभी लंबित मामलों और बाधाओं की खुली सुनवाई करेंगे और विवादों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित कराएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में बना था कानून, 20 साल से काबिज लोगों को मिलना है हक
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार ने दोहलीदारों और पुजारियों को उनकी उपभोग वाली जमीन का मालिकाना हक देने के उद्देश्य से नवंबर 2023 में एक ठोस कानून बनाया था। इस कानूनी प्रावधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति दान में मिली इस प्रकार की जमीन पर खेती कर रहा है या उसे संभाल रहा है और वहां उसका कब्जा 20 वर्ष से अधिक समय से चला आ रहा है, तो उसे उस भूमि का वैध मालिकाना हक प्रदान किया जाना है। हालांकि, इस कानून के आने के बावजूद कई मामले प्रशासनिक और तकनीकी पेचीदगियों के कारण विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़े हुए थे।
उपायुक्तों पर से घटेगा प्रशासनिक कामकाज का बोझ, मामलों का तेजी से हो सकेगा निपटारा
अब तक इन सभी मामलों की सुनवाई और फैसले के अधिकार केवल जिला उपायुक्तों (DCs) के पास ही सुरक्षित थे, जिसके कारण प्रक्रिया में अधिक समय लगता था। सरकार के इस नवीनतम और व्यावहारिक निर्णय से जिला मुख्यालयों पर उपायुक्तों के स्तर पर प्रशासनिक कार्यों का भारी बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। अब स्थानीय स्तर पर एसडीएम सीधे तौर पर इन मामलों की सुनवाई करेंगे, जिससे वर्षों से अटके पड़े जमीनी मामलों का निपटारा बेहद कम समय में और सुगमता से हो सकेगा।