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Sagar University News: ग्रेजुएशन के छात्रों को मिला बड़ा मौका, ICSSR से रिसर्च प्रोजेक्ट और लाखों का फंड मंजूर

सागर: पारंपरिक रूप से रिसर्च प्रोजेक्ट्स या फेलोशिप हासिल करने के लिए स्टूडेंट्स को पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) या नेट/पीएचडी पूरी होने का लंबा इंतजार करना पड़ता था, और सरकारी अनुदान भी आमतौर पर उच्च शिक्षा के बाद ही मिलते थे। लेकिन अब उच्च शिक्षा व्यवस्था में आए बड़े बदलाव के तहत ग्रेजुएशन कर रहे छात्र भी सीधे तौर पर शोध कार्यों से जुड़ सकेंगे। इसके तहत अब छात्र अपने स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में ही रिसर्च प्रोजेक्ट की मांग कर सकते हैं।

ICSSR युवा शोध प्रतिभा योजना के तहत मिला प्रोजेक्ट फंड

भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली द्वारा संचालित प्रतिष्ठित ‘युवा शोध प्रतिभा योजना’ के अंतर्गत अब स्नातक स्तर के छात्रों को भी रिसर्च प्रोजेक्ट और बाकायदा आर्थिक फंड मिलना शुरू हो गया है। मौजूदा शैक्षणिक सत्र से ही इस योजना के तहत छात्रों को प्रोजेक्ट्स की मंजूरी मिलने लगी है। इसी कड़ी में डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के शिक्षाशास्त्र विभाग के अंतर्गत संचालित आईटीईपी (ITEP), बी.कॉम और बी.एड कोर्स के विद्यार्थियों के दो महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट्स स्वीकृत किए गए हैं।

मध्य प्रदेश की सागर यूनिवर्सिटी के नाम दर्ज हुई बड़ी उपलब्धि

यह पहली बार है जब सागर यूनिवर्सिटी के शिक्षाशास्त्र विभाग के 7वें सेमेस्टर की दो अनुसंधान टीमों को ICSSR की इस प्रतिष्ठित युवा शोध प्रतिभा योजना के तहत प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि वर्तमान आईटीईपी बैच देश के उन चुनिंदा चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के पहले बैचों में से एक है। मध्य प्रदेश राज्य से डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय को यह गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ है।

पहले प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत हुए 2.5 लाख रुपये

सागर यूनिवर्सिटी के शिक्षाशास्त्र विभाग को मिले दो प्रोजेक्ट्स में से पहले प्रोजेक्ट के लिए 2 लाख 50 हजार रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। यह प्रोजेक्ट भूमिका चौरसिया के नेतृत्व में आनंद अहिरवार और प्रियंश चढ़ार की टीम द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस महत्वपूर्ण शोध का शीर्षक ”Indian Philosophy-Based Psychological Intervention for Enhancing Well-being, Resilience and Academic Engagement among Secondary Students” रखा गया है।

दूसरे प्रोजेक्ट के लिए 2.4 लाख रुपये का फंड मंजूर

वहीं, दूसरे रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए 2 लाख 40 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस शोध को अक्षय दुबे के नेतृत्व में तरुण रिछारिया और उन्नति राज की टीम ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट का शीर्षक ”Developing and Testing a TEK-Based Environmental Conservation Module for Secondary School Students” है।

पूर्वजों की परंपरागत विधियों और मानसिक स्वास्थ्य पर होगा शोध

प्रोजेक्ट हासिल करने वाली टीम की सदस्य भूमिका चौरसिया ने बताया कि उनके शोध का मुख्य उद्देश्य माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर काम करना है, जिसे वे आगामी छह महीनों के भीतर पूरा करेंगी। वहीं, दूसरी टीम के सदस्य तरुण रिछारिया ने साझा किया कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से वे सेकेंडरी लेवल के स्टूडेंट्स को हमारे पूर्वजों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोग की जाने वाली पारंपरिक और प्राचीन विधियों के बारे में विस्तार से बताएंगे।

नई शिक्षा नीति के तहत यूजी स्तर पर मिल रहा शोध का अनुभव

प्रोजेक्ट गाइड और शिक्षाशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार टीडी ने बताया कि इंटीग्रेटेड प्रोग्राम के पहले बैच को यह ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद यह पहला मौका है जब ITEP कोर्स का बैच निकल रहा है, और छात्र ग्रेजुएशन स्तर पर ही यह सीख पा रहे हैं कि रिसर्च कैसे की जाती है और इसमें किस तरह काम होता है। उन्होंने आगे कहा कि इससे छात्रों को भविष्य में पीजी या उच्च शोध के दौरान गहरा अनुभव मिलेगा और इस छह महीने की प्रोजेक्ट अवधि में स्टूडेंट्स को स्टायपेंड भी दिया जाएगा।

विभाग और यूनिवर्सिटी के लिए यह एक गौरवशाली क्षण

शिक्षाशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार जैन ने इसे अपने विभाग और पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सागर यूनिवर्सिटी के संपूर्ण इतिहास में यह पहला अवसर है जब स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा अनुसंधान प्रोजेक्ट प्राप्त हुआ है। इससे छात्रों में शोध के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे ग्रेजुएशन के दौरान ही रिसर्च की बारीकियों और तौर-तरीकों से भली-भांति वाकिफ हो सकेंगे।